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अहंकार पतन का सबसे बड़ा कारक
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:27 AM IST
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अहंकार पतन का सबसे बड़ा कारक
मुजफ्फरनगर। भगवान शिव की उपासना अर्थात भगवान शिव के पास बैठने से अभिप्राय यह है कि हम जीवन के सही स्वरूप का अध्ययन कर सकें। मनुष्य को जरा सा लाभ होते ही अहंकार से भर जाता है, जबकि अहंकार की सबसे बड़े पतन का कारक है।
महा मृत्युजंय सेवा मिशन के संयोजक पंडित संजीव शर्मा ने बताया कि भगवान शिव कहते हैं कि अपनी योग्यताओं, उपलब्धियों को छुपाकर रखो। कर्पूर गौर अर्थात कपूर के समान गौर वर्ण वाले भगवान शिव की हैं। शिव ही वास्तव में एक मात्र सुंदर कहे गए हैं, अन्य कोई भी देवी-देवता के लिए ऐसा नहीं कहा गया है। उन्होंने बताया कि पुराण कथा के दौरान कहा कि श्रावण के सोमवार ही शिवरात्रि से भी अधिक महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में में श्रावण के सोमवार की प्रशंसा की गई है। कोई भी मनोकामना सिद्धि के लिए सोमवार व्रत सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इसके अलावा भगवान शिव मृत्यु के भी देवता है।
महामृत्युंजय नाम भगवान शिव का शिव पूजन के द्वारा मृत्यु पर विजय के कारण की पड़ा है। शिव की पूजा का फल सहज जीवन व सहज मृत्यु है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सज प्रसन्न होने वाले देवता हैं। सहज रुप से ही जल से, गन्ने के रस, सरसों के तेल, दूध, दही, गंगाजल आदि से प्रसन्न हो जाते हैं। वर्षा ऋतु में उपलब्ध होने वाले ऋतु फलों आंखों के पुष्प-पत्ते, कनेर के पुष्प, बेलपत्र, भांग आदि से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
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मुजफ्फरनगर। भगवान शिव की उपासना अर्थात भगवान शिव के पास बैठने से अभिप्राय यह है कि हम जीवन के सही स्वरूप का अध्ययन कर सकें। मनुष्य को जरा सा लाभ होते ही अहंकार से भर जाता है, जबकि अहंकार की सबसे बड़े पतन का कारक है।
महा मृत्युजंय सेवा मिशन के संयोजक पंडित संजीव शर्मा ने बताया कि भगवान शिव कहते हैं कि अपनी योग्यताओं, उपलब्धियों को छुपाकर रखो। कर्पूर गौर अर्थात कपूर के समान गौर वर्ण वाले भगवान शिव की हैं। शिव ही वास्तव में एक मात्र सुंदर कहे गए हैं, अन्य कोई भी देवी-देवता के लिए ऐसा नहीं कहा गया है। उन्होंने बताया कि पुराण कथा के दौरान कहा कि श्रावण के सोमवार ही शिवरात्रि से भी अधिक महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में में श्रावण के सोमवार की प्रशंसा की गई है। कोई भी मनोकामना सिद्धि के लिए सोमवार व्रत सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इसके अलावा भगवान शिव मृत्यु के भी देवता है।
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महामृत्युंजय नाम भगवान शिव का शिव पूजन के द्वारा मृत्यु पर विजय के कारण की पड़ा है। शिव की पूजा का फल सहज जीवन व सहज मृत्यु है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सज प्रसन्न होने वाले देवता हैं। सहज रुप से ही जल से, गन्ने के रस, सरसों के तेल, दूध, दही, गंगाजल आदि से प्रसन्न हो जाते हैं। वर्षा ऋतु में उपलब्ध होने वाले ऋतु फलों आंखों के पुष्प-पत्ते, कनेर के पुष्प, बेलपत्र, भांग आदि से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
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