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शीरा और चीनी का लाभकारी मूल्य तय हो
Updated Mon, 21 May 2018 12:24 AM IST
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मुजफ्फरनगर। भैंसी गांव में हुई आंदोलन जन कल्याण की सभा में किसानों की समस्याओं पर चर्चा की गई। विचार विमर्श कर उनके निदान के लिए संबंधित अधिकारियों से मिलने का निर्णय लिया गया।
भैंसी के किसान चौधरी अजयपाल के यहां हुई बैठक में आंदोलन जन कल्याण के संयोजक प्रमोद कुमार ने कहा कि जिन चीजों से जनता प्रभावित होती है, उन पर अपनी आवाज बुलंद करना जरूरी है। दस और 15 सालों के डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध पूर्ण रूप से अव्यवहारिक निर्णय है। लघु और सीमांत किसान के लिए यह निर्णय घोर अन्याय है। किसी भी वाहन का रिजेक्शन तभी होना चाहिए, जब वह प्रदूषण मानकों या इंजन फिटनेस पर खरा न उतरे। उन्होंने कहा कि चीनी मिल और किसान एक दूसरे के पूरक है। चीनी मिल की सेहत से गन्ना पेमेंट सुनिश्चित होता है। जिस कृषि क्षेत्र का अपनी जीडीपी में आजादी के बाद लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, आज वह मात्र 17 प्रतिशत है।
चीनी मिलों को गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल का स्टैंडबाई विकल्प मिलना चाहिए। जब जब किसान अपना गन्ना उत्पादन बढ़ाता है तभी चीनी मिलें गन्ना पेमेंट रोक कर बैठ जाती है। चीनी मिलें अपना शीरा मुफ्त में बेच रही हैं। शीरा और चीनी दोनों का लाभकारी मूल्य तय हो ताकि शुगर इंडस्ट्री को बचाया जा सके। इस दौरान रामपाल सिंह, माटू, संजय पंवार, धीरज राठी, नरेंद्र प्रधान, प्रमोद कुमार, संजीव, भागमल, विनोद, मदनपाल, कादिर, आसिफ, गंगाराम, दिनेश त्यागी, काला, राशिद आदि किसान मौजूद रहे।
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भैंसी के किसान चौधरी अजयपाल के यहां हुई बैठक में आंदोलन जन कल्याण के संयोजक प्रमोद कुमार ने कहा कि जिन चीजों से जनता प्रभावित होती है, उन पर अपनी आवाज बुलंद करना जरूरी है। दस और 15 सालों के डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध पूर्ण रूप से अव्यवहारिक निर्णय है। लघु और सीमांत किसान के लिए यह निर्णय घोर अन्याय है। किसी भी वाहन का रिजेक्शन तभी होना चाहिए, जब वह प्रदूषण मानकों या इंजन फिटनेस पर खरा न उतरे। उन्होंने कहा कि चीनी मिल और किसान एक दूसरे के पूरक है। चीनी मिल की सेहत से गन्ना पेमेंट सुनिश्चित होता है। जिस कृषि क्षेत्र का अपनी जीडीपी में आजादी के बाद लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, आज वह मात्र 17 प्रतिशत है।
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चीनी मिलों को गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल का स्टैंडबाई विकल्प मिलना चाहिए। जब जब किसान अपना गन्ना उत्पादन बढ़ाता है तभी चीनी मिलें गन्ना पेमेंट रोक कर बैठ जाती है। चीनी मिलें अपना शीरा मुफ्त में बेच रही हैं। शीरा और चीनी दोनों का लाभकारी मूल्य तय हो ताकि शुगर इंडस्ट्री को बचाया जा सके। इस दौरान रामपाल सिंह, माटू, संजय पंवार, धीरज राठी, नरेंद्र प्रधान, प्रमोद कुमार, संजीव, भागमल, विनोद, मदनपाल, कादिर, आसिफ, गंगाराम, दिनेश त्यागी, काला, राशिद आदि किसान मौजूद रहे।
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