फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   ...when you love children's novels too, Mom

Moradabad News: ... जब बच्चों के लिए तेंदुए से भी भिड़ गईं माएं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2026 01:50 AM IST
विज्ञापन
...when you love children's novels too, Mom
मुरादाबाद। मां... ममता का प्रतीक। चरणों में जन्नत है। आंचल में दुलार है। लेकिन, बच्चों की जान पर बन आए तो अपनी फिक्र किए बिना कोई भी खतरा उठाने से गुरेज नहीं। किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकती हैं। सामने चाहे खतरनाक वन्यजीव तेंदुआ ही क्यों न हो। कोई दरांती लेकर तेंदुए से भिड़ गई तो किसी ने गन्ने से ही पीटकर तेंदुए को भगा दिया लेकिन अपने बच्चों को काल के मुंह सुरक्षित बचा लिया। मदर्स डे पर ऐसी मांओं को सलाम।
विज्ञापन




दरांती लेकर भिड़ गई मां, बेटे को बचा लिया



कांठ। 11 अप्रैल की शाम करीब छह बजे का वक्त था। गांव दरियापुर की विमलेश (27) गन्ने के खेत में दरांती से काम कर रही थी। कुछ ही फासले पर पति सुनील कुमार फावड़े से खोदाई कर रहे थे। पास ही तीन साल का इकलौता बेटा हर्ष खेल रहा था। अचानक गन्ने के बीच से निकले तेंदुए ने हर्ष पर हमला कर दिया। तेंदुआ पंजों में दबा कर गन्ने में खींचने लगा। विमलेश की नजर पड़ी तो बेटा तेंदुए के पंजों में था। वह बिना वक्त गंवाए दरांती लेकर तेंदुए से भिड़ गईं। पति सुनील कुमार भी फावड़ा लेकर दौड़ पड़े। हमला होते देख तेंदुे को हर्ष को छोड़ कर भागना पड़ा। चिकित्सकों ने प्राथमिक इलाज के बाद हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल भेज दिया। जहां से उसे मेरठ रेफर कर दिया गया। मां विमलेश की हिम्मत और सजगता से मासूम की जान बच गई। अब वह ठीक और घर पर ही है।
विज्ञापन



गन्ने से पीटकर बेटे को तेंदुए के जबड़ों से छुड़ाया
ठाकुरद्वारा। दो माह पूर्व नौ मार्च को शाम करीब सात बजे तरफ दलपत निवासी पिंकी खाना बना रही थीं। उन्होंने बताया कि चार साल का उनका बेटा मोक्ष घर से बाहर दरवाजे पर खेल रहा था। अचानक तेंदुआ आया और बेटे को जबड़े में दबाकर ले जाने लगा। यह देखकर देखकर पिंकी तेंदुए से भिड़ गई। पास ही पड़ा गन्ना उठाकर तेंदुए पर कई बार वार किए। करीब पांच मिनट तक संघर्ष किया। मां की हिम्मत के आगे मजबूर होकर तेंदुआ बच्चे को छोड़कर भाग गया। तेंदुए के हमले में मोक्ष की गर्दन और कान के आसपास गहरे घाव हो गए थे। अब मोक्ष पूरी तरह ठीक है।
विज्ञापन
विज्ञापन



बेटी तेंदुए के पंजों में थी, टॉर्ट की रोशनी डालकर बचाया
कांठ। पता नहीं उस वक्त इतनी हिम्मत कैसे आ गई, जिसकी वजह से बेटी की जान बचा पाई... यह कहना है कांठ के गांव राजीपुर खद्दर की पिंकी का।

पिंकी के पति संदीप श्रमिक हैं। घटना की रात वह मुरादाबाद गए हुए थे। 27 मार्च की रात साढ़े तीन बजे थे। पिंकी छत पर मच्छरदानी लगी चारपाई पर सोई थीं। छह साल की बड़ी बेटी दीया और छोटी बेटी प्रज्ञा भी सो रही थी। तभी चारपाई पर हलचल होने और दीया के चीखने पर पिंकी की नींद खुली। उसने देखा कि उसकी बेटी दीया छत पर चढ़ आए तेंदुए के पंजों में है। उसने तुरंत टॉर्च की रोशनी तेंदुए पर डालते हुए शोर मचाया। छत पर सोए अन्य परिजन भी जाग गए। सभी के शोर मचाने पर तेंदुआ बच्ची को छोड़ भाग गया। मासूम दीया तेंदुए के झपट्टे के दौरान पंजे लगने से घायल हो गई। पिंकी ने कहा कि पता नहीं उस वक्त उसे इतनी हिम्मत कैसे आ गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed