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सच्चा मुसलमान कभी आतंकवादी नहीं हो सकता-मोलाना
Updated Sun, 18 Nov 2018 12:29 AM IST
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सच्चा मुसलमान कभी आतंकवादी नहीं हो सकता :मौलाना
मोरना। मौलाना कमर सुल्तान जार्चवी ने कहा कि जो सच्चा मुसलमान है, वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता है। शिया समाज में गोद से लेकर कब्र तक शिक्षा का जोर रहता है। मजलिसें अमन चैन का पैगाम देती है। इनमें जितनी जियारतें की जाए कम है।
ककरौली के मोहल्ला दिवानखाना गढ़ी में 160 वर्षो से हुसैन की याद में प्रतिवर्ष मजलिसें अरबईन का विशाल आयोजन किया जाता है। बुलंदशहर से पधारे मौलाना कमर सुल्तान जार्चवी ने कहा कि हमने 208 दिन को भारी दुख के बीच गुजारा है। पूरी दुनिया इस बात की गवाह है कि शिया कौम ने कभी किसी का दिल दुखाया हो। हमने हक के लिए सड़कों पर संघर्ष किया। शिया कौम इसलिए गम मना रही है कि कोई भी जालिम फिर से कामयाब न हो। इस्लाम के नाम पर अत्याचार करने वालों का आज भी हुसैन और हुसैन को मानने वाले रोकने को तैयार है। हमारे बच्चे काले कपड़े में नजर आएंगे, लेकिन काले धंधों में नहीं। हम साल भर जमा करते हैं, दो महीने आठ दिन उसको बांटने का काम करते हैं। मजलिसें ना होती तो, दूसरे लोगों की तरह हम भी शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाते। इल्म, ईमान, शिक्षा के बिना अधूरा है। आतंकवाद उन लोगों में जन्म लेता है, जिनका रिश्ता करबला से जुड़ा न हो। मोहम्मद हुसैन ने सच्चाई के लिए अपनी शहादत देकर धर्म को बचाए रखा। देश पर कुर्बान होने से बड़ी शहादत कोई नहीं। मजलिस के दौरान संभलहेड़ा के मोहम्मद अली ने मर्सियां व पेशखानी की। आयोजन में डा. जिया आलम, नियाज मेंहदी, जरगाम रजा, अली मियां, शाने रजा, शर्बत अब्बास, अली अब्बास आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, मजलिस में जिला बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, मेरठ, हापुड़, खुर्जा, बुलंदशहर, नोएडा, दिल्ली, सहारनपुर, रुड़क़ी, शामली आदि से आए हजारों लोगों ने भाग लिया।
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मोरना। मौलाना कमर सुल्तान जार्चवी ने कहा कि जो सच्चा मुसलमान है, वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता है। शिया समाज में गोद से लेकर कब्र तक शिक्षा का जोर रहता है। मजलिसें अमन चैन का पैगाम देती है। इनमें जितनी जियारतें की जाए कम है।
ककरौली के मोहल्ला दिवानखाना गढ़ी में 160 वर्षो से हुसैन की याद में प्रतिवर्ष मजलिसें अरबईन का विशाल आयोजन किया जाता है। बुलंदशहर से पधारे मौलाना कमर सुल्तान जार्चवी ने कहा कि हमने 208 दिन को भारी दुख के बीच गुजारा है। पूरी दुनिया इस बात की गवाह है कि शिया कौम ने कभी किसी का दिल दुखाया हो। हमने हक के लिए सड़कों पर संघर्ष किया। शिया कौम इसलिए गम मना रही है कि कोई भी जालिम फिर से कामयाब न हो। इस्लाम के नाम पर अत्याचार करने वालों का आज भी हुसैन और हुसैन को मानने वाले रोकने को तैयार है। हमारे बच्चे काले कपड़े में नजर आएंगे, लेकिन काले धंधों में नहीं। हम साल भर जमा करते हैं, दो महीने आठ दिन उसको बांटने का काम करते हैं। मजलिसें ना होती तो, दूसरे लोगों की तरह हम भी शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाते। इल्म, ईमान, शिक्षा के बिना अधूरा है। आतंकवाद उन लोगों में जन्म लेता है, जिनका रिश्ता करबला से जुड़ा न हो। मोहम्मद हुसैन ने सच्चाई के लिए अपनी शहादत देकर धर्म को बचाए रखा। देश पर कुर्बान होने से बड़ी शहादत कोई नहीं। मजलिस के दौरान संभलहेड़ा के मोहम्मद अली ने मर्सियां व पेशखानी की। आयोजन में डा. जिया आलम, नियाज मेंहदी, जरगाम रजा, अली मियां, शाने रजा, शर्बत अब्बास, अली अब्बास आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, मजलिस में जिला बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, मेरठ, हापुड़, खुर्जा, बुलंदशहर, नोएडा, दिल्ली, सहारनपुर, रुड़क़ी, शामली आदि से आए हजारों लोगों ने भाग लिया।
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