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बेटे के सदमे पिता ने भी छोड़ी दुनिया
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:24 AM IST
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बेटे की मौत के सदमे में चली गई जान
चरथावल। पांच दिन पूर्व अचानक हार्ट अटैक से हुई जवान बेटे की मौत के गम को पिता झेल नहीं पाए और उन्होंने भी दुनिया छोड़ दी। पांच दिन में पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दशहरा और दीपावली त्योहार की खुशियां मातम में तब्दील हो गई है।
कस्बे के छिंपीयान निवासी जनेश्वर दास के पुत्र रजनीश उर्फ बिट्टू को अचानक हार्टअटैक से 13 अक्तूबर की रात में मृत्यु हो गई थी। जवान बेटे की अंतिम यात्रा में जाना पिता के लिए बड़ा सदमा था। उसी वक्त अचानक रास्ते में वह गिर गए। लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया था। बेटे की बेचैनी उन्हें सताती रही और शुक्रवार देर शाम उनके शरीर से पसीने छूटने लगे। कुछ ही देर बाद शरीर त्याग दिया। बेटे की तेरहवीं से पहले से पिता का हमेशा के लिए चले जाना परिवार पर पहाड़ टूटने के समान है। त्योहारों के सीजन में एक परिवार में दो पर कस्बे में शोक है। शोक जताने पहुंचे पूर्व चेयरमैन सुधीर सिंघल और समिति सभापति कुबेरदत्त त्यागी और शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि कल तक जनेश्वर दास पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन वह युवा बेटे की मौत के अत्यंत मलाल था। जिससे वह तनाव में आ गए थे। गहरे सदमे को झेल नहीं पाने के कारण उनकी मौत से पूरा परिवार असहनीय पीड़ा में है।
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चरथावल। पांच दिन पूर्व अचानक हार्ट अटैक से हुई जवान बेटे की मौत के गम को पिता झेल नहीं पाए और उन्होंने भी दुनिया छोड़ दी। पांच दिन में पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दशहरा और दीपावली त्योहार की खुशियां मातम में तब्दील हो गई है।
कस्बे के छिंपीयान निवासी जनेश्वर दास के पुत्र रजनीश उर्फ बिट्टू को अचानक हार्टअटैक से 13 अक्तूबर की रात में मृत्यु हो गई थी। जवान बेटे की अंतिम यात्रा में जाना पिता के लिए बड़ा सदमा था। उसी वक्त अचानक रास्ते में वह गिर गए। लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया था। बेटे की बेचैनी उन्हें सताती रही और शुक्रवार देर शाम उनके शरीर से पसीने छूटने लगे। कुछ ही देर बाद शरीर त्याग दिया। बेटे की तेरहवीं से पहले से पिता का हमेशा के लिए चले जाना परिवार पर पहाड़ टूटने के समान है। त्योहारों के सीजन में एक परिवार में दो पर कस्बे में शोक है। शोक जताने पहुंचे पूर्व चेयरमैन सुधीर सिंघल और समिति सभापति कुबेरदत्त त्यागी और शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि कल तक जनेश्वर दास पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन वह युवा बेटे की मौत के अत्यंत मलाल था। जिससे वह तनाव में आ गए थे। गहरे सदमे को झेल नहीं पाने के कारण उनकी मौत से पूरा परिवार असहनीय पीड़ा में है।
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