{"_id":"5a9c3b5b4f1c1b013e8b51b8","slug":"171520188251-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विष्णु आश्रम ने जलाई थी शुकतीर्थ में ज्ञान की ज्योति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विष्णु आश्रम ने जलाई थी शुकतीर्थ में ज्ञान की ज्योति
Updated Mon, 05 Mar 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोरना।
पौराणिक शुकतीर्थ में ज्ञान और अध्यात्म को ज्योर्तिमय कर गए दंडी स्वामी विष्णु आश्रम का जीवन भागवत स्वरूप था। सोमवार से प्रारंभ हो रहे संत की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में भागीदारी के लिए अनुयायी और भक्त जुट रहे हैं। धार्मिक नगरी में दंडी आश्रम की शोभा और गरिमा की देश में पहचान है।
भागवत मनीषी पूज्य विष्णु आश्रम महाराज ने शुकतीर्थ को अपनी अध्यात्मिक ऊर्जा शक्ति से संचित किया। महाभारतकालीन तीर्थ की जीर्णोद्धार यात्रा में वीतराग स्वामी कल्याणदेव और स्वामी विष्णु आश्रम ने अपने तप, त्याग और सेवा से शुकतीर्थ की संस्कृति और विशिष्टा को नया आयाम दिया। दंडी आश्रम की भव्यता अद्भुत है। यहां दंडी स्वामी स्वाध्याय और भागवत श्रवण करते हैं। अनेक प्रांतों के विद्यार्थी वेदादि अध्ययन, कर्मकांड और भागवत वाचन की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। भारत के श्रेष्ठ भागवत विद्वानों में एक स्वामी विष्णु आश्रम महाराज अलीगढ़ जिले के गांव ईकड़ी के सनाढ्य ब्राह्मण पंडित रघुवर दयाल और मां कुंदनदेवी के परिवार में वर्ष 1911 में जन्मे थे। उनका बचपन का नाम पंडित प्रभुदत्त था। अखंड ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर वैराग्यवृत्ति के अनुगामी बने। रामघाट में प्रथमा उत्तीर्ण की। वेदांत शास्त्र, न्याय शास्त्र और व्याकरण की शिक्षा बुलंदशहर के नरौरा स्थित नरवर सांगवेद विद्यालय से प्राप्त की। हरिद्वार कनखल के स्वामी प्रभाष भिक्षु के सानिध्य में उन्होंने अद्वैत सिद्धि हासिल की। विरक्त स्वामी शंकर भारती के मार्गदर्शन में कई बार कर्णवास, शुक्रताल आदि तीर्थाटन को जाने का मौका मिला। ज्ञान के तप से भागवत के ज्योतिपुंज बने स्वामी विष्णु आश्रम महाराज दंडी स्वामी बन गए। स्वामी विष्णु आश्रम महाराज कहते थे कि जब पहली बार शुकतीर्थ आए थे तो यहां वट वृक्ष की जड़ों को पकड़ कर इन्हीं में भगवान के दर्शन करते थे। दंडी आश्रम के संचालक स्वामी गुरुदत्त ब्रह्मचारी के मार्गदर्शन में वर्तमान में यह उत्कृष्ट संस्था संचालित है। उन्होंने बताया कि भागवत मनीषी स्वामी विष्णु आश्रम महाराज का जीवन निर्मल, सरल और अध्यात्मिक ज्ञान को समर्पित था।
आज निकलेगी कलश यात्रा,
मोरना। दंडी आश्रम में वेद विद्यालय के साथ कथा और अध्यात्मिक भवन स्थित है। गऊशाला, भोजनालय और वृद्ध दंडी स्वामियों के लिए आवासीय व्यवस्था है। चतुर्मास में अनुष्ठान व्रत को संत यहां पहुंचते हैं। भागवत और अन्य कथाओं के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। आचार्य उमाकांत द्विवेदी ने बताया कि पुण्य स्मृति समारोह में पांच से 12 मार्च तक स्वामी विष्णु आश्रम के शिष्य एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ भागवत कथा की अमृत वर्षा करेंगे। सोमवार को प्रात: नौ बजे मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। कथा प्रात: नौ से 11.30 बजे तथा दोपहर में चार बजे से सायं 6.30 बजे तक प्रतिदिन