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श्रीकृष्ण और सुदामा का मिलन सुन श्रोता भाव विभोर
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:36 PM IST
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श्रीकृष्ण और सुुदामा का मिलन सुन श्रोता भाव विभोर
मुजफ्फरनगर। नई मंडी स्थित बालाजी धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मिथलेश जी महाराज ने अंतिम दिन रुक्मिणी विवाह और सुदामा प्रसंग का वर्णन कर सब को भावविभोर कर दिया। इसके साथ ही बालाजी धाम में चल रहे बालाजी महोत्सव का भंडारे के साथ समापन हो गया।
बालाजी महोत्सव के अंतर्गत बीते एक सप्ताह से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य मिथिलेश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अपने बाल सखा सुदामा के लिए जिस तरह भगवान श्री कृष्ण ने प्रेम का परिचय दिया वह अनुकरणीय है, यह प्रसंग बताता है कि सनातन सभ्यता में छोटे और बड़े के बीच कभी कोई भेद नहीं माना गया। भगवान श्रीकृष्ण राजसिंहासन छोड़कर अपने बाल सखा सुदामा से मिलने के लिए दौड़े दौड़े चले आए। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र विलक्षण है। आचार्य मिथलेश ने बड़े ही सुंदर ढंग से रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया, इसे सुनकर वहां उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने रुक्मिणी विवाह की बधाइयां दी। भागवत कथा के समापन के साथ ही बालाजी धाम में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। भंडारे में बालाजी धाम समिति के भीमसेन कंसल, हरिशंकर मूंधडा, जेपी चाचा, सुशील कुमार गर्ग उर्फ छोटे लाल, अशोक अग्रवाल, चंद्रकिरण गुरूजी, नरेश अग्रवाल, कन्हैया, सुशील तायल, अजय तायल, सोमप्रकाश कुच्छल, विजय, अन्नू, अशोक शर्मा एडवोकेट का सहयोग रहा।
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मुजफ्फरनगर। नई मंडी स्थित बालाजी धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मिथलेश जी महाराज ने अंतिम दिन रुक्मिणी विवाह और सुदामा प्रसंग का वर्णन कर सब को भावविभोर कर दिया। इसके साथ ही बालाजी धाम में चल रहे बालाजी महोत्सव का भंडारे के साथ समापन हो गया।
बालाजी महोत्सव के अंतर्गत बीते एक सप्ताह से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य मिथिलेश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अपने बाल सखा सुदामा के लिए जिस तरह भगवान श्री कृष्ण ने प्रेम का परिचय दिया वह अनुकरणीय है, यह प्रसंग बताता है कि सनातन सभ्यता में छोटे और बड़े के बीच कभी कोई भेद नहीं माना गया। भगवान श्रीकृष्ण राजसिंहासन छोड़कर अपने बाल सखा सुदामा से मिलने के लिए दौड़े दौड़े चले आए। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र विलक्षण है। आचार्य मिथलेश ने बड़े ही सुंदर ढंग से रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया, इसे सुनकर वहां उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने रुक्मिणी विवाह की बधाइयां दी। भागवत कथा के समापन के साथ ही बालाजी धाम में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। भंडारे में बालाजी धाम समिति के भीमसेन कंसल, हरिशंकर मूंधडा, जेपी चाचा, सुशील कुमार गर्ग उर्फ छोटे लाल, अशोक अग्रवाल, चंद्रकिरण गुरूजी, नरेश अग्रवाल, कन्हैया, सुशील तायल, अजय तायल, सोमप्रकाश कुच्छल, विजय, अन्नू, अशोक शर्मा एडवोकेट का सहयोग रहा।
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