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Moradabad News: बार बार पूछ रहे मासूम... अम्मी कहां हैं
Mon, 08 May 2023 01:33 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Mon, 08 May 2023 01:33 AM IST
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मुरादाबाद। 12 वर्षीय फरहान और उसकी आठ वर्षीय बहन अलसदा की मां हनीफा (42) की दुर्घटना में मौत हो गई है। दोनों मासूम इस बात से अनजान हैं। उनके जेहन में यही बात चल रही है कि दुर्घटना से पहले तक दोनों अम्मी का हाथ थामे टाटा मैजिक में बैठे थे। बार बार दोनों यही पूछ रहे हैं कि अम्मी कहां हैं।
घटना से पहले सफर में बेटी अलसदा अपनी अम्मी (हनीफा) के हाथों पर लगी मेंहदी की तारीफ कर रही थी। जबकि फरहान कह रहा था कि उसके कपड़े दूसरे बच्चों के कपड़ों से बेहतर हैं। इस पर अलसदा उसे चिढ़ा रही थी कि आवाज नहीं आ रही क्या कह रहे हो। तभी अचानक टाटा मैजिक और कैंटर की टक्कर की इतनी भयानक आवाज हुई कि शायद दोनों भाई बहन उम्र भर इसे भुला नहीं सकेंगे। अगले ही क्षण उनकी मां दुर्घटना के कारण चल बसीं। दोनों की हंसी को जीवन के सबसे बड़े दुख में बदलते हुए एक मिनट भी न लगा। हालांकि दोनों बच्चों को देर रात तक इस बात की जानकारी नहीं हुई थी।
हल्की बेहोशी की हालत में उन्हें अस्पताल लाया गया था। जब तक दोनों को पूरी तरह होश आया तब तक उनकी मां का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका था। परिजनों को इस संकट का हल नहीं मिल रहा कि बच्चों को मां के अंतिम दर्शन कैसे कराएं। देर रात तक परिजन चर्चा करते रहे कि दोनों बच्चों को बहुत धैर्य से बताना पड़ेगा कि उन्होंने क्या खो दिया है। इसके बाद ही सुबह हनीफा के दफीने से पहले दोनों बच्चों को अंतिम दर्शन कराए जा सकेंगे।
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घटना से पहले सफर में बेटी अलसदा अपनी अम्मी (हनीफा) के हाथों पर लगी मेंहदी की तारीफ कर रही थी। जबकि फरहान कह रहा था कि उसके कपड़े दूसरे बच्चों के कपड़ों से बेहतर हैं। इस पर अलसदा उसे चिढ़ा रही थी कि आवाज नहीं आ रही क्या कह रहे हो। तभी अचानक टाटा मैजिक और कैंटर की टक्कर की इतनी भयानक आवाज हुई कि शायद दोनों भाई बहन उम्र भर इसे भुला नहीं सकेंगे। अगले ही क्षण उनकी मां दुर्घटना के कारण चल बसीं। दोनों की हंसी को जीवन के सबसे बड़े दुख में बदलते हुए एक मिनट भी न लगा। हालांकि दोनों बच्चों को देर रात तक इस बात की जानकारी नहीं हुई थी।
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हल्की बेहोशी की हालत में उन्हें अस्पताल लाया गया था। जब तक दोनों को पूरी तरह होश आया तब तक उनकी मां का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका था। परिजनों को इस संकट का हल नहीं मिल रहा कि बच्चों को मां के अंतिम दर्शन कैसे कराएं। देर रात तक परिजन चर्चा करते रहे कि दोनों बच्चों को बहुत धैर्य से बताना पड़ेगा कि उन्होंने क्या खो दिया है। इसके बाद ही सुबह हनीफा के दफीने से पहले दोनों बच्चों को अंतिम दर्शन कराए जा सकेंगे।
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