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बच्चों को बनाएं सलाहकार और साझेदार
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बच्चों को बनाएं सलाहकार और साझीदार
मुजफ्फरनगर। द एसडी पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा का प्रथम ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बाल मनोविज्ञान को समझकर उसी के अनुसार आचरण करने पर जोर दिया गया। बताया गया कि बच्चों को हर खुशी और गम में साझीदार और सलाहकार बनाएं। उनकी कमियों पर ही ध्यान दें बल्कि विशेषताओं का भी जिक्र करें।
विद्यालय की निदेशक चंचल सक्सेना ने अभिभावकों से कहा कि किशोरों के जीवन से संबंधित विविध समस्याएं होती हैं। उनका संयम से सामना किया जा सकता है। बच्चों से कोई भी कार्य करवाने के लिए शर्त के आधार पर लालच नहीं देना चाहिए कि यदि वे यह कार्य करेेंगें तो उन्हें यह उपहार मिलेगा। प्रत्येक कार्य की स्वीकृति-अस्वीकृति में पक्ष-विपक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। व्यस्त जीवन से समय निकालकर बच्चों की खुशी व गम में साझीदार व सलाहकार बनना चाहिए। प्रधानाचार्या नीलम महाना ने किशोरों के हित में सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास करना है। समन्वयक ज्योति वर्मा ने सभी अभिभावकों का आभार जताया।
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मुजफ्फरनगर। द एसडी पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा का प्रथम ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बाल मनोविज्ञान को समझकर उसी के अनुसार आचरण करने पर जोर दिया गया। बताया गया कि बच्चों को हर खुशी और गम में साझीदार और सलाहकार बनाएं। उनकी कमियों पर ही ध्यान दें बल्कि विशेषताओं का भी जिक्र करें।
विद्यालय की निदेशक चंचल सक्सेना ने अभिभावकों से कहा कि किशोरों के जीवन से संबंधित विविध समस्याएं होती हैं। उनका संयम से सामना किया जा सकता है। बच्चों से कोई भी कार्य करवाने के लिए शर्त के आधार पर लालच नहीं देना चाहिए कि यदि वे यह कार्य करेेंगें तो उन्हें यह उपहार मिलेगा। प्रत्येक कार्य की स्वीकृति-अस्वीकृति में पक्ष-विपक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। व्यस्त जीवन से समय निकालकर बच्चों की खुशी व गम में साझीदार व सलाहकार बनना चाहिए। प्रधानाचार्या नीलम महाना ने किशोरों के हित में सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास करना है। समन्वयक ज्योति वर्मा ने सभी अभिभावकों का आभार जताया।
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