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भूमियाखेड़ा मंदिर की अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा न देने का आरोप

Sat, 22 Dec 2018 12:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Dec 2018 12:14 AM IST
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भूमियाखेड़ा मंदिर की अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा न देने का आरोप
देवबंद (सहारनपुर)। श्री भूमिया खेड़ा सेवा ट्रस्ट ने सहारनपुर-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे-59 के निर्माण में कंपनी द्वारा मंदिर की अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा नहीं देने का आरोप लगाया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई की चेतावनी दी है।
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शुक्रवार को भूमियाखेड़ा मंदिर में पत्रकार वार्ता में ट्रस्ट अध्यक्ष गजराज सिंह राणा ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपसा) कंपनी द्वारा नगर में फ्लाईओवर निर्माण एवं सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। आरोप है कि निर्माण कंपनी ने अभी तक अधिग्रहीत मंदिर की भूमि का मुआवजा नहीं दिया है। कोषाध्यक्ष राजकुमार ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में कंपनी ने भारी गड़बड़ी की है। अधिग्रहीत भूमि का गलत तरीके से दूसरे लोगों को मुआवजा दे दिया गया है। मंदिर की भूमि के लिए 204 वर्ग मीटर का मुआवजा कंपनी द्वारा दिया जाना था, जबकि केवल 26 वर्ग मीटर का ही मुआवजा दिए जाने की बात की जा रही है। इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आदि को पत्र भेजे जा चुके हैं। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने चेतावनी दी यदि मुआवजा नहीं मिला तो मंदिर की एक इंच जमीन भी नहीं दी जाएगी। संरक्षक नाथीराम भगत व नकली सिंह ने पीएम व सीएम से प्रकरण की जांच कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। वार्ता के दौरान कुलबीर सैनी, सुरेंद्र सिंह, विजयपाल, सुशील, नरेंद्र आदि रहे। उधर, एपको कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एम.पी. सिंह ने बताया कि मुआवजा उपसा कंपनी को ही देना है। जब संबंधित लोगों को मुआवजा मिल जाएगा जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा।
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आरोप निराधार है। भूमियाखेड़ा मंदिर सेवा ट्रस्ट की भूमि 110 वर्ग मीटर है। जिसमें 40 मीटर पीडब्ल्यूडी और 59 वर्ग मीटर मंदिर की है। भूमि अधिग्रहण के लिए 33 वर्ग मीटर भूमि की सड़क निर्माण के लिए आवश्यकता है। इसमें यह भी देखा जाएगा कि ट्रस्ट की भूमि के बैनामे में कितने हिस्सेदार हैं। अधिग्रहण के बाद जमीन का पूरा मुआवजा दिया जाएगा।
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-अतुल शर्मा, एई उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपसा)
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