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साधु के अंतिम संस्कार पर रार
Updated Sat, 13 Jan 2018 01:01 AM IST
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साधु के अंतिम संस्कार पर रार
पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)।
पुरकाजी के गांव फलौदा में साधु के अंतिम संस्कार को लेकर बखेड़ा हो गया। बंजारा जाति के साधु को न श्मशान घाट में जगह मिली और न ही मुसलिमों ने कब्रिस्तान में दफनाने दिया। परेशान परिजन मायूस होकर रातभर शव को लेकर घर में बैठे रहे। शुक्रवार को प्रशासन को खबर की गई तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस गांव पहुंची और प्रकरण की जानकारी ली। उसके बाद शव को रीति-रिवाज के साथ श्मशान घाट में साधु को समाधि दी गई।
गांव फलौदा में बंजारा जाति का रमेश पुत्र शंकर अपने परिवार के साथ रहता है। उसका छोटा भाई 55 वर्षीय लल्लू भगत भी साथ रहता था। लल्लू की बहुत समय पहले शादी हुई थी, लेकिन पत्नी से विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। लल्लू ने साधु-संतों की संगतों में रहकर खुद को भगत बना लिया। उम्र ढलनी शुरू हुई तो लल्लू को अस्थमा ने घेर लिया। बीते दिनों उसकी अचानक तबियत बिगड़ गई। ठंड अधिक लगने से उसकी सांस उखड़ऩे लगी। ऐसे में परिजनों ने उसे देवबंद के एक अस्पताल में भर्ती कराया। बृहस्पतिवार को परिजन उसे लेकर घर आ रहे थे, मगर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस पर परिजनों ने उसकी अंतिम क्रिया के लिए गांव के मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान में दफनाने का प्रयास किया, लेकिन मुसलिमों के ऐतराज करने के बाद बैरंग लौट गए। इसके बाद लल्लू के शव को श्मशान घाट में समाधि देने की कोशिश की गई तो यहां भी विरोध हो गया। इससे आजिज परिजन बृहस्पतिवार की पूरी रात शव को लेकर घर में बैठे रहे। शुक्रवार सुबह सूचना मिलने पर पुरकाजी पुलिस गांव पहुंची और जांच-पड़ताल की। परिजनों ने पुलिस को बताया कि उनके समाज के साधु-संत को अग्नि के हवाले नहीं किया जाता है। उनके शरीर को समाधि दी जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गांव के जिम्मेदार लोगों से वार्ता की। घंटों मशक्कत होने के बाद लल्लू के शव को रीति-रिवाज के तहत श्मशान घाट में समाधि दी गई। मामले में प्रधान पति जसवंत त्यागी ने कहा कि सभी ग्रामीणों की सहमति के बाद ही शव को समाधि दी गई है।
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)।
पुरकाजी के गांव फलौदा में साधु के अंतिम संस्कार को लेकर बखेड़ा हो गया। बंजारा जाति के साधु को न श्मशान घाट में जगह मिली और न ही मुसलिमों ने कब्रिस्तान में दफनाने दिया। परेशान परिजन मायूस होकर रातभर शव को लेकर घर में बैठे रहे। शुक्रवार को प्रशासन को खबर की गई तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस गांव पहुंची और प्रकरण की जानकारी ली। उसके बाद शव को रीति-रिवाज के साथ श्मशान घाट में साधु को समाधि दी गई।
गांव फलौदा में बंजारा जाति का रमेश पुत्र शंकर अपने परिवार के साथ रहता है। उसका छोटा भाई 55 वर्षीय लल्लू भगत भी साथ रहता था। लल्लू की बहुत समय पहले शादी हुई थी, लेकिन पत्नी से विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। लल्लू ने साधु-संतों की संगतों में रहकर खुद को भगत बना लिया। उम्र ढलनी शुरू हुई तो लल्लू को अस्थमा ने घेर लिया। बीते दिनों उसकी अचानक तबियत बिगड़ गई। ठंड अधिक लगने से उसकी सांस उखड़ऩे लगी। ऐसे में परिजनों ने उसे देवबंद के एक अस्पताल में भर्ती कराया। बृहस्पतिवार को परिजन उसे लेकर घर आ रहे थे, मगर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस पर परिजनों ने उसकी अंतिम क्रिया के लिए गांव के मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान में दफनाने का प्रयास किया, लेकिन मुसलिमों के ऐतराज करने के बाद बैरंग लौट गए। इसके बाद लल्लू के शव को श्मशान घाट में समाधि देने की कोशिश की गई तो यहां भी विरोध हो गया। इससे आजिज परिजन बृहस्पतिवार की पूरी रात शव को लेकर घर में बैठे रहे। शुक्रवार सुबह सूचना मिलने पर पुरकाजी पुलिस गांव पहुंची और जांच-पड़ताल की। परिजनों ने पुलिस को बताया कि उनके समाज के साधु-संत को अग्नि के हवाले नहीं किया जाता है। उनके शरीर को समाधि दी जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गांव के जिम्मेदार लोगों से वार्ता की। घंटों मशक्कत होने के बाद लल्लू के शव को रीति-रिवाज के तहत श्मशान घाट में समाधि दी गई। मामले में प्रधान पति जसवंत त्यागी ने कहा कि सभी ग्रामीणों की सहमति के बाद ही शव को समाधि दी गई है।
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