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गांव-देहात की जड़ों तक मजबूत होगा जीएसटी

Sat, 05 Aug 2017 01:08 AM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:08 AM IST
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गांव-देहात की जड़ों तक  मजबूत होगा जीएसटी
वाणिज्यकर चला रहा डोर-टू-डोर अभियान
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मुजफ्फरनगर। एक जुलाई से लागू हुए गुड्स टैक्स एवं सर्विस (जीएसटी) को गांव-देहात की जड़ों तक मजबूत बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। तहसील स्तर पर कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी जीएसटी में माइग्रेशन और इसके फायदों के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही अधिकारी एक माह में जीएसटी लगने के बाद कारोबार में आई अड़चनों और सहूलियतों के बारे में भी जानकारी जुटा रहे हैं।

जनपद की खतौली, बुढ़ाना के साथ सदर तहसील व्यापारियों से भरी है। इन क्षेत्रों में कपड़ा, लोहा, सीमेंट के साथ अनेक कारोबार करने वाले व्यापारी हैं। हार्डवेयर से लेकर किराना के बड़े व्यापारियों से संपर्क कर वाणिज्यकर विभाग जीएसटी के बारे में जानकारी ले रहा है। साथ ही जीएसटी में कारोबार करने के तरीकों और बिलों की फीडि़ंग, माल का डिमांड लैटर आदि बनाने के भी तरीकों को बताया जा रहा है। इतना ही नहीं शहर से माल ले जाकर गांवों में कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी जीएसटी के बारे में जानकारी दी जा रही है। जीएसटी के मास्टर ट्रेनर डीएस गौतम ने बताया कि वार्षिक रूप से 20 लाख रुपये कम इनकम वाले व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन कराने की खास जरूरत नहीं है, लेकिन लाभ के लिए माइग्रेशन करा सकते हैं। जीएसटी लागू हुए एक माह से अधिक हो गया है। व्यापारियों को इसके बारे में जानकारी होने के साथ कारोबार करने में सहूलियत होने लगी है। जीएसटी में शत प्रतिशत माइग्रेशन के लिए तहसीलवार बनी व्यापारियों की समितियों के साथ बैठक की जा रही है, ताकि भविष्य में व्यापारियों को कोई समस्या न रहे।
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