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आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता बहाल
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:56 AM IST
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आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता बहाल
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता बहाल कर दी है। फेकेल्टी और अन्य संसाधनों की कमी की वजह से वर्ष 2014 में बीएएमएस की पढ़ाई बंद कर दी गई थी। यहां अध्यनरत छात्र-छात्राओं को प्रदेश के अन्य राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया था। मान्यता बहाली को लेकर शासन का पत्र प्राचार्य को मिला है।
देवबंद-सहारनपुर रोड रामपुर गांव स्थित स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेद कालेज और हॉस्पिटल की रद की गई मान्यता केंद्र सरकार ने बहाल कर दी है। आयुष मंत्रालय ने अपने आदेश में शैक्षिक सत्र वर्ष 2017-18 बीएएमएस की 30 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है। अवर सचिव बनमाली नाईक का अनुमति पत्र प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार मौर्य को मिल गया है। पहले कालेज की शुरुआत बघरा में की गई। बाद में संस्था को रामपुर गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। दशकों पुरानी संस्था की आयुर्वेद प्रशिक्षण में प्रदेश में अलग पहचान रही है। वेस्ट यूपी में बरेली के बाद यही एकमात्र राजकीय कालेज है। सरकार की उपेक्षा की वजह से कॉलेज में प्रोफेसर, प्रवक्ता के पदों पर नई नियुक्ति नहीं हो पाईं। व्यवस्था बिगड़ी तो प्रशिक्षु चिकित्सकों ने प्रदर्शन किए। केंद्रीय आयुर्वेद चिकित्सा परिषद ने निरीक्षण के बाद कॉलेज की मान्यता खत्म कर दी थी। यहां बीएएमएस का पांच वर्ष का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राओं को बरेली, लखनऊ, पीलीभीत, इलाहाबाद के राजकीय कालेजों में शिफ्ट किया गया। इसी वजह से सत्र 2014-15 और 2015-16 में इस कॉलेज को नए विद्यार्थी नहीं मिले। स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कॉलेज की मान्यता का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष रखा, तब आयुर्वेद निदेशालय हरकत में आया।
आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा को ग्रामीण अंचल तक विस्तारित करना गुरुदेव का सपना था। जिले की महत्वपूर्ण संस्था को बचाना हमारा फर्ज है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मिलकर मामले से अवगत कराया था।
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-स्वामी ओमानंद सरस्वती, अधिष्ठाता शुकदेव पीठ।
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए कॉलेज को बीएएमएस स्नातक कोर्स की अनुमति दे दी है। 30 सीटों पर प्रदेश के चयनित छात्र-छात्राओं को मौका मिलेगा।
- प्रोफेसर दिनेश कुमार मौर्य, प्राचार्य।
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मुजफ्फरनगर। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेद कॉलेज की मान्यता बहाल कर दी है। फेकेल्टी और अन्य संसाधनों की कमी की वजह से वर्ष 2014 में बीएएमएस की पढ़ाई बंद कर दी गई थी। यहां अध्यनरत छात्र-छात्राओं को प्रदेश के अन्य राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया था। मान्यता बहाली को लेकर शासन का पत्र प्राचार्य को मिला है।
देवबंद-सहारनपुर रोड रामपुर गांव स्थित स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेद कालेज और हॉस्पिटल की रद की गई मान्यता केंद्र सरकार ने बहाल कर दी है। आयुष मंत्रालय ने अपने आदेश में शैक्षिक सत्र वर्ष 2017-18 बीएएमएस की 30 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है। अवर सचिव बनमाली नाईक का अनुमति पत्र प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार मौर्य को मिल गया है। पहले कालेज की शुरुआत बघरा में की गई। बाद में संस्था को रामपुर गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। दशकों पुरानी संस्था की आयुर्वेद प्रशिक्षण में प्रदेश में अलग पहचान रही है। वेस्ट यूपी में बरेली के बाद यही एकमात्र राजकीय कालेज है। सरकार की उपेक्षा की वजह से कॉलेज में प्रोफेसर, प्रवक्ता के पदों पर नई नियुक्ति नहीं हो पाईं। व्यवस्था बिगड़ी तो प्रशिक्षु चिकित्सकों ने प्रदर्शन किए। केंद्रीय आयुर्वेद चिकित्सा परिषद ने निरीक्षण के बाद कॉलेज की मान्यता खत्म कर दी थी। यहां बीएएमएस का पांच वर्ष का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राओं को बरेली, लखनऊ, पीलीभीत, इलाहाबाद के राजकीय कालेजों में शिफ्ट किया गया। इसी वजह से सत्र 2014-15 और 2015-16 में इस कॉलेज को नए विद्यार्थी नहीं मिले। स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कॉलेज की मान्यता का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष रखा, तब आयुर्वेद निदेशालय हरकत में आया।
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आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा को ग्रामीण अंचल तक विस्तारित करना गुरुदेव का सपना था। जिले की महत्वपूर्ण संस्था को बचाना हमारा फर्ज है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मिलकर मामले से अवगत कराया था।
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-स्वामी ओमानंद सरस्वती, अधिष्ठाता शुकदेव पीठ।
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए कॉलेज को बीएएमएस स्नातक कोर्स की अनुमति दे दी है। 30 सीटों पर प्रदेश के चयनित छात्र-छात्राओं को मौका मिलेगा।
- प्रोफेसर दिनेश कुमार मौर्य, प्राचार्य।