यूपी: संदिग्ध आतंकी अरशद वारसी के मददगारों की तलाश में जुटीं एजेंसियां, तीन साल से लगातार आ रहा था मुरादाबाद
आतंकी अरशद और उसके ससुराल वालों के मोबाइल कॉल डिटेल के जरिए संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल झारखंड निवासी अरशद वारसी को मुरादाबाद से पकड़ कर अपने साथ ले गई थी।
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संदिग्ध आतंकी अरशद वारसी की गिरफ्तारी के बाद अब उसके मददगारों की तलाश में यूपी एटीएस और अन्य एजेंसियां जुट गई हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि अरशद पिछले तीन साल में कई बार मुरादाबाद आया और यहां ठहरा था। इस दौरान उससे मिलने के लिए कुछ अन्य लोग भी आ थे।
अरशद और उसके ससुराल वालों के मोबाइल कॉल डिटेल के जरिए संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल झारखंड निवासी अरशद वारसी को मुरादाबाद से पकड़ कर अपने साथ ले गई थी।
पूछताछ में पता चला था कि वह मुरादाबाद के लाल मस्जिद क्षेत्र में अपनी ससुराल में छिपा था। बुधवार को भी यूपी एटीएस, एलआईयू समेत अन्य जांच एजेंसियां अरशद का नेटवर्क खंगालने में जुटी रहीं। जांच में ये बात भी सामने आई है कि पिछले तीन साल में वह कई बार मुरादाबाद आया था।
इसी दौरान उसके संपर्क में कई लोग आ गए थे। टीमों ने ससुरालियों और उसकी पत्नी से पूछताछ की है। हालांकि ससुराल वालों ने टीमों को केवल इतना ही बताया है कि वह उन्हें केवल अरशद के इंजीनियर होने के अलावा कुछ नहीं पता है।
उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं कि वो किन लोगों के संपर्क में था। उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के मोबाइल डिटेल के अलावा उनके सोशल मीडिया एकाउंट भी खंगाल रही है।
मुरादाबाद समेत कई शहरों की रेकी कर चुका था अरशद
अरशद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की थी। इसके बाद वह दिल्ली चला गया और जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहा था। वह दिल्ली के ओखला में रह रहा था। अरशद ने अपने साथियों के साथ बम का प्रभाव जानने के लिए धमाके भी किए थे।
जांच में ये बात भी सामने है कि अरशद ने मुरादाबाद समेत कई शहरों की रेकी की थी। भीड़भाड़ वाले इलाकों की तस्वीरें भी बनाई थीं। मुरादाबाद समेत आस पड़ोस के जिले तो संदिग्ध आतंकियों के निशाने पर नहीं थे। इसकी भी जांच की जा रही है।
टेलीग्राम के जरिए होती थी बात
अरशद वारसी इंजीनियरिंग कर चुका था। वह अपने साथी और आकाओं से टेलीग्राम के जरिए बात करता था। बातचीत होने के बाद आईडी बंद कर देता था और इसके अलावा वह मोबाइल बदलने से पहले ही अपना मोबाइल भी बंद कर देता था। इस जिस कारण दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए को उस तक पहुंचने में मुश्किल हो रही थी।