{"_id":"5ceed33ebdec22076c4ee150","slug":"155915556520-muzaffarnagar-news104","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय संस्कृति को अपनाने का दिया संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतीय संस्कृति को अपनाने का दिया संदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहपुर। कस्बे के नेमिनाथ जिनालय में राष्ट्र संत आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित श्रुत संवर्धन ज्ञान संस्कार शिविर में भाग ले रहे बच्चों ने दो किलोमीटर की पदयात्रा निकाली। उन्होंने नागरिकों को भारतीय संस्कृति के अनुरूप जीवन जीने का संदेश दिया।
पदयात्रा नेमिनाथ जिनालय से प्रारंभ होकर मुजफ्फरनगर रोड स्थित मुनि सुव्रतनाथ मान स्तंभ पर संपन्न हुई। इस दौरान बाल ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी ने कहा कि शिविर का उद्देश्य बच्चों को सदाचार, नैतिकता व अहिंसा का पाठ सिखाकर उन्हें संस्कारित करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व में अद्वितीय है। बावजूद इसके वर्तमान समय में बच्चे व युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हैं। शिविर के माध्यम से बच्चों व युवाओं को भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी देकर उन्हें संस्कारित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चे व युवा माता-पिता की आज्ञा मानते हुए देश व समाज हित के कार्य करने का संकल्प लें। इस दौरान ब्रह्मचारिणी सविता दीदी व ब्रह्मचारिणी योगांशी दीदी ने भी अपने विचार रखे। पदयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे ।
विज्ञापन
पदयात्रा नेमिनाथ जिनालय से प्रारंभ होकर मुजफ्फरनगर रोड स्थित मुनि सुव्रतनाथ मान स्तंभ पर संपन्न हुई। इस दौरान बाल ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी ने कहा कि शिविर का उद्देश्य बच्चों को सदाचार, नैतिकता व अहिंसा का पाठ सिखाकर उन्हें संस्कारित करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व में अद्वितीय है। बावजूद इसके वर्तमान समय में बच्चे व युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हैं। शिविर के माध्यम से बच्चों व युवाओं को भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी देकर उन्हें संस्कारित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चे व युवा माता-पिता की आज्ञा मानते हुए देश व समाज हित के कार्य करने का संकल्प लें। इस दौरान ब्रह्मचारिणी सविता दीदी व ब्रह्मचारिणी योगांशी दीदी ने भी अपने विचार रखे। पदयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे ।
विज्ञापन