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पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद की सजा
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:12 AM IST
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मुजफ्फरनगर। अदालत ने विवाहिता की हत्या के मामले में पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। गृह क्लेश में साढ़े चार वर्ष पहले गायत्री कॉलोनी में मीरा की डंडों से पीटकर हत्या की थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शहर कोतवाली के रामपुरी निवासी सुमिता देवी ने सिविल लाइन थाने पर 17 दिसंबर 2013 को अपने दामाद देवराज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसकी बेटी मीरा की शादी करीब 11 वर्ष पहले बामनहेड़ी की गायत्री कॉलोनी निवासी सुखबीर के पुत्र देवराज के साथ हुई थी। मारपीट किए जाने पर मीरा मायके में आकर रहने लगी थी। रिश्तेदारों के कहने पर मीरा ससुराल चली गई थी। 17 दिसंबर की शाम को देवराज ने डंडों से पीट-पीटकर मीरा की हत्या कर दी थी। बेटी दीया ने नानी सुमिता देवी को फोन कर मां की हत्या की सूचना दी थी। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची तो देवराज के घर पर मीरा का शव पड़ा मिला था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त डंडा भी बरामद किया था। सिविल लाइन पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर देवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद है। यह मुकदमा एडीजे अंबर रावत की अदालत संख्या-16 में सुना गया। एडीजीसी फिरोज अली ने अदालत में छह गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने नौ फरवरी को दोनों पक्षों को सुनते हुए मीरा की हत्या में पति देवराज को दोषी करार दिया था। सोमवार को सजा पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने हत्यारे पति देवराज को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार शहर कोतवाली के रामपुरी निवासी सुमिता देवी ने सिविल लाइन थाने पर 17 दिसंबर 2013 को अपने दामाद देवराज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसकी बेटी मीरा की शादी करीब 11 वर्ष पहले बामनहेड़ी की गायत्री कॉलोनी निवासी सुखबीर के पुत्र देवराज के साथ हुई थी। मारपीट किए जाने पर मीरा मायके में आकर रहने लगी थी। रिश्तेदारों के कहने पर मीरा ससुराल चली गई थी। 17 दिसंबर की शाम को देवराज ने डंडों से पीट-पीटकर मीरा की हत्या कर दी थी। बेटी दीया ने नानी सुमिता देवी को फोन कर मां की हत्या की सूचना दी थी। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची तो देवराज के घर पर मीरा का शव पड़ा मिला था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त डंडा भी बरामद किया था। सिविल लाइन पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर देवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद है। यह मुकदमा एडीजे अंबर रावत की अदालत संख्या-16 में सुना गया। एडीजीसी फिरोज अली ने अदालत में छह गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने नौ फरवरी को दोनों पक्षों को सुनते हुए मीरा की हत्या में पति देवराज को दोषी करार दिया था। सोमवार को सजा पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने हत्यारे पति देवराज को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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