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ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते हैं-महामंडलेश्वर
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ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते : महामंडलेश्वर
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ में हनुमत जयंती के अवसर पर शुकतीर्थ परिक्रमा का शुभारंभ करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते हैं। जीव जहां जाता है, वहां सुख समझ के फंस जाता है। जीव जहां रहता है, वहां सुख समझ के ममता करता है। घर में जो सावधान होकर भक्ति करता है, उसके लिए घर में भगवान प्रकट होते हैं। जगत मिथ्या है, यह बोलना सरल है, किंतु जगत मिथ्या है यह समझना कठिन है। संसार का कोई भी सुख मानव को जब तक मीठा लगता है, जब तक शरीर से भिन्न आत्मा का दर्शन नहीं होता। शरीर जड़ है और आत्मा चेतना है। आत्मा का ज्ञान होना कठिन नही हैं आत्मनिष्ठ होना बड़ा कठिन है। इस मौके पर श्रद्धालुओं जयघोष के साथ 12 किलोमीटर पैदल परिक्रमा कर पुण्य अर्जित किया।
शुकतीर्थ स्थित हनुमत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। शुकतीर्थ परिक्रमा के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी विनय स्वरूपानंद महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी गीतानंद गिरि महाराज, आनंद अवस्थी, मुख्य पुजारी आनंद महाराज के साथ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, कंवरसेन गोयल आदि ने भाग लिया। हाथरस से पधारी भजन कीर्तन मंडली में गिरिराज किशोर व अभय बाबू के साथ आए अन्य कलाकारों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर समा बांधा। परिक्रमा शुकतीर्थ के हनुमतधाम से आरंभ होकर गांव बिहारगढ़, इलाहाबास, भुवापुर, फिरोजपुर होते हुए भगवान नीलकंठ मंदिर होते हुए दोपहर बाद शुकतीर्थ पहुंची। नगरवासियों ने परिक्रमा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सेवा भाव से पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। परिक्रमा के दौरान विभिन्न प्रकार की सुंदर झांकियां निकाली। राजेश अग्रवाल, राजीव गुप्ता, जितेंद्र वर्मा, सुभाष शर्मा, अजय अग्रवाल आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। जयंती समारोह में कोलकाता, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश आदि सहित आसपास के शहरों से श्रद्धालु आ रहे हैं।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ में हनुमत जयंती के अवसर पर शुकतीर्थ परिक्रमा का शुभारंभ करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते हैं। जीव जहां जाता है, वहां सुख समझ के फंस जाता है। जीव जहां रहता है, वहां सुख समझ के ममता करता है। घर में जो सावधान होकर भक्ति करता है, उसके लिए घर में भगवान प्रकट होते हैं। जगत मिथ्या है, यह बोलना सरल है, किंतु जगत मिथ्या है यह समझना कठिन है। संसार का कोई भी सुख मानव को जब तक मीठा लगता है, जब तक शरीर से भिन्न आत्मा का दर्शन नहीं होता। शरीर जड़ है और आत्मा चेतना है। आत्मा का ज्ञान होना कठिन नही हैं आत्मनिष्ठ होना बड़ा कठिन है। इस मौके पर श्रद्धालुओं जयघोष के साथ 12 किलोमीटर पैदल परिक्रमा कर पुण्य अर्जित किया।
शुकतीर्थ स्थित हनुमत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। शुकतीर्थ परिक्रमा के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी विनय स्वरूपानंद महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी गीतानंद गिरि महाराज, आनंद अवस्थी, मुख्य पुजारी आनंद महाराज के साथ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, कंवरसेन गोयल आदि ने भाग लिया। हाथरस से पधारी भजन कीर्तन मंडली में गिरिराज किशोर व अभय बाबू के साथ आए अन्य कलाकारों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर समा बांधा। परिक्रमा शुकतीर्थ के हनुमतधाम से आरंभ होकर गांव बिहारगढ़, इलाहाबास, भुवापुर, फिरोजपुर होते हुए भगवान नीलकंठ मंदिर होते हुए दोपहर बाद शुकतीर्थ पहुंची। नगरवासियों ने परिक्रमा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सेवा भाव से पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। परिक्रमा के दौरान विभिन्न प्रकार की सुंदर झांकियां निकाली। राजेश अग्रवाल, राजीव गुप्ता, जितेंद्र वर्मा, सुभाष शर्मा, अजय अग्रवाल आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। जयंती समारोह में कोलकाता, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश आदि सहित आसपास के शहरों से श्रद्धालु आ रहे हैं।
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