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शुकदेव महाराज की जयंती पर शोभायात्रा निकाली
Updated Tue, 17 Apr 2018 12:33 AM IST
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शुकदेव महाराज की जयंती पर शोभायात्रा निकाली
मोरना। शुकदेव महाराज की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई। प्राचीन वट वृक्ष स्थित शुकदेव महाराज व सप्तऋषि श्रीकृष्ण भगवान मंदिर में घंटे घड़ियालों को बजाकर संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारियों ने पूजा अर्चना कराई। इसके बाद नगर में शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर स्वामी ओमानंद ने कहा कि भगवान शुकदेव मानवता के सच्चे पथ प्रदर्शक हैं। वे भगवान शंकर के अवतार माने जाते हैं। कलियुग के मानव कल्याण कामना से शुकतीर्थ में बैठकर भागवत ज्ञान गंगा की धारा को सबसे पहले श्रीमुख से प्रवाहित कर प्रस्तुत किया। इसलिए इसको शुकतीर्थ का जन्म स्थल कहा जाता है। चक्रवती सम्राट राजा परिक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाई। इसलिए शुकतीर्थ को मोक्ष भूमि कहते हैं। देश-विदेशों से आने वाले श्रद्धालु धर्म लाभ उठाकर भव सागर से पार उतर जाते हैं। इस तीर्थ का जीर्णोद्धार कर महान संत शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज ने मूलभूत सुविधाओं से संपन्न कर इस तीर्थ को राष्ट्र व समाज को समर्पित कर मानव जाति के लिए पुनीत व अलौकिक कार्य किया है। विशाल भंडारे के प्रसाद को साधु संतों के बीच वितरित कर नकद दान दक्षिणा भी दी गई। यात्रा के आयोजन में रविंद्र शर्मा पुजारी, विनोद, हर्षमंडी, विपिन, मोहन, राजीव अग्रवाल, बंटी, छोटन, धर्मेंद्र शर्मा, प्रधान सुशील शर्मा, कन्हैया, भोला, सुनील, मुकेश, रामप्रकाश, आचार्य उत्प्रेती, आचार्य अचल शास्त्री, आचार्य कृष्ण, सुमन शास्त्री, राजू शर्मा, अनिल, राजेंद्र आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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मोरना। शुकदेव महाराज की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई। प्राचीन वट वृक्ष स्थित शुकदेव महाराज व सप्तऋषि श्रीकृष्ण भगवान मंदिर में घंटे घड़ियालों को बजाकर संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारियों ने पूजा अर्चना कराई। इसके बाद नगर में शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर स्वामी ओमानंद ने कहा कि भगवान शुकदेव मानवता के सच्चे पथ प्रदर्शक हैं। वे भगवान शंकर के अवतार माने जाते हैं। कलियुग के मानव कल्याण कामना से शुकतीर्थ में बैठकर भागवत ज्ञान गंगा की धारा को सबसे पहले श्रीमुख से प्रवाहित कर प्रस्तुत किया। इसलिए इसको शुकतीर्थ का जन्म स्थल कहा जाता है। चक्रवती सम्राट राजा परिक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाई। इसलिए शुकतीर्थ को मोक्ष भूमि कहते हैं। देश-विदेशों से आने वाले श्रद्धालु धर्म लाभ उठाकर भव सागर से पार उतर जाते हैं। इस तीर्थ का जीर्णोद्धार कर महान संत शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज ने मूलभूत सुविधाओं से संपन्न कर इस तीर्थ को राष्ट्र व समाज को समर्पित कर मानव जाति के लिए पुनीत व अलौकिक कार्य किया है। विशाल भंडारे के प्रसाद को साधु संतों के बीच वितरित कर नकद दान दक्षिणा भी दी गई। यात्रा के आयोजन में रविंद्र शर्मा पुजारी, विनोद, हर्षमंडी, विपिन, मोहन, राजीव अग्रवाल, बंटी, छोटन, धर्मेंद्र शर्मा, प्रधान सुशील शर्मा, कन्हैया, भोला, सुनील, मुकेश, रामप्रकाश, आचार्य उत्प्रेती, आचार्य अचल शास्त्री, आचार्य कृष्ण, सुमन शास्त्री, राजू शर्मा, अनिल, राजेंद्र आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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