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रोहाना मिल का विस्तारीकरण 2
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:40 AM IST
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रोहाना मिल का विस्तारीकरण 28 वर्षों से अधर में
रोहाना। आईपीएल की यूनिट रोहाना कलां चीनी मिल का विस्तारीकरण 28 वर्षों से अधर में लटका पड़ा है। पेराई की क्षमता कम होने के कारण किसानों को परेशानी होती है।
अंग्रेजी शासन काल में अमृतसर से आए सरदार श्याम सिंह ने दी अमृत शुगर मिल के नाम से रोहाना में 1930 में चीनी मिल स्थापित की थी। क्षेत्र में गन्ने की उपलब्धता को देखते हुए 13 हजार क्विंटल की क्षमता की मिल ने वर्ष 1933 में पेराई प्रारंभ की थी। मिल परिक्षेत्र में पक्की सड़कें और शिक्षा के लिए अमृत इंटर कालेज और अमृत प्राइमरी पाठशाला की स्थापना की गई थी। क्षेत्र में लगातार गन्ने की पैदावार बढ़ती चली गई। वर्ष 1972 में बड़ा घाटा होने के कारण मालिकान ने मिल बंद कर दी, तब की कांग्रेस सरकार ने राज्य निगम के अधीन कर किसानों का रुका हुआ भुगतान कराया। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी मिल की पेराई क्षमता को बढ़ाने के लिए 1989 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, जिसमे 325 बीघा जमीन खरीद कर 3500 क्विंटल पेराई क्षमता के साथ बिजली का प्लांट भी लगाने योजना के तहत ही नौ मई 1990 को सरकार ने जमीन का कब्जा लेकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था। किसानों ने अपनी जमीन जाने पर मुआवजे के साथ एक व्यक्ति को नौकरी की मांग को लेकर कुछ किसान चौ महेंद्र सिंह टिकैत के पास सिसौली पहुंचे थे। किसानों को न्याय दिलाने के लिए भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राममहेश भारद्वाज को अधिकृत किया गया था। कई माह बाद उठापटक के चलते यूनियन भी दो धड़ों में बंट गई। ठेकेदार और निगम के बीच विवाद इतना बढ़ गया की एक पक्ष कोर्ट की शरण में चला गया। मिल के घाटे को देखकर 2010 में मायावती सरकार ने मिल को 55 करोड़ में आईपीएल को बेच दी। हालांकि 28 वर्ष बीत जाने के बाद भी मिल का विस्तारीकरण नहीं हो पाया है। गन्ने का रकबा भी बढ़ा है। प्रगतिशील किसान पंकज भगत, ओमकार त्यागी, मोहम्मद भूरा, राकेश मलिक चेयरमैन का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते गन्ने के रकबे से मिल का विस्तारीकरण होना चाहिए। क्षेत्र के किसान भी अगले सप्ताह धरना देंगे ।
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रोहाना। आईपीएल की यूनिट रोहाना कलां चीनी मिल का विस्तारीकरण 28 वर्षों से अधर में लटका पड़ा है। पेराई की क्षमता कम होने के कारण किसानों को परेशानी होती है।
अंग्रेजी शासन काल में अमृतसर से आए सरदार श्याम सिंह ने दी अमृत शुगर मिल के नाम से रोहाना में 1930 में चीनी मिल स्थापित की थी। क्षेत्र में गन्ने की उपलब्धता को देखते हुए 13 हजार क्विंटल की क्षमता की मिल ने वर्ष 1933 में पेराई प्रारंभ की थी। मिल परिक्षेत्र में पक्की सड़कें और शिक्षा के लिए अमृत इंटर कालेज और अमृत प्राइमरी पाठशाला की स्थापना की गई थी। क्षेत्र में लगातार गन्ने की पैदावार बढ़ती चली गई। वर्ष 1972 में बड़ा घाटा होने के कारण मालिकान ने मिल बंद कर दी, तब की कांग्रेस सरकार ने राज्य निगम के अधीन कर किसानों का रुका हुआ भुगतान कराया। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी मिल की पेराई क्षमता को बढ़ाने के लिए 1989 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, जिसमे 325 बीघा जमीन खरीद कर 3500 क्विंटल पेराई क्षमता के साथ बिजली का प्लांट भी लगाने योजना के तहत ही नौ मई 1990 को सरकार ने जमीन का कब्जा लेकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था। किसानों ने अपनी जमीन जाने पर मुआवजे के साथ एक व्यक्ति को नौकरी की मांग को लेकर कुछ किसान चौ महेंद्र सिंह टिकैत के पास सिसौली पहुंचे थे। किसानों को न्याय दिलाने के लिए भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राममहेश भारद्वाज को अधिकृत किया गया था। कई माह बाद उठापटक के चलते यूनियन भी दो धड़ों में बंट गई। ठेकेदार और निगम के बीच विवाद इतना बढ़ गया की एक पक्ष कोर्ट की शरण में चला गया। मिल के घाटे को देखकर 2010 में मायावती सरकार ने मिल को 55 करोड़ में आईपीएल को बेच दी। हालांकि 28 वर्ष बीत जाने के बाद भी मिल का विस्तारीकरण नहीं हो पाया है। गन्ने का रकबा भी बढ़ा है। प्रगतिशील किसान पंकज भगत, ओमकार त्यागी, मोहम्मद भूरा, राकेश मलिक चेयरमैन का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते गन्ने के रकबे से मिल का विस्तारीकरण होना चाहिए। क्षेत्र के किसान भी अगले सप्ताह धरना देंगे ।
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