यह घड़ी समय के साथ-साथ बताती इतिहास: 150 साल पुराना रामपुर का शाही अतीत सुना रही, ब्रिटिश कारीगरी की है गवाह
रामपुर की जामा मस्जिद में करीब 150 साल पुरानी घड़ी है। इसे प्रिंस ऑफ वेल्स ने नवाब कल्बे अली खां को तोहफे में दिया था। नवाब ने 1870-1874 के बीच इस मस्जिद का निर्माण कराया था। वर्ष 1976 से मस्जिद प्रबंधक समिति इसकी देखरेख कर रही है।
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नवाबी दौर की शान और ब्रिटिश इंजीनियरिंग का नायाब संगम देखना हो तो रामपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद पर गाैर फरमाइए। यहां की मुख्य दीवार पर लगी प्राचीन घड़ी सिर्फ वक्त ही नहीं दिखाती बल्कि करीब 150 साल पुराने उस शाही इतिहास की गवाही देती है जब ब्रिटेन में प्रिंस ऑफ वेल्स ने इसे नवाब कल्बे अली खां को तोहफे में दिया था। उस दाैरान इसे लंदन की जेबी बेनसन कंपनी ने तैयार किया था।
नवाब कल्बे अली खां 1865 में रामपुर रियासत के नवाब बने और 1887 तक शासन किया। बताया जाता है कि उन्हें अरबी और फारसी का अच्छा ज्ञान था। उनके शासनकाल में शिक्षा, साहित्य और कला को बढ़ावा मिला। रामपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में भी उनका खास योगदान रहा। जानकारों के मुताबिक, एक मुलाकात के दौरान प्रिंस ऑफ वेल्स ने नवाब कल्बे अली खां को यह घड़ी भेंट की थी। नवाब इसे लंदन से रामपुर लाए और बाद में यह जामा मस्जिद के मुख्य द्वार पर लगाई गई।
नवाब कल्बे अली खां ने 1870 से 1874 के बीच जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। इसकी वास्तुकला में मुगल शैली का खासा प्रभाव दिखाई देता है। यहां लगाई गई घड़ी के संबंध में दो तख्तियों पर इसके बारे में जानकारी दी गई है। एक तख्ती पर प्रिंस ऑफ वेल्स का जिक्र है, जबकि दूसरी पर लंदन की जेबी बेनसन कंपनी का नाम और पता दर्ज है। वर्ष 1976 में जामा मस्जिद प्रबंधक समिति के गठन के बाद से घड़ी की देखरेख की जिम्मेदारी समिति के पास है।कमेटी के सचिव मुकर्रम रजा इनायती ने बताया कि 1976 में पहली प्रबंधक कमेटी गठित होने के साथ ही घड़ी के रखरखाव की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी।
तब से कमेटी ही इसकी मरम्मत कराती आ रही है। वर्ष 2020 में घड़ी की मरम्मत करने वाले कारीगर की मौत हो गई थी। इसके बाद दूसरे कारीगर से घड़ी की मरम्मत कराई जाने लगी। रामपुर जिला प्रशासन के अनुसार, रामपुर जामा मस्जिद की बनावट दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद से मिलती है। विशाल प्रवेश द्वार, बड़े गुंबद और ऊंची मीनारें इसकी भव्यता को खास बनाते हैं। मस्जिद का सुंदर आंतरिक हिस्सा भी इसकी निर्माण शैली पहचान का महत्वपूर्ण पहलू है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, नवाब कल्बे अली खां ने जामा मस्जिद के निर्माण पर उस समय करीब तीन लाख रुपये खर्च किए थे।
जामा मस्जिद में लगी घड़ी नवाब कल्बे अली खां ने लगवाई थी। इस घड़ी का निर्माण लंदन की एक कंपनी ने किया था। मस्जिद में लगी यह घड़ी ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है। इसकी देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी मस्जिद की प्रबंधक कमेटी निभाती है। - मौलवी फैजान खां, इमाम, जामा मस्जिद रामपुर
जामा मस्जिद के मुख्य द्वार पर लगी घड़ी रामपुर की ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी प्रबंधक समिति के पास है। घड़ी पर लगी तख्ती पर इसे बनाने वाली लंदन की जेबी बेनसन कंपनी का नाम दर्ज है। समिति समय-समय पर इसकी मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था कराती है। - मुकर्रम रजा इनायती, सेकेट्री जामा मस्जिद रामपुर
रामपुर की जामा मस्जिद की नींव नवाब फैजुल्लाह खां ने छोटी मस्जिद के रूप में रखी थी। इसका भव्य निर्माण नवाब कल्बे अली खां ने कराया, जबकि नवाब हामिद अली खां के दौर में भी काम हुआ। तीन गुंबद, चार मीनारें और ब्रिटेन से आई विशाल घड़ी इसकी खास पहचान है। जेबी बेनसन कंपनी की स्थापना 1690 में हुई थी। वर्ष 1834 में थॉमस जॉयस ने टावर घड़ियां बनाना शुरू किया था। यह घड़ी प्रिंस ऑफ वेल्स ने नवाब कल्बे अली खां को उपहार में दी थी। - काशिफ खां, पूर्व सदस्य, सलाहकार परिषद, सौलत पब्लिक लाइब्रेरी