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उड़ीसा विधायक अपनों की सुध लेने पहुंचे

Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
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उड़ीसा विधायक अपनों की सुध लेने पहुंचे
उड़ीसा के विधायक पहुंचे खतौली
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खतौली (मुजफ्फरनगर)।
उड़ीसा के जिला पुरी से कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में वहां के काफी संख्या में लोग सोमती अमावस्या पर हरिद्वार गंगा में स्नान करने के लिए कोच में बैठे थे। शनिवार को ट्रेन हादसे की जानकारी मिली तो उड़ीसा की विधानसभा सीट कोचिंडा संभलपुर से लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक रविनारायण नायक अपनों की सुध लेने के लिए नगर में पहुंचे।
विधायक श्री झारखंड मंदिर में पहुंचे, उनको हादसे वाली ट्रेन में एससी कोच में काम करने वाले प्राइवेट कर्मचारी उड़ीसा निवासी सुखनदास, जितेंद्र मिले। विधायक ने इन दोनों कर्मचारियों से कुशलक्षेम पूछा और ट्रेन में सफर करने वाले उड़ीसा के अन्य लोगों के बारे में जानकारी ली। इन कर्मचारियों ने बताया कि उड़ीसा के रहने वाले घायलों को लोगों ने ट्रेन के कोचों से बाहर निकालकर अस्पताल में पहुंचाया था। इसके बाद उनका किस अस्पताल में इलाज चल रहा है, इसकी उनको जानकारी नहीं है। विधायक ने बताया कि उनको केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उड़ीसा के मुसाफिरों को तलाश कर उनको वापस उड़ीसा लाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए वे उड़ीसा से चलकर खतौली पहुंचे हैं। विधायक के साथ गणेश महालिग, भूपेंद्र प्रधान, विवेक त्रिवेदी, पद्माचरण गुरु मौजूद रहे।
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हादसे की बात सुनकर सहम जाते हैं बच्चे
खतौली। राजस्थान परिवार के साथ तीन बालक ट्रेन हादसे का मंजर अभी तक नहीं भूले हैं, हादसे से तीनों बच्चे डरे और सहमे हुए हैं। श्री झारखंड महादेव देवालय में ठहरे राजस्थान के रहने वाले पांच साल के बालक बलराम पुत्र बन्नू, छह साल के सौरभ पुत्र हेमराज, सात साल की बालिका मीन पुत्री रुकवीर ने पूछताछ करने पर इन बच्चों ने बताया कि अचानक ट्रेन में जोर का झटका लगा तो वे अपनी मम्मी की गोद में बैठकर आंख बंद करके उनसे लिपट गए थे। इन बच्चों ने डरे व सहमे हुए बताया कि अब वे कभी ट्रेन में नहीं बैठेंगे। राजस्थान के परिवारों का कहना था हादसे के वक्त उनको अपने से ज्यादा फिक्र महिलाओं और बच्चों का लग रहा था। महिलाएं और बच्चे करीब 15 मिनट तक गुमशुम बैठे रहे। आवाज लगाकर हिलाने ढुलाने पर काफी देर बाद धीमी आवाज में महिलाएं बोली हम और बच्चे सभी ठीक हैं। महिलाओं की इतनी बात सुनकर परिवार के सदस्यों की जान में जान आ सकी।
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