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मौलवी बचाते हैं जान, दंगे में एक-दूजे की मद्द
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:46 AM IST
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पहले दिन असरदार नहीं रही मुजफ्फरनगर- द बर्निंग लव फिल्म
मुजफ्फरनगर।
मुजफ्फरनगर-द बर्निंग लव फिल्म पहले दिन इतनी असरदार नहीं रही, मगर लोगों की जुबां पर पहले शो से ही चढ़ गई। फिल्म में मौलवी युवाओं को मस्जिद में बंद कर उनकी जान बचाते हैं, तो दंगे के दौरान भी भाईचारा कायम है। एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए लोगों के बीच सौहार्द के फूल भी बखूबी दर्शाए गए हैं। दंगे में एक-दूसरे की मदद के साथ सियासत करने वालों को भी काफी हद तक फिल्म में बेनकाब किया गया है।
जिले के गांव मांडी निवासी फिल्म निर्माता मनोज मांडी के अथक प्रयास के बाद रविवार को भोपा रोड पर एक प्लाजा में मुजफ्फरनगर-द बर्निंग लव का प्रदर्शन किया गया। पहले दिन फिल्म असरदार नहीं रही। फिल्म की पटकथा मुजफ्फरनगर वर्ष 2013 में हुए दंगे पर आधारित है। फिल्म में कई दृश्य बेहद भावनात्मक रुप से फिल्माए गए हैं। सियासी लोगों अपने लाभ के लिए खून बहाने पर आमादा होती और इंसानियत का चीरहरण फिल्म में बखूबी है। मोहब्बत की गलियों से निकले नायक-नायिका अंत तक भी नहीं मिल पाते, लेकिन इस बीच में काफी कुछ बदलता है। आपसी भाईचारे की मिसाल बने मौलवी साहब और चाचा जी कई लोगों की जान बचाते हैं। दंगे में कुछ लोग खून के प्यासे हैं तो कुछ भूख से बिलबिलाते हैं, तब दोनों मजहबों के लोगों का दिल पसीजता है और एक-दूसरे की मदद करने का जज्बा दिखाया गया है। हालांकि फिल्म के माध्यम से दंगे के गुनहगारों को भी बेनकाब करने की भरकस कौशिक की गई है, मगर सफलता तक नहीं पहुंच सकी है।
खुफिया तंत्र भी रहा अलर्ट
मुजफ्फरनगर। जिले में फिल्म प्रदर्शन को लेकर खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से सक्रिय रहा। एलआईयू ने प्लाजा पहुंचकर फिल्म की समीक्षा के साथ लोगों के रिस्पांस की जानकारी जुटाई है। फिल्म के चलने के दौरान भोपा रोड पर पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई।
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पहले दिन बिके 150 से अधिक टिकट
मुजफ्फरनगर। पहले दिन फिल्म अपनी छाप नहीं छोड़ पाई, मगर 150 से अधिक टिकट बिके हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक ने फिल्म का आनंद लिया। कमाई के मामले में स्थिति अभी तीन से चार दिन बाद साफ हो सकेगी। हालांकि प्लाजा में फिल्म का प्रदर्शन फिलहाल एक सप्ताह तक के लिए रखा गया है।
बोले दर्शक, फिल्म अच्छी सब देखने जाएं
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी अपनी मंडली के साथ बर्निंग लव फिल्म का आनंद लिया। फिल्म के बाद बोले कि फिल्म में निर्माता ने कई दृश्य बेहद खूबसूरत दर्शाएं है। दंगे का जो हिस्सा है, उस दौरान आपसी भाईचारे की जो मिसाल दिखाई गई है, वह काबिले तारीफ है। सांप्रदायिकता तो फिल्म में कहीं हावी नहीं है। सुभाषनगर निवासी संजीव कौशिक कहते हैं कि फिल्म में विरोध करने जैसा कुछ भी नहीं है। दंगे के दौरान कुछ नेताओं ने सियासत की है, उसकी तस्वीर भी दिखाई गई है, जो कि देखने लायक है। फिल्म भाईचारा, सौहार्द की मिसाल पेश करती है। महावीर चौक निवासी शिक्षक राजीव मोहन गोयल कहते हैं कि फिल्म को लेकर जैसा हव्वा मचा था, ऐसा कुछ नहीं है। दंगे के दौरान जो हालात रहे, वह सबने देखे हैं। मगर, फिल्म में उसे हटकर एकता दिखाई गई। इसके लिए निर्माता को शुक्रिया। फिल्म को उनकी ओर से थ्री स्टार। लददावाला के शाहनवाज ने कहा कि फिल्म काफी अच्छी लगी। दंगे के दौरान आवाम को भड़का कर नेताओं ने अपना काम निकाला है।
