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ईंट भट्ठों से 13 बंधुआ मजदूर पंजाब से मुक्त कराए
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ईंट भट्ठों से 13 बंधुआ मजदूर पंजाब से मुक्त कराए
मुजफ्फरनगर। जिले के 13 बंधुआ मजदूरों समेत करीब 50 मजदूरों को पंजाब के कपूरथला और जालंधर जिलों के ईंट भट्ठे से मुक्त कराया गया है। बंधक बनाकर रखे गए 37 मजदूर बिलासपुर छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
एनसीसीइबीएल ( कैम्पेन कमिटि फॉर इरेडिकेशन ऑफ बोंडेड लेबर) के संयोजक और मानवाधिकार कार्यकर्ता निर्मल गोराना ने बताया कि हमारी टीम को एक बंधुआ मजदूर ने सूचना दी थी कि यहां बच्चों एवं महिलाओं को फरवरी 2020 से बिना किसी वेतन के बंधक बनाकर कार्य करने पर मजबूर किया जा रहा है। अब लॉकडाउन के चलते मजदूर कहीं आ जा भी नहीं सकते है। पंजाब के कपूरथला एवं जालंधर के गांवों में स्थित ईंट भट्ठों पर 50 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाने का निर्देश उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को दिया। तब जाकर मुजफ्फरनगर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मजदूरों को मुक्त कराया जा सका। शासन की तरफ से मुक्त हुए मजदूरों को तीन तीन लाख रुपये प्रति मजदूर, आवास एवं खेती के लिए भूमि आवंटन से लेकर मजदूरों के शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तक ऽमजदूर पुनर्वास कानूनऽ के तहत प्रदान की जाती है। ताकि पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा का सके। एक्शन एड लखनऊ से इमरान हुसैन ने बताया कि संस्था इससे पहले भी देश के विभिन्न राज्यों से बंधुआ मजदूरों को मुक्त करा चुकी है। एक्शन एड के जिला समन्वयक कमर इंतेखाब ने कहा कि सभी मजदूर अपने घर पहुंच गए हैं।
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मुजफ्फरनगर। जिले के 13 बंधुआ मजदूरों समेत करीब 50 मजदूरों को पंजाब के कपूरथला और जालंधर जिलों के ईंट भट्ठे से मुक्त कराया गया है। बंधक बनाकर रखे गए 37 मजदूर बिलासपुर छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
एनसीसीइबीएल ( कैम्पेन कमिटि फॉर इरेडिकेशन ऑफ बोंडेड लेबर) के संयोजक और मानवाधिकार कार्यकर्ता निर्मल गोराना ने बताया कि हमारी टीम को एक बंधुआ मजदूर ने सूचना दी थी कि यहां बच्चों एवं महिलाओं को फरवरी 2020 से बिना किसी वेतन के बंधक बनाकर कार्य करने पर मजबूर किया जा रहा है। अब लॉकडाउन के चलते मजदूर कहीं आ जा भी नहीं सकते है। पंजाब के कपूरथला एवं जालंधर के गांवों में स्थित ईंट भट्ठों पर 50 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाने का निर्देश उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को दिया। तब जाकर मुजफ्फरनगर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मजदूरों को मुक्त कराया जा सका। शासन की तरफ से मुक्त हुए मजदूरों को तीन तीन लाख रुपये प्रति मजदूर, आवास एवं खेती के लिए भूमि आवंटन से लेकर मजदूरों के शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तक ऽमजदूर पुनर्वास कानूनऽ के तहत प्रदान की जाती है। ताकि पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा का सके। एक्शन एड लखनऊ से इमरान हुसैन ने बताया कि संस्था इससे पहले भी देश के विभिन्न राज्यों से बंधुआ मजदूरों को मुक्त करा चुकी है। एक्शन एड के जिला समन्वयक कमर इंतेखाब ने कहा कि सभी मजदूर अपने घर पहुंच गए हैं।
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