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म्यांमार में मुसलमानों पर जुल्म: नजीर
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:32 AM IST
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म्यांमार में मुसलमानों पर जुल्म: नजीर
जानसठ। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने मदरसा तालीम उल कुरान में सभा कर घटना पर रोष जताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से मुस्लिमों की सुरक्षा किए जाने की मांग की है। घटना के विरोध में ज्ञापन संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम एसडीएम को सौंपा गया।
शनिवार को कस्बे में तालीम उल कुरान मदरसे में म्यांमार में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में क्षेत्र के हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मदरसे में एकत्र हुए। मदरसे के संचालक एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मौलाना नजीर अहमद कासमी ने सभा में कहा कि आज देश में इंसान ही इंसान का दुश्मन हो गया है। म्यांमार में सेना मुसलमानों पर तरह-तरह के अत्याचार कर उन्हें मौत के घाट उतार रही है। ऐसे में मुसलमान देश छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कोई भी देश इन मुसलमानों को अपने यहां शरण देने को तैयार नहीं है। सभा में डॉक्टर आबिद, अब्बास अली खां, मौलाना लुकमान, मौलाना अमीर हैदर जैदी आदि वक्ताओं ने कहा कि म्यांमार में 12 लाख मुसलमान सैकड़ों वर्षों रहते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक भी वहां की नागरिकता नहीं मिली है। वहां के मुसलमानों पर लगातार सेना तरह-तरह के अत्याचार कर रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ भी मानता है कि रोहिंग्या के मुसलमान अल्पसंख्यक हैं। अल्पसंख्यकों पर जुल्म करना इंसानियत पर जुल्म करना है। मुस्लिम समाज ने एक ज्ञापन महासचिव संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए एसडीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को दिया। ज्ञापन में मांग की है कि म्यांमार में मुसलमानों का नरसंहार और पलायन रोका जाए 1982 में की गई नागरिकता को बहाल किया जाए। अत्याचार से पीड़ित मुसलमानों को जिस देश में वह जाएं, वहां पर उन्हें शरण दी जाए। सभा का संचालन मौलाना इरफान ने किया। सभा में आशु मलिक, डॉक्टर मुशर्रफ नबी, दानिश अली खां, मौलाना लुकमान, हसन जैदी, अब्दुल्ला कुरैशी, मोहम्मद साजिद, जावेद हिमायूं, मौलाना जान मोहम्मद, शाहिद, अब्दुल खलील, अजीज रहमान, अब्दुल समद, नफीस आदि मौजूद रहे।
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जानसठ। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने मदरसा तालीम उल कुरान में सभा कर घटना पर रोष जताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से मुस्लिमों की सुरक्षा किए जाने की मांग की है। घटना के विरोध में ज्ञापन संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम एसडीएम को सौंपा गया।
शनिवार को कस्बे में तालीम उल कुरान मदरसे में म्यांमार में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में क्षेत्र के हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मदरसे में एकत्र हुए। मदरसे के संचालक एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मौलाना नजीर अहमद कासमी ने सभा में कहा कि आज देश में इंसान ही इंसान का दुश्मन हो गया है। म्यांमार में सेना मुसलमानों पर तरह-तरह के अत्याचार कर उन्हें मौत के घाट उतार रही है। ऐसे में मुसलमान देश छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कोई भी देश इन मुसलमानों को अपने यहां शरण देने को तैयार नहीं है। सभा में डॉक्टर आबिद, अब्बास अली खां, मौलाना लुकमान, मौलाना अमीर हैदर जैदी आदि वक्ताओं ने कहा कि म्यांमार में 12 लाख मुसलमान सैकड़ों वर्षों रहते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक भी वहां की नागरिकता नहीं मिली है। वहां के मुसलमानों पर लगातार सेना तरह-तरह के अत्याचार कर रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ भी मानता है कि रोहिंग्या के मुसलमान अल्पसंख्यक हैं। अल्पसंख्यकों पर जुल्म करना इंसानियत पर जुल्म करना है। मुस्लिम समाज ने एक ज्ञापन महासचिव संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए एसडीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को दिया। ज्ञापन में मांग की है कि म्यांमार में मुसलमानों का नरसंहार और पलायन रोका जाए 1982 में की गई नागरिकता को बहाल किया जाए। अत्याचार से पीड़ित मुसलमानों को जिस देश में वह जाएं, वहां पर उन्हें शरण दी जाए। सभा का संचालन मौलाना इरफान ने किया। सभा में आशु मलिक, डॉक्टर मुशर्रफ नबी, दानिश अली खां, मौलाना लुकमान, हसन जैदी, अब्दुल्ला कुरैशी, मोहम्मद साजिद, जावेद हिमायूं, मौलाना जान मोहम्मद, शाहिद, अब्दुल खलील, अजीज रहमान, अब्दुल समद, नफीस आदि मौजूद रहे।
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