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अपात्रों के खाते में भेजी 98 लाख की छात्रवृति
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश में मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने वाले बीटेक और पॉलीटेक्निक के छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति जारी कर दी गई। अकेले मुजफ्फरनगर में लगभग 98 लाख रुपये जारी किए गए हैं। छात्र-छात्राओं के खातों में रकम पहुंचने के बाद मामला पकड़ में आया तो विभाग कॉलेजों पर रकम वापस करने के लिए दबाव बना रहा है। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को विभिन्न कोर्सेस की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के साथ ही शुल्क प्रतिपूर्ति भी दी जाती है। यह सुविधा केवल प्रवेश परीक्षा और काउंसिलिंग के जरिए प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए है। कुछ छात्र कॉलेजों के मैनेजमेंट कोटे से भी प्रवेश लेते हैं। उन्हें न तो छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है और न ही शुल्क प्रतिपूर्ति। इसके बावजूद मुजफ्फरनगर जनपद की 12 शिक्षण संस्थाओं के करीब 323 छात्र-छात्राओं के खातों में 98 लाख रुपये छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में भेज दिए गए। इनमें ज्यादातर पॉलीटेक्निक और कुछ बीटेक के विद्यार्थी हैं।
मामला पकड़ में आने पर समाज कल्याण निदेशालय ने जारी की गई धनराशि को वापस मंगाने के आदेश जारी किए। इस पर समाज कल्याण विभाग ने सभी बैंकों को पत्र लिखकर छात्र-छात्राओं के खातों में गई छात्रवृत्ति की धनराशि का आहरण रोकने को कहा। साथ ही शिक्षण संस्थाओं को भी पत्र लिखकर जारी की गई धनराशि वापस करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शिक्षण संस्थाएं और विद्यार्थी धनराशि वापस करने को लेकर असमंजस में हैं। बताया जाता है कि इस तरह के मामले प्रदेश भर में सामने आए हैं। अन्य जनपदों में भी जारी की गई धनराशि वापस मांगी जा रही है।
पहले मैनेजमेंट कोटे वालों को भी छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति मिलती थी, लेकिन अब नहीं मिलती। इस संबंध में निदेशालय को पत्र लिखा गया, लेकिन तब तक धनराशि जारी हो चुकी थी। शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी कर धनराशि वापस करने के लिए कहा गया है। लगभग 12 लाख रुपये वापस भी हो गए हैं। - अर्चना, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कराने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थाओं की होती है। वह इस बात का प्रमाणपत्र देते हैं कि यदि कोई गलत सूचना भरेंगे तो स्वयं जिम्मेदार होंगे और उनसे धनराशि की रिकवरी होगी। यदि गलत तरीके से छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति जारी हुई है तो शिक्षण संस्थाओं को धनराशि वापस करनी होगी। - अर्चना वर्मा, सीडीओ।
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मामला पकड़ में आने पर समाज कल्याण निदेशालय ने जारी की गई धनराशि को वापस मंगाने के आदेश जारी किए। इस पर समाज कल्याण विभाग ने सभी बैंकों को पत्र लिखकर छात्र-छात्राओं के खातों में गई छात्रवृत्ति की धनराशि का आहरण रोकने को कहा। साथ ही शिक्षण संस्थाओं को भी पत्र लिखकर जारी की गई धनराशि वापस करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शिक्षण संस्थाएं और विद्यार्थी धनराशि वापस करने को लेकर असमंजस में हैं। बताया जाता है कि इस तरह के मामले प्रदेश भर में सामने आए हैं। अन्य जनपदों में भी जारी की गई धनराशि वापस मांगी जा रही है।
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पहले मैनेजमेंट कोटे वालों को भी छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति मिलती थी, लेकिन अब नहीं मिलती। इस संबंध में निदेशालय को पत्र लिखा गया, लेकिन तब तक धनराशि जारी हो चुकी थी। शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी कर धनराशि वापस करने के लिए कहा गया है। लगभग 12 लाख रुपये वापस भी हो गए हैं। - अर्चना, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कराने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थाओं की होती है। वह इस बात का प्रमाणपत्र देते हैं कि यदि कोई गलत सूचना भरेंगे तो स्वयं जिम्मेदार होंगे और उनसे धनराशि की रिकवरी होगी। यदि गलत तरीके से छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति जारी हुई है तो शिक्षण संस्थाओं को धनराशि वापस करनी होगी। - अर्चना वर्मा, सीडीओ।