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दान से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं-सत्यानंद महाराज
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:04 AM IST
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दान से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं : सत्यानंद महाराज
जानसठ(मुजफ्फरनगर)। कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि दान से बड़ा कोई भी पुण्य कार्य नहीं है। उन्होंने ईश्वर भक्ति को ही सबसे बड़ी भक्ति बताया।
शनिवार को कस्बे के मोहल्ला हुसैनपुरा स्थित सैनी फार्म हाउस में पिछले आठ दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन के अवसर पर कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति दान करने से घबराता है, उसे कभी भी ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। कथा के समापन पर विशाल भंडारा हुआ। कथा के आयोजकों में ब्रजेश रस्तोगी, मूचचंद सैनी, पवन गुप्ता, राकेश मिर्गान, राजा कर्णवाल, राजीव गुप्ता, सुरेंद्र बंसल, राजेश श्रगांनिया, देवेंद्र डागा, छतरपाल प्रजापति, मुकेश शर्मा, नेत्रपाल कश्यप, आशु कंसल, गौरव भटनागर आदि मौजूद रहे। उधर, गांव अहरोड़ा के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक साध्वी ललिता देवी ने कहा कि माता पिता की सच्चे मन से सेवा करने से ही भक्ति मिलेगी। कथा के आयोजकों में प्रवेंद्र भड़ाना एडवोकेट, ग्राम प्रधान मांगेराम, सतीश भड़ाना, मास्टर अजब सिंह, रामशरण, ब्रजपाल, संतरपाल, डा. मुनेश, महिपाल, पूर्व प्रधान महिपाल, ब्रजेश, राजेंद्र शर्मा, बाबूराम, विनोद कुमार, बबलू आदि का सहयोग रहा।
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जानसठ(मुजफ्फरनगर)। कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि दान से बड़ा कोई भी पुण्य कार्य नहीं है। उन्होंने ईश्वर भक्ति को ही सबसे बड़ी भक्ति बताया।
शनिवार को कस्बे के मोहल्ला हुसैनपुरा स्थित सैनी फार्म हाउस में पिछले आठ दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन के अवसर पर कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति दान करने से घबराता है, उसे कभी भी ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। कथा के समापन पर विशाल भंडारा हुआ। कथा के आयोजकों में ब्रजेश रस्तोगी, मूचचंद सैनी, पवन गुप्ता, राकेश मिर्गान, राजा कर्णवाल, राजीव गुप्ता, सुरेंद्र बंसल, राजेश श्रगांनिया, देवेंद्र डागा, छतरपाल प्रजापति, मुकेश शर्मा, नेत्रपाल कश्यप, आशु कंसल, गौरव भटनागर आदि मौजूद रहे। उधर, गांव अहरोड़ा के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक साध्वी ललिता देवी ने कहा कि माता पिता की सच्चे मन से सेवा करने से ही भक्ति मिलेगी। कथा के आयोजकों में प्रवेंद्र भड़ाना एडवोकेट, ग्राम प्रधान मांगेराम, सतीश भड़ाना, मास्टर अजब सिंह, रामशरण, ब्रजपाल, संतरपाल, डा. मुनेश, महिपाल, पूर्व प्रधान महिपाल, ब्रजेश, राजेंद्र शर्मा, बाबूराम, विनोद कुमार, बबलू आदि का सहयोग रहा।