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आचार्य भारत भूषण महाराज का मंगल प्रवेश
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आचार्य भारत भूषण महाराज का मंगल प्रवेश
खतौली। धर्मनगरी में आचार्य भारत भूषण महाराज ने सलावा से पद विहार करते हुए बृहस्पतिवार की सुबह नगर में प्रवेश किया। सुबह के समय जैन धर्म का जयघोष करते हुए सलावा जैन मंदिर पर महाराज का मंगल विहार कराने के लिए काफी संख्या में लोग भक्त पहुंचे। आचार्य ने गंगनहर पटरी के किनारे से पद विहार किया। आगे आगे श्रावकगण हाथ में जैन धर्म की ध्वज पताका लेकर दिव्य घोष करते हुए चले। मार्ग में भक्त काफिले में जुड़ते हुए नसिया जी मंदिर पर भक्तों ने जैन संत की मंगल अगवानी की। चारों तरफ का वातावरण धर्ममय था।
जीटी रोड व बड़ा बाजार से विहार करते हुए महाराज श्री कानूनगोयान स्ट्रीट स्थित भागीरथी मंदिर पहुंचे। यहां पर महाराज के मार्गदर्शन में नैतिक संस्कार के प्रशिक्षण हेतु जैनामृत शिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। मंदिर में उपस्थित भक्तों को महाराज श्री ने अपनी पीयूषवाणी में बताया कि संतों के सत्संग से नीरस जीवन सरस बन जाता है। हृदय ईश्वरीय भक्ति से भर जाता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत हमारे मध्यस्थ होते हैं। धर्म व संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहो। मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म है। आगामी पीढ़ी को नैतिक संस्कारों के प्रति जागरूक करना हमारा परम कर्तव्य है। विहार व्यवस्था में रामकुमार, अरुण, राकेश अंबर, जयभगवान, सतीश, सुशील मंडी, संजीव, विनोद प्रवक्ता, पिंटू, चिराग, अंकुश, अजय हैंगर, महेश, प्रवीण, लवी, वैभव जैन सभासद, अविरल, अंजू, मंजू, नीरज जैन आदि का सहयोग रहा।
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खतौली। धर्मनगरी में आचार्य भारत भूषण महाराज ने सलावा से पद विहार करते हुए बृहस्पतिवार की सुबह नगर में प्रवेश किया। सुबह के समय जैन धर्म का जयघोष करते हुए सलावा जैन मंदिर पर महाराज का मंगल विहार कराने के लिए काफी संख्या में लोग भक्त पहुंचे। आचार्य ने गंगनहर पटरी के किनारे से पद विहार किया। आगे आगे श्रावकगण हाथ में जैन धर्म की ध्वज पताका लेकर दिव्य घोष करते हुए चले। मार्ग में भक्त काफिले में जुड़ते हुए नसिया जी मंदिर पर भक्तों ने जैन संत की मंगल अगवानी की। चारों तरफ का वातावरण धर्ममय था।
जीटी रोड व बड़ा बाजार से विहार करते हुए महाराज श्री कानूनगोयान स्ट्रीट स्थित भागीरथी मंदिर पहुंचे। यहां पर महाराज के मार्गदर्शन में नैतिक संस्कार के प्रशिक्षण हेतु जैनामृत शिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। मंदिर में उपस्थित भक्तों को महाराज श्री ने अपनी पीयूषवाणी में बताया कि संतों के सत्संग से नीरस जीवन सरस बन जाता है। हृदय ईश्वरीय भक्ति से भर जाता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत हमारे मध्यस्थ होते हैं। धर्म व संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहो। मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म है। आगामी पीढ़ी को नैतिक संस्कारों के प्रति जागरूक करना हमारा परम कर्तव्य है। विहार व्यवस्था में रामकुमार, अरुण, राकेश अंबर, जयभगवान, सतीश, सुशील मंडी, संजीव, विनोद प्रवक्ता, पिंटू, चिराग, अंकुश, अजय हैंगर, महेश, प्रवीण, लवी, वैभव जैन सभासद, अविरल, अंजू, मंजू, नीरज जैन आदि का सहयोग रहा।
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