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फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी है %मेहरुनिशा%
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:59 AM IST
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फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी है मेहरुनिशा
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। नाम-मेहरुनिशा...उम्र-65 साल। कभी सोचा नहीं था कि एक रोज बुलंदी उसके दरवाजे पर खुद दस्तक देगी। वक्त की पुकार कहें या संघर्ष का दूसरा नाम, मगर बेटे को कामयाबी के फलक पर पहुंचाने वाली मेहरुनिशा अब दुनिया के लिए नजीर बन गई हैं। बेटे नवाज ने घर फोन कर ब्रिटिश ब्रॉड कास्ट (बीबीसी) की प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में मां मेहरुनिशा का नाम होने की जानकारी दी, तो परिवार में खुशियां बिखर गईं। छोटे से कस्बे बुढ़ाना से बीबीसी की लिस्ट में जगह बनाकर मेहरुनिशा ने नए आयाम गढ़ दिए हैं।
अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दकी की मां मेहरुनिशा को नजदीक से जानने के लिए उनकी जिंदगी के कुछ पन्ने उलटने होंगे। लगभग 50 साल पहले बागपत के गांव बिलौचपुरा के रहने वाले मस्जिद के इमाम मोहम्मद यूसुफ की बेटी मेहरुनिशा का निकाह बुढ़ाना के नवाबुद्दीन पुत्र मोहम्मद याकूब नंबरदार से हुआ था। बेहद साधारण रीति-रिवाज में मेहरुनिशा नवाबुद्दीन के घर उनकी आलिया बनकर आई थीं। वक्त की चादर ओढ़े कामयाबी उनका इंतजार कर रही थी, यह उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। घर में नवाजुद्दीन के जन्म के बाद खुशियां आईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार बढ़ा तो जरूरतों का बोझ भी उभरने लगा। 25 बीघा जमीन में खेती करने वाले नवाबुद्दीन हर पल बच्चों की कामयाबी के लिए सपने बुनते रहे। रब की मेहर बरसी तो आंगन में सात बेटों और दो बेटियों की किलकारी गूंजीं। मेहरुनिशा और नवाबुद्दीन के सात बेटे नवाजुद्दीन, अयाज, अलमास, फैजुद्दीन, समाल, माज और मिनाज, जबकि दो बेटियां शामिया उर्फ शामी और शायमा सिद्दीकी हैं। 20 जुलाई 2015 को नवाज के पिता नवाबुद्दीन दुनिया से रुखसत हो गए।
नवाजुद्दीन के भाई फैजुद्दीन बताते हैं कि पिता को पैतृक संपत्ति में से जो मिला, उस पर ही सब्र किया। पिता ईमानदार थे, जबकि मां के मैनेजमेंट ने घर-परिवार को संभाला है। बीते दौर में अब्बू घर में खर्च के लिए अम्मी को 20 रुपये देते थे तो अम्मी 15 खर्च कर 5 रुपये भविष्य के लिए बचाकर रखती थीं। न तो गणित में महारथ है, न हिंदी-इंग्लिश पढ़ पाती हैं मगर, मेहरुनिशा ने अपने अनोखे प्रबंधन के बल पर सभी को शिक्षा दिलाई और काबिल बनाया। परिवार उस हालात से भी गुजरा जब छोटा से घर बनाने के लिए जमीन का कुछ हिस्सा भी बेचना पड़ा।
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आर्थिक तंगी से गुजरा है परिवार
मुजफ्फरनगर। दुनिया की 100 प्रभावशाली महिलाओं में शुमार हुईं मेहरुनिशा सिद्दीकी के शौहर नवाबुद्दीन (नवाज के पिता) ने बच्चों के लालन-पालन के लिए बुढ़ाना में आरामशीन लगाई थी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। परिवार में तंगी आने पर उन्होंने कड़ी मेहनत कर खेतों में कामयाबी की फसल उगाई। बेटों को पढ़ाया-लिखाया और बुलंदियों पर पहुंचने के रास्ते दिखाए। इस काम में मेहरुनिशा बराबर उनके साथ रहीं।
ख्वाहिश को बनाया बच्चों की जरूरत
मुजफ्फरनगर। मेहरुनिशा निकाह के बाद से अपनी ख्वाहिशों को समेटती आईं। साधारण जिंदगी जी और हर पल बच्चों के लिए रब से दुआएं मांगी। जिसका फल मिला, मेहरुनिशा को आज बेटे नवाजुद्दीन की वजह से सब जानते हैं। मेहरुनिशा समाज के दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई हैं।
