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उर्दू सुलेख के विजेताओं को किया सम्मानित
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:57 AM IST
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छात्र की प्रगति में मातृभाषा का बड़ा महत्व
मुजफ्फरनगर। उर्दू टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उर्दू सुलेख प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ जमशेदपुरी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।
रविवार को सादात हॉस्टिल में उर्दू कांफ्रेंस एवं सम्मान समारोह में डॉ असलम जमशेदपुरी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के किसी भी छात्र की जिंदगी में मातृभाषा का बड़ा महत्व है। इस दौर की तालीम और तरबियत इंसान को पूरे जीवन में याद रहती है। इस दौर में अगर बच्चे को उर्दू में तालीम दी जाए तो वो बेहद कामयाब होता है। उन्होंने कहा कि उर्दू सिर्फ एक जुबान नहीं, बल्कि एक तहजीब है। प्रदेश सचिव राव अब्दुल सत्तार ने कहा कि आज उर्दू भाषा के ज्यादा से ज्यादा विकास की जरूरत है। कलीम त्यागी ने कहा कि आज उर्दू जुबान मुश्किल दौर से गुजर रही है। प्रधानाचार्या सफिया बेगम ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और खासतौर से लड़कियों की तालीम पर जोर दिया। एसोसिएशन के जिला सचिव शहजाद ने बताया कि नौ नवंबर उर्दू दिवस और 11 नवंबर शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की उर्दू सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इसमें 100 स्कूलों के 2050 बच्चों ने भाग लिया था। इसमें ब्लॉक एवं जिला स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न देकर प्रोत्साहित किया गया। ब्लॉक स्तर पर अपनी अहम भूमिका निभाने वाली तीन-तीन शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता साबिर खान और संचालन डॉ ताहिर कमर ने किया। डॉ असलम को मौलाना अब्दुल कलाम आजाद एवार्ड और साबिर खान, राव अब्दुस सत्तार, रईसुद्दीन राना, सफिया बेगम को अल्लामा इकबाल एवार्ड से सम्मानित किया गया। विजेता बच्चों में प्राइमरी स्तर पर शाहवेज, कहकशा, यासमीन, जूनियर स्तर पर महराना, तालिब, नरगिस को सम्मानित किया गया। तीन स्कूलों प्राथमिक विद्यालय दधेडू कलां, प्राथमिक विद्यालय लोहड्डा, उच्च प्राथमिक विद्यालय भलवा खतौली को विशेष पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में रियाज अली, शराफत अली, शुएब, साजिद, अमीर आजम, अखलाक, अर्शी खान, औसाफ अहमद, एजाज, मेराज खालिद, आबिद अली, अमजद सैफी, इमराना परवीन, अरीबुदीन, तहसीन अली, बदर खान, अली रजा, हाफिज अकबर अली, अयूब, इम्तियाज अली, महबूब अली, आसिम, रियाजुल हसन, अबुल हसन आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। उर्दू टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उर्दू सुलेख प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ जमशेदपुरी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।
रविवार को सादात हॉस्टिल में उर्दू कांफ्रेंस एवं सम्मान समारोह में डॉ असलम जमशेदपुरी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के किसी भी छात्र की जिंदगी में मातृभाषा का बड़ा महत्व है। इस दौर की तालीम और तरबियत इंसान को पूरे जीवन में याद रहती है। इस दौर में अगर बच्चे को उर्दू में तालीम दी जाए तो वो बेहद कामयाब होता है। उन्होंने कहा कि उर्दू सिर्फ एक जुबान नहीं, बल्कि एक तहजीब है। प्रदेश सचिव राव अब्दुल सत्तार ने कहा कि आज उर्दू भाषा के ज्यादा से ज्यादा विकास की जरूरत है। कलीम त्यागी ने कहा कि आज उर्दू जुबान मुश्किल दौर से गुजर रही है। प्रधानाचार्या सफिया बेगम ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और खासतौर से लड़कियों की तालीम पर जोर दिया। एसोसिएशन के जिला सचिव शहजाद ने बताया कि नौ नवंबर उर्दू दिवस और 11 नवंबर शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की उर्दू सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इसमें 100 स्कूलों के 2050 बच्चों ने भाग लिया था। इसमें ब्लॉक एवं जिला स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न देकर प्रोत्साहित किया गया। ब्लॉक स्तर पर अपनी अहम भूमिका निभाने वाली तीन-तीन शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता साबिर खान और संचालन डॉ ताहिर कमर ने किया। डॉ असलम को मौलाना अब्दुल कलाम आजाद एवार्ड और साबिर खान, राव अब्दुस सत्तार, रईसुद्दीन राना, सफिया बेगम को अल्लामा इकबाल एवार्ड से सम्मानित किया गया। विजेता बच्चों में प्राइमरी स्तर पर शाहवेज, कहकशा, यासमीन, जूनियर स्तर पर महराना, तालिब, नरगिस को सम्मानित किया गया। तीन स्कूलों प्राथमिक विद्यालय दधेडू कलां, प्राथमिक विद्यालय लोहड्डा, उच्च प्राथमिक विद्यालय भलवा खतौली को विशेष पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में रियाज अली, शराफत अली, शुएब, साजिद, अमीर आजम, अखलाक, अर्शी खान, औसाफ अहमद, एजाज, मेराज खालिद, आबिद अली, अमजद सैफी, इमराना परवीन, अरीबुदीन, तहसीन अली, बदर खान, अली रजा, हाफिज अकबर अली, अयूब, इम्तियाज अली, महबूब अली, आसिम, रियाजुल हसन, अबुल हसन आदि मौजूद रहे।
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