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Moradabad News: 49 साल पुराने टैंक से जलापूर्ति, बजट के अभाव में समय पर नहीं होती सफाई
Sat, 08 Aug 2026 02:17 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2026 02:17 AM IST
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बिलारी। क्षेत्र के सहसपुर गांव में राजमहल रोड पर बने 49 साल पुराने ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति हो रही है। विभागीय बजट के अभाव में निर्धारित समय पर इस टैंक की सफाई नहीं हो पा रही है। ओवरहेड टैंक की छत में लगी जाली और सीढ़ी गल जाने से विभागीय कर्मचारियों को ऊपर तक चढ़ने में काफी दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार जल निगम के अधिकारी इस पेयजल परियोजना के बेहतर संचालन को लेकर गंभीर नहीं हैं।
सहसपुर गांव में उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा वर्ष 1976 में ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत ओवरहेड वाटर टैंक बनाया गया था। उस समय इस योजना पर लगभग 17 लाख रुपये का खर्चा आया था। वर्ष 1977 में यह पेयजल योजना चालू हो गई और सहसपुर समेत निकट के नौ ग्रामों को पेयजल आपूर्ति के लिए इस योजना से जोड़ दिया गया। उस समय विद्युत नलकूप, ओवरहेड वाटर टैंक, कर्मचारियों के आवास आदि भी बनाए गए थे। योजना जब चालू की गई तब क्षेत्र के नौ ग्रामों को यहां से जलापूर्ति होती थी। बाद में योजना से जुड़े ग्रामों में स्थानीय स्तर पर जब ओवरहेड वाटर टैंक बन गए और नलकूप लगा दिए गए तब सहसपुर की इस पेयजल योजना से केवल सहसपुर और खंडुआ दो गांव ही जुड़े रह गए।
सहसपुर की इस पेयजल परियोजना के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्तमान में सहसपुर गांव में 1345 और खंडुआ गांव 175 उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके घरों में इस परियोजना से जलापूर्ति हो रही है। खास बात यह है कि परियोजना का ओवरहेड टैंक 49 साल पुराना हो गया है। टैंक परिसर की चारदीवारी काफी समय पहले दो स्थानों पर टूट जाने की वजह से पहले कभी भी किसी बाहरी व्यक्ति के टैंक परिसर तक पहुंचने की संभावना बनी रहती है। टैंक काफी पुराना हो जाने की वजह से कर्मचारियों को टैंक के ऊपर तक पहुंचने के लिए टैंक की छत में जो लोहे की सीढ़ी और जाली बनी हुई हैं वह जंग लगने के बाद गल गई हैं।
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ऐसी स्थिति में परियोजना की देखरेख करने वाले कर्मचारी गिर जाने के डर की वजह से टैंक के ऊपर नहीं पहुंच पाते हैं।
किसी भी पेयजल परियोजना का ओवरहेड टैंक बनने के बाद विभागीय मानक अधिकतम 30 वर्ष का है लेकिन सहसपुर में 49 वर्ष बाद भी उसी ओवरहेड टैंक का उपयोग किया जा रहा है। जलनिगम के अधिकारियों की उपेक्षा के चलते इस टैंक की निर्धारित समय सीमा में सफाई नहीं हो पाती है। टैंक पर जहां उसकी पूर्व में सफाई होने की दिनांक का कॉलम बना हुआ है। वह खाली पड़ी है और कोई दिनांक अंकित नहीं है। इन हालात में सहसपुर और खंडुआ के बाशिंदों को पूरी तरह से शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
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सहसपुर गांव में उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा वर्ष 1976 में ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत ओवरहेड वाटर टैंक बनाया गया था। उस समय इस योजना पर लगभग 17 लाख रुपये का खर्चा आया था। वर्ष 1977 में यह पेयजल योजना चालू हो गई और सहसपुर समेत निकट के नौ ग्रामों को पेयजल आपूर्ति के लिए इस योजना से जोड़ दिया गया। उस समय विद्युत नलकूप, ओवरहेड वाटर टैंक, कर्मचारियों के आवास आदि भी बनाए गए थे। योजना जब चालू की गई तब क्षेत्र के नौ ग्रामों को यहां से जलापूर्ति होती थी। बाद में योजना से जुड़े ग्रामों में स्थानीय स्तर पर जब ओवरहेड वाटर टैंक बन गए और नलकूप लगा दिए गए तब सहसपुर की इस पेयजल योजना से केवल सहसपुर और खंडुआ दो गांव ही जुड़े रह गए।
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सहसपुर की इस पेयजल परियोजना के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्तमान में सहसपुर गांव में 1345 और खंडुआ गांव 175 उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके घरों में इस परियोजना से जलापूर्ति हो रही है। खास बात यह है कि परियोजना का ओवरहेड टैंक 49 साल पुराना हो गया है। टैंक परिसर की चारदीवारी काफी समय पहले दो स्थानों पर टूट जाने की वजह से पहले कभी भी किसी बाहरी व्यक्ति के टैंक परिसर तक पहुंचने की संभावना बनी रहती है। टैंक काफी पुराना हो जाने की वजह से कर्मचारियों को टैंक के ऊपर तक पहुंचने के लिए टैंक की छत में जो लोहे की सीढ़ी और जाली बनी हुई हैं वह जंग लगने के बाद गल गई हैं।
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ऐसी स्थिति में परियोजना की देखरेख करने वाले कर्मचारी गिर जाने के डर की वजह से टैंक के ऊपर नहीं पहुंच पाते हैं।
किसी भी पेयजल परियोजना का ओवरहेड टैंक बनने के बाद विभागीय मानक अधिकतम 30 वर्ष का है लेकिन सहसपुर में 49 वर्ष बाद भी उसी ओवरहेड टैंक का उपयोग किया जा रहा है। जलनिगम के अधिकारियों की उपेक्षा के चलते इस टैंक की निर्धारित समय सीमा में सफाई नहीं हो पाती है। टैंक पर जहां उसकी पूर्व में सफाई होने की दिनांक का कॉलम बना हुआ है। वह खाली पड़ी है और कोई दिनांक अंकित नहीं है। इन हालात में सहसपुर और खंडुआ के बाशिंदों को पूरी तरह से शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।