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अपनी मर्जी से सर्द रातों में खुले में कौन सोता है साहब

Sun, 14 Jan 2018 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद।
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद। Updated Sun, 14 Jan 2018 12:39 AM IST
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who,s sleep open in cold night
कूड़ा, लकड़ियां जलाकर ठंड से बचने की कोशिश करते बच्चे। - फोटो : Amar Ujala

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भीषण सर्दी में लोगों को गर्म कपड़ों में लिपटकर, रजाई-कंबल ओढ़कर बंद मकानों में भी कंपकंपी आ रही है। रजाई में जरा सी हवा आने पर नींद खुल जाती है। ऐसे में कल्पना करके देखिए किसी अर्धनग्न व्यक्ति के फंटे कंबल में खुले आसमान केनीचे सर्द हवाओं का सामना कर रात काटने की।

अगर विश्वास न हो तो रात में शहर की सड़कों पर निकलकर देखिए, दो-चार नहीं सौ से ज्यादा लोग यहां-वहां पड़े मिलेंगे। इस पर अफसरों का तुर्रा है कि बेघर शेल्टर होम में पलंग पर गर्म बिस्तर में सोना नहीं चाहते हैं। उनको कौन समझाए कि अपनी मर्जी से सर्द रातों में खुले आसमान केनीचे कौन सोता है साहब?
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शासन-प्रशासन का लाखों रुपया शेल्टर होम के नाम पर पानी में बहाया जा रहा है। एक ओर शेल्टर होम खाली पड़े हैं तो दूसरी ओर बेघर लोग चिथड़ों में सिमटकर सूबे के सबसे सर्द शहर में सोने का प्रयास कर रहे हैं। इसकेलिए कहीं न कहीं अफसरों की मनमानी से तैयार की गई योजनाएं जिम्मेदार हैं।
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दरअसल अधिकारी सच्चे मन से बेघरों को आश्रय देने की तैयारी ही नहीं कर रहे हैं। केवल खानापूर्ति की जा रही है। बेघर रहने वालों में ज्यादातर भिखारी, रिक्शा चलाने वाले, दैनिक मजदूर और घरों से निकाल दिए गए बुजुर्ग हैं। इनको रात में ठंड से बचने के लिए सहारा चाहिए।

अफसर चाहे कुछ भी कहें, लेकिन हकीकत यह है कि सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे कोई सोना नहीं चाहता। शेल्टर होम के कर्मचारी कभी आधार कार्ड मांगते हैं तो कभी पहचान पत्र। ज्यादातर बार जगह न होने की बात कहकर लौटा देते हैं। ऐसे में बेघर गरीबों की कराह सुनने वाला कोई नहीं है।
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सर्द रातों में खुले में सोओगे तो पुलिस का डंडा खाओगे
नगर निगम के अफसरों का कहना है कि बेघर शेल्टर होम तक जाना ही नहीं चाहते हैं। वह बार-बार भाग जाते हैं। इनको खुले में रहकर अपने सोने-भीख मांगने या रिक्शा खड़ा करने की जगह घेरे रखनी होती है। इनको खुले में रहने पर कंबल व रुपये भी लोग दे जाते हैं। अब इनको पुलिस के सहयोग से सड़को से हटवाया जाएगा।


आश्रय केंद्र प्रभारी व नगर निगम के मुख्य अभियंता आशीष शुक्ला ने बताया कि एसएसपी और डीएम के साथ इस संबंध में  बैठक हो गई है। अब रात में पुलिस खुले में लोगों को नहीं सोने देगी। उनको रात में ही शेल्टर होम पहुंचाया जाएगा। इसकेसाथ ही एक नंबर भी जारी किया जाएगा। यदि किसी को शेल्टर होम में प्रवेश पाने में परेशानी आती है तो वह कंट्रोल रूम में संपर्क कर शिकायत कर सकेगा।
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