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गुरु शिष्य का भाग्य विधाता होता है-स्वामी ओमानंद
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:31 AM IST
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गुरु शिष्य का भाग्य विधाता होता है : स्वामी ओमानंद
मोरना। तीर्थ शुक्रताल में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने संत महात्माओं व गुरुओं को वैदिक मंत्रोच्चारण मंगल आरती के बीच पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर नगर की विभिन्न धर्मशालाओं और आश्रमों में आयोजित भंडारे का प्रसाद वितरित कर साधु संतों को नकद दान दक्षिणा दी गई।
गुरु पूर्णिमा पर शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने अपने गुरु शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण की समाधि पर पूजा-अर्चना कर पर्व को मनाया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ, सिद्धि, मनोवृत्ति गुरु और शिष्य की पवित्र मर्यादित परंपराओं को खंडित कर देती है। गुरु शिष्य का भाग्य विधाता होता है और वह भाग्य के द्वार खोल देता है। गुरु अपने शिष्य की अंधेरी राहों में ज्ञान का प्रकाश बिखेर कर उसकी राह का आसन कर देता है। वहीं, हनुमत धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज को चंदन का तिलक कर पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने मेेवा, फल और लड्डुओं का प्रसाद देकर अपने परिवार के लिए खुशहाली का आशीर्वाद लिया। दंडी आश्रम के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी स्वामी गुरुदत्त महाराज को प्रणाम करते हुए अनुयायियों व भगतों ने जीवन रूपी नैय्या को पार लगाकर भक्ति भाव के लिए आशीर्वाद लिया। नगर स्थित फिरोजपुर मार्ग पर पीतांबरा धाम आश्रम में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य स्वामी अयोध्या प्रसाद महाराज को श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण, मिठाई, फल आदि भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान शनिधाम, शिवधाम, गणेशधाम, पार्वतीधाम, गोडियामठ, सिद्धपीठ आश्रम, सच्चाधाम, मां अन्नपूर्णा आश्रम, ब्राह्मण आश्रम, राम आश्रम, मानव निर्माण आश्रम आदि सहित धर्मशालाओं में गुरु पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिनमें आयोजित भंडारे का प्रसाद का वितरण साधु संतों के बीच वितरण कर दक्षिणा भी दी गई। इस मौके पर नगर में मेला जैसा माहौल बना रहा।
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मोरना। तीर्थ शुक्रताल में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने संत महात्माओं व गुरुओं को वैदिक मंत्रोच्चारण मंगल आरती के बीच पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर नगर की विभिन्न धर्मशालाओं और आश्रमों में आयोजित भंडारे का प्रसाद वितरित कर साधु संतों को नकद दान दक्षिणा दी गई।
गुरु पूर्णिमा पर शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने अपने गुरु शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण की समाधि पर पूजा-अर्चना कर पर्व को मनाया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ, सिद्धि, मनोवृत्ति गुरु और शिष्य की पवित्र मर्यादित परंपराओं को खंडित कर देती है। गुरु शिष्य का भाग्य विधाता होता है और वह भाग्य के द्वार खोल देता है। गुरु अपने शिष्य की अंधेरी राहों में ज्ञान का प्रकाश बिखेर कर उसकी राह का आसन कर देता है। वहीं, हनुमत धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज को चंदन का तिलक कर पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने मेेवा, फल और लड्डुओं का प्रसाद देकर अपने परिवार के लिए खुशहाली का आशीर्वाद लिया। दंडी आश्रम के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी स्वामी गुरुदत्त महाराज को प्रणाम करते हुए अनुयायियों व भगतों ने जीवन रूपी नैय्या को पार लगाकर भक्ति भाव के लिए आशीर्वाद लिया। नगर स्थित फिरोजपुर मार्ग पर पीतांबरा धाम आश्रम में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य स्वामी अयोध्या प्रसाद महाराज को श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण, मिठाई, फल आदि भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान शनिधाम, शिवधाम, गणेशधाम, पार्वतीधाम, गोडियामठ, सिद्धपीठ आश्रम, सच्चाधाम, मां अन्नपूर्णा आश्रम, ब्राह्मण आश्रम, राम आश्रम, मानव निर्माण आश्रम आदि सहित धर्मशालाओं में गुरु पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिनमें आयोजित भंडारे का प्रसाद का वितरण साधु संतों के बीच वितरण कर दक्षिणा भी दी गई। इस मौके पर नगर में मेला जैसा माहौल बना रहा।
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