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। नाम-मेहरुनिशा...उम्र-65 साल। कभी सोचा नहीं था कि एक रोज बुलंदी उसके दरवाजे पर खुद दस्तक देगी। वक्त की पुकार कहें या संघर्ष का दूसरा नाम, मगर बेटे को कामयाबी के फलक पर पहुंचाने वाली मेहरुनिशा अब दुनिया के लिए नजीर बन गई हैं। बेटे नवाज ने घर फोन कर ब्रिटिश ब्रॉड कास्ट (बीबीसी) की प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में मां मेहरुनिशा का नाम होने की जानकारी दी, तो परिवार में खुशियां बिखर गईं। छोटे से कस्बे बुढ़ाना से बीबीसी की लिस्ट में जगह बनाकर मेहरुनिशा ने नए आयाम गढ़ दिए हैं।
अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दकी की मां मेहरुनिशा को नजदीक से जानने के लिए उनकी जिंदगी के कुछ पन्ने उलटने होंगे। लगभग 50 साल पहले बागपत के गांव बिलौचपुरा के रहने वाले मस्जिद के इमाम मोहम्मद यूसुफ की बेटी मेहरुनिशा का निकाह बुढ़ाना के नवाबुद्दीन पुत्र मोहम्मद याकूब नंबरदार से हुआ था। बेहद साधारण रीति-रिवाज में मेहरुनिशा नवाबुद्दीन के घर उनकी आलिया बनकर आई थीं। वक्त की चादर ओढ़े कामयाबी उनका इंतजार कर रही थी, यह उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। घर में नवाजुद्दीन के जन्म के बाद खुशियां आईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार बढ़ा तो जरूरतों का बोझ भी उभरने लगा। 25 बीघा जमीन में खेती करने वाले नवाबुद्दीन हर पल बच्चों की कामयाबी के लिए सपने बुनते रहे। रब की मेहर बरसी तो आंगन में सात बेटों और दो बेटियों की किलकारी गूंजीं। मेहरुनिशा और नवाबुद्दीन के सात बेटे नवाजुद्दीन, अयाज, अलमास, फैजुद्दीन, समाल, माज और मिनाज, जबकि दो बेटियां शामिया उर्फ शामी और शायमा सिद्दीकी हैं। 20 जुलाई 2015 को नवाज के पिता नवाबुद्दीन दुनिया से रुखसत हो गए।
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नवाजुद्दीन के भाई फैजुद्दीन बताते हैं कि पिता को पैतृक संपत्ति में से जो मिला, उस पर ही सब्र किया। पिता ईमानदार थे, जबकि मां के मैनेजमेंट ने घर-परिवार को संभाला है। बीते दौर में अब्बू घर में खर्च के लिए अम्मी को 20 रुपये देते थे तो अम्मी 15 खर्च कर 5 रुपये भविष्य के लिए बचाकर रखती थीं। न तो गणित में महारथ है, न हिंदी-इंग्लिश पढ़ पाती हैं मगर, मेहरुनिशा ने अपने अनोखे प्रबंधन के बल पर सभी को शिक्षा दिलाई और काबिल बनाया। परिवार उस हालात से भी गुजरा जब छोटा से घर बनाने के लिए जमीन का कुछ हिस्सा भी बेचना पड़ा।
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आर्थिक तंगी से गुजरा है परिवार
मुजफ्फरनगर। दुनिया की 100 प्रभावशाली महिलाओं में शुमार हुईं मेहरुनिशा सिद्दीकी के शौहर नवाबुद्दीन (नवाज के पिता) ने बच्चों के लालन-पालन के लिए बुढ़ाना में आरामशीन लगाई थी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। परिवार में तंगी आने पर उन्होंने कड़ी मेहनत कर खेतों में कामयाबी की फसल उगाई। बेटों को पढ़ाया-लिखाया और बुलंदियों पर पहुंचने के रास्ते दिखाए। इस काम में मेहरुनिशा बराबर उनके साथ रहीं।
ख्वाहिश को बनाया बच्चों की जरूरत
मुजफ्फरनगर। मेहरुनिशा निकाह के बाद से अपनी ख्वाहिशों को समेटती आईं। साधारण जिंदगी जी और हर पल बच्चों के लिए रब से दुआएं मांगी। जिसका फल मिला, मेहरुनिशा को आज बेटे नवाजुद्दीन की वजह से सब जानते हैं। मेहरुनिशा समाज के दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई हैं।