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रामप्रकाश की पहचान का रहस्य बरकरार
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:35 AM IST
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रामप्रकाश की पहचान का रहस्य बरकरार
मुजफ्फरनगर। उत्कल एक्सप्रेस हादसे में मारे गए रामप्रकाश दास की पहचान का रहस्य बरकरार है। जीआरपी ने राम प्रकाश के कथित परिजनों को बिना डीएनए जांच के अस्थियां देने से इंकार कर दिया है। यह परिजन मंगलवार को डीएनए सैंपल लेकर शहर में आ सकते हैं। इसके बाद जीआरपी प्रयोगशाला में इसकी जांच कराएगा। उत्कल हादसे की जांच सितंबर माह में फाइनल हो सकती है। इसके बाद रेल मंत्रालय पूरे मामले में कार्रवाई करेगा।
19 अगस्त को खतौली में पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई थी। इस भीषण हादसे में उत्कल एक्सप्रेस के 12 डिब्बे बेपटरी हो गए थे, जिसमें 23 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए। कई घायलों का अभी तक मेरठ में उपचार चल रहा है। जीआरपी और जिला प्रशासन ने 22 शवों की पहचान करा दी थी, जबकि एक शव का शनाख्त का समय बीतने के बाद अंतिम संस्कार किया गया था। बीते दिनों मध्यप्रदेश के जिला भिंड के गांव कुनीपुरा निवासी गंगादास और बनारसी दास ने मुजफ्फरनगर, खतौली पहुंचकर अज्ञात में अंतिम संस्कार किए गए शव की पहचान अपने परिजन के रूप में की थी। दोनों परिजनों ने मृतक का नाम अमर सिंह उर्फ रामप्रकाश दास बताया था। लेकिन, रामप्रकाश दास के नाम सबूत नहीं दे सके।
जीआरपी नेे मृतक की पहचान को पुष्ट करने के लिए गंगादास, बनारसी दास से डीएनए सैंपल मांगा है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी परिजन डीएनए सैंपल नहीं ला सके हैं। हालांकि मंगलवार को परिजनों के डीएनए सैंपल लाने की जानकारी जीआरपी को दी गई है। इसके बाद जीआरपी परिजनों और मृतक राम प्रकाश दास के डीएनए को जांच के लिए लैब भेजेगी। यहां से डीएनए जींस मिलने के बाद ही अस्थियों को परिजनों के हवाले किया जाएगा। एसओ जीआरपी किशन अवतार ने बताया कि राम प्रकाश दास की अभी तक पहचान पुष्ट नहीं हो सकी है। परिजनों ने त्योहार होने के बाद आने की बात कही है। उसके बाद डीएनए जांच होगी। उधर, उत्कल हादसे की फाइनल रिपोर्ट सितंबर माह में पूरी हो सकती है। सीओ जीआरपी गाजियाबाद मामले की विवेचना कर रहे है। जांच में एक-एक बिंदु और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी परखा जा रहा है। रिपोर्ट पूरी होने बाद रेल मंत्रालय आगे की कार्रवाई करेगा। जांच प्रमुख सीओ गाजियाबाद रणधीर सिंह ने बताया कि जांच-पड़ताल जारी है। कई बिंदुओं पर स्थिति अभी साफ नहीं हो सकी है। जांच प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा।
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मुजफ्फरनगर। उत्कल एक्सप्रेस हादसे में मारे गए रामप्रकाश दास की पहचान का रहस्य बरकरार है। जीआरपी ने राम प्रकाश के कथित परिजनों को बिना डीएनए जांच के अस्थियां देने से इंकार कर दिया है। यह परिजन मंगलवार को डीएनए सैंपल लेकर शहर में आ सकते हैं। इसके बाद जीआरपी प्रयोगशाला में इसकी जांच कराएगा। उत्कल हादसे की जांच सितंबर माह में फाइनल हो सकती है। इसके बाद रेल मंत्रालय पूरे मामले में कार्रवाई करेगा।
19 अगस्त को खतौली में पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई थी। इस भीषण हादसे में उत्कल एक्सप्रेस के 12 डिब्बे बेपटरी हो गए थे, जिसमें 23 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए। कई घायलों का अभी तक मेरठ में उपचार चल रहा है। जीआरपी और जिला प्रशासन ने 22 शवों की पहचान करा दी थी, जबकि एक शव का शनाख्त का समय बीतने के बाद अंतिम संस्कार किया गया था। बीते दिनों मध्यप्रदेश के जिला भिंड के गांव कुनीपुरा निवासी गंगादास और बनारसी दास ने मुजफ्फरनगर, खतौली पहुंचकर अज्ञात में अंतिम संस्कार किए गए शव की पहचान अपने परिजन के रूप में की थी। दोनों परिजनों ने मृतक का नाम अमर सिंह उर्फ रामप्रकाश दास बताया था। लेकिन, रामप्रकाश दास के नाम सबूत नहीं दे सके।
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जीआरपी नेे मृतक की पहचान को पुष्ट करने के लिए गंगादास, बनारसी दास से डीएनए सैंपल मांगा है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी परिजन डीएनए सैंपल नहीं ला सके हैं। हालांकि मंगलवार को परिजनों के डीएनए सैंपल लाने की जानकारी जीआरपी को दी गई है। इसके बाद जीआरपी परिजनों और मृतक राम प्रकाश दास के डीएनए को जांच के लिए लैब भेजेगी। यहां से डीएनए जींस मिलने के बाद ही अस्थियों को परिजनों के हवाले किया जाएगा। एसओ जीआरपी किशन अवतार ने बताया कि राम प्रकाश दास की अभी तक पहचान पुष्ट नहीं हो सकी है। परिजनों ने त्योहार होने के बाद आने की बात कही है। उसके बाद डीएनए जांच होगी। उधर, उत्कल हादसे की फाइनल रिपोर्ट सितंबर माह में पूरी हो सकती है। सीओ जीआरपी गाजियाबाद मामले की विवेचना कर रहे है। जांच में एक-एक बिंदु और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी परखा जा रहा है। रिपोर्ट पूरी होने बाद रेल मंत्रालय आगे की कार्रवाई करेगा। जांच प्रमुख सीओ गाजियाबाद रणधीर सिंह ने बताया कि जांच-पड़ताल जारी है। कई बिंदुओं पर स्थिति अभी साफ नहीं हो सकी है। जांच प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा।
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