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गृहस्थ आश्रम सब आश्रमों से श्रेष्ठ आश्रम-महाराज
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:24 AM IST
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गृहस्थ आश्रम सब आश्रमों से श्रेष्ठ आश्रम
खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा व्यास श्री विजय कौशल महाराज ने भगवान शिव व पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आकाशवाणी हुई कि पार्वती जी के पति के रुप में भगवान शंकर मिलेंगे और यदि आप हमारी आकाशवाणी को सत्यता को सही करना चाहते हैं तो जिस दिन सप्तऋषि आपके घर में आए तो समझ लेना कि आकाशवाणी सत्य हुई।
केके जैन एजूकेशन सभा स्थल में श्रीराम कथा समिति की ओर आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्याज महाराज जी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सब आश्रमों से श्रेष्ठ है। जो व्यक्ति सिर्फ अपनी चिंता करता है। वह हमेशा परेशान रहता है अशांत रहता है। आप सबकी चिंता करिए, सबका ध्यान रखिए। जिस प्रकार मां सबकी चिंता करती है। इसलिए सदा सुखी रहती है। आप भी सबके विषय में सोचिए, केवल अपने विषय में नहीं। जो व्यक्ति केवल अपने विषय में सोचता है, वह स्वर्ग में भी परेशान रहेगा। महाराज जी ने पार्वती व शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। इसके अलावा महाराज ने गुरु महिमा का प्रसंग करते हुए बताया कि जिस प्रकार बिना डॉक्टर या वैद्य की सलाह के बिना ली गई औषधि फायदा नहीं करती है। उसी प्रकार बिना गुरु के मार्ग दर्शन के उद्धार नहीं हो सकता है। जिसका कोई गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। अगर ऊंचा उठना है तो किसी गुरु रूपी व्यक्ति की बागडोर पकड़ कर रखिए।
रविवार सुबह श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत, मीनाक्षी, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली, अतुल, पवन, मनोज, अमित, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि रहे।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा व्यास श्री विजय कौशल महाराज ने भगवान शिव व पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आकाशवाणी हुई कि पार्वती जी के पति के रुप में भगवान शंकर मिलेंगे और यदि आप हमारी आकाशवाणी को सत्यता को सही करना चाहते हैं तो जिस दिन सप्तऋषि आपके घर में आए तो समझ लेना कि आकाशवाणी सत्य हुई।
केके जैन एजूकेशन सभा स्थल में श्रीराम कथा समिति की ओर आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्याज महाराज जी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सब आश्रमों से श्रेष्ठ है। जो व्यक्ति सिर्फ अपनी चिंता करता है। वह हमेशा परेशान रहता है अशांत रहता है। आप सबकी चिंता करिए, सबका ध्यान रखिए। जिस प्रकार मां सबकी चिंता करती है। इसलिए सदा सुखी रहती है। आप भी सबके विषय में सोचिए, केवल अपने विषय में नहीं। जो व्यक्ति केवल अपने विषय में सोचता है, वह स्वर्ग में भी परेशान रहेगा। महाराज जी ने पार्वती व शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। इसके अलावा महाराज ने गुरु महिमा का प्रसंग करते हुए बताया कि जिस प्रकार बिना डॉक्टर या वैद्य की सलाह के बिना ली गई औषधि फायदा नहीं करती है। उसी प्रकार बिना गुरु के मार्ग दर्शन के उद्धार नहीं हो सकता है। जिसका कोई गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। अगर ऊंचा उठना है तो किसी गुरु रूपी व्यक्ति की बागडोर पकड़ कर रखिए।
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रविवार सुबह श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत, मीनाक्षी, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली, अतुल, पवन, मनोज, अमित, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि रहे।
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