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लेखनी और वाणी में संयम जरुरी: त्रिपाठी
Updated Sun, 28 Oct 2018 11:41 PM IST
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लेखनी और वाणी में संयम जरूरी: त्रिपाठी
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि नेताओं को अपनी वाणी और साहित्यकारों को अपनी लेखनी में संयम बरतना चाहिए। जिन लोगों पर समाज की जिम्मेदारी है उन्हें सोच समझकर लिखना और बोलना चाहिए।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने पूर्व सांसद मालती शर्मा के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केसरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मालती जी का जीवन समाज के लिए समर्पित रहा। जनसेवा ही उनकी राजनीति का माध्यम रहा है। देश में नेताओं की फिसलती वाणी और साहित्य में शब्दों पर कंट्रोल नहीं होने को त्रिपाठी ने समाज के लिए गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राह दिखाने वाले को हर कदम सोच समझकर उठाना चाहिए। एक जनप्रतिनिधि की वाणी का असर दूर तक होता है, उसे बोलने से पहले सोचना चाहिए कि इसका असर क्या होगा। परिपक्व राजनीतिज्ञ अपनी वाणी पर हमेशा संयम रखता है। साहित्यकार की भाषा समाज में सीधा असर डालती है। साहित्य से जुडे़ लोगों को चाहिए कि वह ऐसी भाषा लिखें, जो भावी पीढ़ी में सकारात्मक सोच पैदा करे। भाषा सधी और संयमित होनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने मालती शर्मा के बेटे अरविंद शर्मा से अलग से बात की और सांत्वना दी। बंटी शर्मा, पुरुषोत्तम आदि मौजूद रहे। इससे पहले, राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने नईमंडी भाजपा कार्यकर्ता गीता जैन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि नेताओं को अपनी वाणी और साहित्यकारों को अपनी लेखनी में संयम बरतना चाहिए। जिन लोगों पर समाज की जिम्मेदारी है उन्हें सोच समझकर लिखना और बोलना चाहिए।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने पूर्व सांसद मालती शर्मा के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केसरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मालती जी का जीवन समाज के लिए समर्पित रहा। जनसेवा ही उनकी राजनीति का माध्यम रहा है। देश में नेताओं की फिसलती वाणी और साहित्य में शब्दों पर कंट्रोल नहीं होने को त्रिपाठी ने समाज के लिए गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राह दिखाने वाले को हर कदम सोच समझकर उठाना चाहिए। एक जनप्रतिनिधि की वाणी का असर दूर तक होता है, उसे बोलने से पहले सोचना चाहिए कि इसका असर क्या होगा। परिपक्व राजनीतिज्ञ अपनी वाणी पर हमेशा संयम रखता है। साहित्यकार की भाषा समाज में सीधा असर डालती है। साहित्य से जुडे़ लोगों को चाहिए कि वह ऐसी भाषा लिखें, जो भावी पीढ़ी में सकारात्मक सोच पैदा करे। भाषा सधी और संयमित होनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने मालती शर्मा के बेटे अरविंद शर्मा से अलग से बात की और सांत्वना दी। बंटी शर्मा, पुरुषोत्तम आदि मौजूद रहे। इससे पहले, राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने नईमंडी भाजपा कार्यकर्ता गीता जैन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की।
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