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मुजफ्फरनगर।
मुजफ्फरनगर-द बर्निंग लव फिल्म पहले दिन इतनी असरदार नहीं रही, मगर लोगों की जुबां पर पहले शो से ही चढ़ गई। फिल्म में मौलवी युवाओं को मस्जिद में बंद कर उनकी जान बचाते हैं, तो दंगे के दौरान भी भाईचारा कायम है। एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए लोगों के बीच सौहार्द के फूल भी बखूबी दर्शाए गए हैं। दंगे में एक-दूसरे की मदद के साथ सियासत करने वालों को भी काफी हद तक फिल्म में बेनकाब किया गया है।
जिले के गांव मांडी निवासी फिल्म निर्माता मनोज मांडी के अथक प्रयास के बाद रविवार को भोपा रोड पर एक प्लाजा में मुजफ्फरनगर-द बर्निंग लव का प्रदर्शन किया गया। पहले दिन फिल्म असरदार नहीं रही। फिल्म की पटकथा मुजफ्फरनगर वर्ष 2013 में हुए दंगे पर आधारित है। फिल्म में कई दृश्य बेहद भावनात्मक रुप से फिल्माए गए हैं। सियासी लोगों अपने लाभ के लिए खून बहाने पर आमादा होती और इंसानियत का चीरहरण फिल्म में बखूबी है। मोहब्बत की गलियों से निकले नायक-नायिका अंत तक भी नहीं मिल पाते, लेकिन इस बीच में काफी कुछ बदलता है। आपसी भाईचारे की मिसाल बने मौलवी साहब और चाचा जी कई लोगों की जान बचाते हैं। दंगे में कुछ लोग खून के प्यासे हैं तो कुछ भूख से बिलबिलाते हैं, तब दोनों मजहबों के लोगों का दिल पसीजता है और एक-दूसरे की मदद करने का जज्बा दिखाया गया है। हालांकि फिल्म के माध्यम से दंगे के गुनहगारों को भी बेनकाब करने की भरकस कौशिक की गई है, मगर सफलता तक नहीं पहुंच सकी है।
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खुफिया तंत्र भी रहा अलर्ट
मुजफ्फरनगर। जिले में फिल्म प्रदर्शन को लेकर खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से सक्रिय रहा। एलआईयू ने प्लाजा पहुंचकर फिल्म की समीक्षा के साथ लोगों के रिस्पांस की जानकारी जुटाई है। फिल्म के चलने के दौरान भोपा रोड पर पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई।
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पहले दिन बिके 150 से अधिक टिकट
मुजफ्फरनगर। पहले दिन फिल्म अपनी छाप नहीं छोड़ पाई, मगर 150 से अधिक टिकट बिके हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक ने फिल्म का आनंद लिया। कमाई के मामले में स्थिति अभी तीन से चार दिन बाद साफ हो सकेगी। हालांकि प्लाजा में फिल्म का प्रदर्शन फिलहाल एक सप्ताह तक के लिए रखा गया है।
बोले दर्शक, फिल्म अच्छी सब देखने जाएं
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी अपनी मंडली के साथ बर्निंग लव फिल्म का आनंद लिया। फिल्म के बाद बोले कि फिल्म में निर्माता ने कई दृश्य बेहद खूबसूरत दर्शाएं है। दंगे का जो हिस्सा है, उस दौरान आपसी भाईचारे की जो मिसाल दिखाई गई है, वह काबिले तारीफ है। सांप्रदायिकता तो फिल्म में कहीं हावी नहीं है। सुभाषनगर निवासी संजीव कौशिक कहते हैं कि फिल्म में विरोध करने जैसा कुछ भी नहीं है। दंगे के दौरान कुछ नेताओं ने सियासत की है, उसकी तस्वीर भी दिखाई गई है, जो कि देखने लायक है। फिल्म भाईचारा, सौहार्द की मिसाल पेश करती है। महावीर चौक निवासी शिक्षक राजीव मोहन गोयल कहते हैं कि फिल्म को लेकर जैसा हव्वा मचा था, ऐसा कुछ नहीं है। दंगे के दौरान जो हालात रहे, वह सबने देखे हैं। मगर, फिल्म में उसे हटकर एकता दिखाई गई। इसके लिए निर्माता को शुक्रिया। फिल्म को उनकी ओर से थ्री स्टार। लददावाला के शाहनवाज ने कहा कि फिल्म काफी अच्छी लगी। दंगे के दौरान आवाम को भड़का कर नेताओं ने अपना काम निकाला है।