होगी। आचार्य गिरीश वशिष्ठ एवं राजीव मिश्र के अनुसार विशेष महोत्सव 12 मार्च को है, जिसमें गीता पाठ, पादुका समर्चन और श्रद्धांजलि सभा होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पौराणिक शुकतीर्थ में ज्ञान और अध्यात्म को ज्योर्तिमय कर गए दंडी स्वामी विष्णु आश्रम का जीवन भागवत स्वरूप था। सोमवार से प्रारंभ हो रहे संत की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में भागीदारी के लिए अनुयायी और भक्त जुट रहे हैं। धार्मिक नगरी में दंडी आश्रम की शोभा और गरिमा की देश में पहचान है।
भागवत मनीषी पूज्य विष्णु आश्रम महाराज ने शुकतीर्थ को अपनी अध्यात्मिक ऊर्जा शक्ति से संचित किया। महाभारतकालीन तीर्थ की जीर्णोद्धार यात्रा में वीतराग स्वामी कल्याणदेव और स्वामी विष्णु आश्रम ने अपने तप, त्याग और सेवा से शुकतीर्थ की संस्कृति और विशिष्टा को नया आयाम दिया। दंडी आश्रम की भव्यता अद्भुत है। यहां दंडी स्वामी स्वाध्याय और भागवत श्रवण करते हैं। अनेक प्रांतों के विद्यार्थी वेदादि अध्ययन, कर्मकांड और भागवत वाचन की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। भारत के श्रेष्ठ भागवत विद्वानों में एक स्वामी विष्णु आश्रम महाराज अलीगढ़ जिले के गांव ईकड़ी के सनाढ्य ब्राह्मण पंडित रघुवर दयाल और मां कुंदनदेवी के परिवार में वर्ष 1911 में जन्मे थे। उनका बचपन का नाम पंडित प्रभुदत्त था। अखंड ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर वैराग्यवृत्ति के अनुगामी बने। रामघाट में प्रथमा उत्तीर्ण की। वेदांत शास्त्र, न्याय शास्त्र और व्याकरण की शिक्षा बुलंदशहर के नरौरा स्थित नरवर सांगवेद विद्यालय से प्राप्त की। हरिद्वार कनखल के स्वामी प्रभाष भिक्षु के सानिध्य में उन्होंने अद्वैत सिद्धि हासिल की। विरक्त स्वामी शंकर भारती के मार्गदर्शन में कई बार कर्णवास, शुक्रताल आदि तीर्थाटन को जाने का मौका मिला। ज्ञान के तप से भागवत के ज्योतिपुंज बने स्वामी विष्णु आश्रम महाराज दंडी स्वामी बन गए। स्वामी विष्णु आश्रम महाराज कहते थे कि जब पहली बार शुकतीर्थ आए थे तो यहां वट वृक्ष की जड़ों को पकड़ कर इन्हीं में भगवान के दर्शन करते थे। दंडी आश्रम के संचालक स्वामी गुरुदत्त ब्रह्मचारी के मार्गदर्शन में वर्तमान में यह उत्कृष्ट संस्था संचालित है। उन्होंने बताया कि भागवत मनीषी स्वामी विष्णु आश्रम महाराज का जीवन निर्मल, सरल और अध्यात्मिक ज्ञान को समर्पित था।
विज्ञापन
आज निकलेगी कलश यात्रा,
मोरना। दंडी आश्रम में वेद विद्यालय के साथ कथा और अध्यात्मिक भवन स्थित है। गऊशाला, भोजनालय और वृद्ध दंडी स्वामियों के लिए आवासीय व्यवस्था है। चतुर्मास में अनुष्ठान व्रत को संत यहां पहुंचते हैं। भागवत और अन्य कथाओं के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। आचार्य उमाकांत द्विवेदी ने बताया कि पुण्य स्मृति समारोह में पांच से 12 मार्च तक स्वामी विष्णु आश्रम के शिष्य एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ भागवत कथा की अमृत वर्षा करेंगे। सोमवार को प्रात: नौ बजे मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। कथा प्रात: नौ से 11.30 बजे तथा दोपहर में चार बजे से सायं 6.30 बजे तक प्रतिदिन होगी। आचार्य गिरीश वशिष्ठ एवं राजीव मिश्र के अनुसार विशेष महोत्सव 12 मार्च को है, जिसमें गीता पाठ, पादुका समर्चन और श्रद्धांजलि सभा होगी।
विज्ञापन