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जंजीरों और छुरियों से सोगवारों का मातम
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:07 AM IST
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जंजीरों और छुरियों से किया मातम
मुजफ्फरनगर। मुहर्रम की नौवीं तारीख को शिया सोगवारों ने खूनी मातम किया। सोगवारों ने जंजीरों और छुरियों से मातम किया। मातम में बच्चों ने भी भाग लेकर सोग जताया। गांव संधावली में भी मातमी जुलूस निकाला गया। उधर, मजलिसों में उलेमा ने फरमाया कि दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की हिफाजत के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनकी फौज ने कुर्बानी दी। घरों में हुई मजलिस में महिलाएं कर्बला के मंजर के वाकया को सुनकर जार-जार रोईं।
शनिवार को जसवंतपुरी में मजलिस की गई। मौलाना शम्स ने खिताब फरमाया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन को यजीद ने कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कर्बला की दास्तान सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गई। मजलिस में मर्सिया ख्वानी बबलू बाखरजा ने की। इसके बाद मौलाना ने मुल्क में चैन-अमन के लिए दुआएं कराई। तकरीर के बाद जुलजुनाह बरामद किया गया। मल्हूपुरा में जुलूस निकाला गया। जिसमें सोगवारों ने जंजीरों और छुरियों से मातम किया। मातम में बच्चे और महिलाएं भी शामिल रहीं। जुलूस में नोह ाख्वानी मोहम्मद जमां वसीम ने की। जुलूस का संचालन परवेज नकवी, अली युसूफ, जफर मसूद ने किया। उधर, घरों में भी महिलाओं ने मजलिस में करबला के वाकयों को बयां किया।
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मुजफ्फरनगर। मुहर्रम की नौवीं तारीख को शिया सोगवारों ने खूनी मातम किया। सोगवारों ने जंजीरों और छुरियों से मातम किया। मातम में बच्चों ने भी भाग लेकर सोग जताया। गांव संधावली में भी मातमी जुलूस निकाला गया। उधर, मजलिसों में उलेमा ने फरमाया कि दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की हिफाजत के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनकी फौज ने कुर्बानी दी। घरों में हुई मजलिस में महिलाएं कर्बला के मंजर के वाकया को सुनकर जार-जार रोईं।
शनिवार को जसवंतपुरी में मजलिस की गई। मौलाना शम्स ने खिताब फरमाया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन को यजीद ने कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कर्बला की दास्तान सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गई। मजलिस में मर्सिया ख्वानी बबलू बाखरजा ने की। इसके बाद मौलाना ने मुल्क में चैन-अमन के लिए दुआएं कराई। तकरीर के बाद जुलजुनाह बरामद किया गया। मल्हूपुरा में जुलूस निकाला गया। जिसमें सोगवारों ने जंजीरों और छुरियों से मातम किया। मातम में बच्चे और महिलाएं भी शामिल रहीं। जुलूस में नोह ाख्वानी मोहम्मद जमां वसीम ने की। जुलूस का संचालन परवेज नकवी, अली युसूफ, जफर मसूद ने किया। उधर, घरों में भी महिलाओं ने मजलिस में करबला के वाकयों को बयां किया।
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