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महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को रहेगा श्रेष्ठ
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 11 Feb 2018 12:10 AM IST
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मोरना से होकर गुजरते कांवड़िए।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व दो दिन मनाया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। मउधर, महाशिवरात्रि को लेकर ज्योतिष भी अनेक लाभ बता रहे हैं। ज्योतिषविद पंडित विष्णु शर्मा कहते हैं कि 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत श्रेष्ठ रहेगा।
महाशिवरात्रि का पर्व नजदीक है। हर साल की तरह इस बार भी शिवभक्त भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। महाशिवरात्रि को हिंदुओं का सबसे शुभ त्योहार माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है।
इस साल महाशिवरात्रि 13 और 14 फरवरी दो दिन पड़ रही है। इसको लेकर शिवभक्तों में खास उत्साह है। हरिद्वार से शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। शनिवार को भी शहर से शिवभक्त कांवड़ियों की कतार गुजरी। जिन्होंने शिवचौक की परिक्रमा की। शहर के ज्योतिषविद पंडित विष्णु शर्मा ने कहा कि महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को श्रेष्ठ रहेगा। त्रयोदशी में व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक होता है और चतुर्दशी में इसका पारण होता है।
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पंडित विष्णु शर्मा बताते हैं कि 13 फरवरी को त्रयोदशी पूरे दिन रहकर 14 फरवरी को तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी, जो 14 फरवरी की रात्रि 12:48 पर हो जाएगी। अत: इस प्रकार तिथियों की स्थिति को देखते हुए धर्म सिंधु अनुसार 13 फरवरी को त्रयोदशी श्रेष्ठ है। चतुर्दशी के प्रारंभ के संदिकाल में शिव जलाभिषेक अत्यंत श्रेष्ठ रहेगा।
सड़क पर गूंज रहे भोले के जयकारे
मोरना। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए गंगा खादर क्षेत्र के डुंडी घाट, योगेंद्र नगर के उपरांत भोकरहेड़ी, मोरना होकर शिवालयों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। क्षेत्र से गुजर रहे शिवभक्तों में नोएडा, करोली बांगर क्षेत्र के सुरेश, राजेश, राकेश, तेजपाल, अजीत, सुनील, गजेंद्र, किरणपाल, मुनीश, नरेश, मंटुरी, सुशील, जगपाल ने बताया कि उनके परिवार के प्रतिवर्ष कांवड़ लाते है।
नौ फरवरी को उन्होंने हरिद्वार से जल उठाया है तथा 13 फरवरी को महाशिवरात्रि पर अपने गांव के शिवालय पर जलाभिषेक करेंगे। मुरादाबाद, रामराज, मेरठ, रामपुर, चांदपुर, दादरी आदि स्थानों से आए शिवभक्त रंग बिरंगी कांवड़ के साथ कांवड़ सेवा शिविरों में विश्राम कर आगे बढ़ रहे हैं।
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महाशिवरात्रि का पर्व नजदीक है। हर साल की तरह इस बार भी शिवभक्त भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। महाशिवरात्रि को हिंदुओं का सबसे शुभ त्योहार माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है।
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इस साल महाशिवरात्रि 13 और 14 फरवरी दो दिन पड़ रही है। इसको लेकर शिवभक्तों में खास उत्साह है। हरिद्वार से शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। शनिवार को भी शहर से शिवभक्त कांवड़ियों की कतार गुजरी। जिन्होंने शिवचौक की परिक्रमा की। शहर के ज्योतिषविद पंडित विष्णु शर्मा ने कहा कि महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को श्रेष्ठ रहेगा। त्रयोदशी में व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक होता है और चतुर्दशी में इसका पारण होता है।
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पंडित विष्णु शर्मा बताते हैं कि 13 फरवरी को त्रयोदशी पूरे दिन रहकर 14 फरवरी को तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी, जो 14 फरवरी की रात्रि 12:48 पर हो जाएगी। अत: इस प्रकार तिथियों की स्थिति को देखते हुए धर्म सिंधु अनुसार 13 फरवरी को त्रयोदशी श्रेष्ठ है। चतुर्दशी के प्रारंभ के संदिकाल में शिव जलाभिषेक अत्यंत श्रेष्ठ रहेगा।
सड़क पर गूंज रहे भोले के जयकारे
मोरना। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए गंगा खादर क्षेत्र के डुंडी घाट, योगेंद्र नगर के उपरांत भोकरहेड़ी, मोरना होकर शिवालयों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। क्षेत्र से गुजर रहे शिवभक्तों में नोएडा, करोली बांगर क्षेत्र के सुरेश, राजेश, राकेश, तेजपाल, अजीत, सुनील, गजेंद्र, किरणपाल, मुनीश, नरेश, मंटुरी, सुशील, जगपाल ने बताया कि उनके परिवार के प्रतिवर्ष कांवड़ लाते है।
नौ फरवरी को उन्होंने हरिद्वार से जल उठाया है तथा 13 फरवरी को महाशिवरात्रि पर अपने गांव के शिवालय पर जलाभिषेक करेंगे। मुरादाबाद, रामराज, मेरठ, रामपुर, चांदपुर, दादरी आदि स्थानों से आए शिवभक्त रंग बिरंगी कांवड़ के साथ कांवड़ सेवा शिविरों में विश्राम कर आगे बढ़ रहे हैं।