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जो जोड़ते हैं, वह डूबते जाते हैं: ज्ञान सागर
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:07 AM IST
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जो जोड़ते हैं, वह डूबते जाते हैं: ज्ञान सागर
मुजफ्फरनगर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में मंगल प्रवचन में आचार्य ज्ञान सागर जी महराज ने कहा कि पर्यूषण पर्व का उत्तम अकिंचन धर्म है। जब तक मेरा है सबकुछ, भोग बुद्धि रहेगी तब तक खुशी नहीं रहा जा सकता है। आत्मा ही सम्यक दर्शन, ज्ञान चरित्र है।
पर्यूषण पर्व पर आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि आसक्ति, मोह आदि कम करें तो शांति मिलेगी। मुट्ठी बांधकर आया था, हाथ पसारकर जाना है। भेद विज्ञान शरीर नश्वर है। धर्म बताता है कि हमारे साथ यश, वैभव साथ नहीं जाएगा। जाएगा तो सिर्फ कर्म-धर्म ही जाएगा। उन्होंने कहा कि जैसा दर्पण में देखेंगे वैसा दिखेगा। राग सबसे ज्यादा दुखों का कारण है। हमें निरंतर पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। हम सभी भगवान की पूजा, भक्ति करके अशुभ कर्मों को शुभ कर्मों में परिवर्तित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष को प्राप्त करने के लिए मुनिराज 24 प्रकार के परिग्रहों का त्याग कर आत्म साधना में लीन रहते हैं। अपरिग्रह भगवान महावीर का सिद्धांत रहा है कि जो जोड़ते जाते हैं, वह डूबते जाते हैं जो छोड़ते जाते हैं, वह तैरते जाते हैं।
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मुजफ्फरनगर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में मंगल प्रवचन में आचार्य ज्ञान सागर जी महराज ने कहा कि पर्यूषण पर्व का उत्तम अकिंचन धर्म है। जब तक मेरा है सबकुछ, भोग बुद्धि रहेगी तब तक खुशी नहीं रहा जा सकता है। आत्मा ही सम्यक दर्शन, ज्ञान चरित्र है।
पर्यूषण पर्व पर आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि आसक्ति, मोह आदि कम करें तो शांति मिलेगी। मुट्ठी बांधकर आया था, हाथ पसारकर जाना है। भेद विज्ञान शरीर नश्वर है। धर्म बताता है कि हमारे साथ यश, वैभव साथ नहीं जाएगा। जाएगा तो सिर्फ कर्म-धर्म ही जाएगा। उन्होंने कहा कि जैसा दर्पण में देखेंगे वैसा दिखेगा। राग सबसे ज्यादा दुखों का कारण है। हमें निरंतर पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। हम सभी भगवान की पूजा, भक्ति करके अशुभ कर्मों को शुभ कर्मों में परिवर्तित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष को प्राप्त करने के लिए मुनिराज 24 प्रकार के परिग्रहों का त्याग कर आत्म साधना में लीन रहते हैं। अपरिग्रह भगवान महावीर का सिद्धांत रहा है कि जो जोड़ते जाते हैं, वह डूबते जाते हैं जो छोड़ते जाते हैं, वह तैरते जाते हैं।
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