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जानसठ में फिर से खनिज पदाथों की खोज शुरु
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जानसठ में फिर से खनिज पदार्थों की खोज शुरू
जानसठ (मुजफ्फरनगर)। विकास खंड के गांव कम्हेड़ा, ढांसरी, खुजेड़ा, जड़वड़, कासमपुर खोला, कैलापुर जसमोर आदि गांवों में फिर से एक साल बाद फिर से खनिज पदार्थों की खोज प्रारंभ कर दी गई है।
गांव जड़वड़ में किसानों के खेतों में ओएनजीसी कंपनी के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा छह फुट गहरा बोरवेल कर उसमें ब्लास्ट किए। ब्लास्ट से धरातल में कंपन की क्षमता को आंका गया। ग्रामीण देवेंद्र का कहना है कि जब मंगलवार की शाम के समय बोरवेल के अंदर ब्लास्ट किए जा रहे थे, तब मैंने समझा कि बहुत तीव्र गति से भूकंप आया है। किसान सतीश कुमार का कहना है कि जिस वक्त उन्होंने ब्लास्ट किए, उस वक्त जो पास की नलकूप थी, तो उन्होंने कुछ समय के लिए पानी छोड़ दिया था। हालांकि परीक्षण करने के बाद बोरवेल को बंद कर दिया जाता है। इस बारे में ओएनजीसी कंपनी के चीफ इंजीनियर संतोष मौर्य ने बताया कि जांच परखने के बाद ही ब्लास्ट करते हैं। इससे पूर्व काफी जगह ऐसे ब्लास्ट किए गए हैं। इन ब्लास्टों से कहीं भी कोई नुकसान नहीं होता है।
बर्बाद फसल का मुआवजा देने का आश्वासन
गांव जड़वड़ के किसान सतीश कुमार का कहना है कि कंपनी के कर्मचारियों ने मुझे बिन बताए मेरे खेत में खड़ी गन्ने की फसल को काटकर अलग कर दिया है। खेतों में बोरवेल करने के बाद ब्लास्ट भी कर दिए गए हैं, जिससे गन्ने की फसल सूख गई है, जिसकी मुझे कंपनी के किसी भी कर्मचारी ने कोई जानकारी नहीं दी है। किसान ने इसकी जानकारी किसान नेताओं को दी। मंगलवार की शाम को भारतीय किसान यूनियन तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर व जिलाध्यक्ष अखिलेश चौधरी किसान के घर पहुंचे। कंपनी के चीफ इंजीनियर मनीष कुमार से बातचीत की। चीफ इंजीनियर ने जिन किसानों की फसल बर्बाद होगी, उन किसानों को फसल का मुआवजा कंपनी की ओर से दिया जाएगा।
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जानसठ (मुजफ्फरनगर)। विकास खंड के गांव कम्हेड़ा, ढांसरी, खुजेड़ा, जड़वड़, कासमपुर खोला, कैलापुर जसमोर आदि गांवों में फिर से एक साल बाद फिर से खनिज पदार्थों की खोज प्रारंभ कर दी गई है।
गांव जड़वड़ में किसानों के खेतों में ओएनजीसी कंपनी के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा छह फुट गहरा बोरवेल कर उसमें ब्लास्ट किए। ब्लास्ट से धरातल में कंपन की क्षमता को आंका गया। ग्रामीण देवेंद्र का कहना है कि जब मंगलवार की शाम के समय बोरवेल के अंदर ब्लास्ट किए जा रहे थे, तब मैंने समझा कि बहुत तीव्र गति से भूकंप आया है। किसान सतीश कुमार का कहना है कि जिस वक्त उन्होंने ब्लास्ट किए, उस वक्त जो पास की नलकूप थी, तो उन्होंने कुछ समय के लिए पानी छोड़ दिया था। हालांकि परीक्षण करने के बाद बोरवेल को बंद कर दिया जाता है। इस बारे में ओएनजीसी कंपनी के चीफ इंजीनियर संतोष मौर्य ने बताया कि जांच परखने के बाद ही ब्लास्ट करते हैं। इससे पूर्व काफी जगह ऐसे ब्लास्ट किए गए हैं। इन ब्लास्टों से कहीं भी कोई नुकसान नहीं होता है।
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बर्बाद फसल का मुआवजा देने का आश्वासन
गांव जड़वड़ के किसान सतीश कुमार का कहना है कि कंपनी के कर्मचारियों ने मुझे बिन बताए मेरे खेत में खड़ी गन्ने की फसल को काटकर अलग कर दिया है। खेतों में बोरवेल करने के बाद ब्लास्ट भी कर दिए गए हैं, जिससे गन्ने की फसल सूख गई है, जिसकी मुझे कंपनी के किसी भी कर्मचारी ने कोई जानकारी नहीं दी है। किसान ने इसकी जानकारी किसान नेताओं को दी। मंगलवार की शाम को भारतीय किसान यूनियन तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर व जिलाध्यक्ष अखिलेश चौधरी किसान के घर पहुंचे। कंपनी के चीफ इंजीनियर मनीष कुमार से बातचीत की। चीफ इंजीनियर ने जिन किसानों की फसल बर्बाद होगी, उन किसानों को फसल का मुआवजा कंपनी की ओर से दिया जाएगा।
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