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मुरादाबाद मंडल में जगह जगह खुले हैं मौत के मुहाने
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 22 Nov 2016 02:02 AM IST
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क्रॉसिंग
- फोटो : Getty Images
रेलवे क्रासिंग पार करते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं देना जिंदगी के लिए भारी पड़ जाता है। मंडल भर की रेलवे लाइन में करीब 240 स्थानों पर अनमैंड फाटक हैं।
यहां से रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर लाइन क्रास करते हैं। मंडल को मुख्यालय से तीन साल में सभी अनमैंड फाटक खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। मुरादाबाद रेल मंडल में सोमवार सुबह अनमैंड फाटक से ट्रैक पार करते समय बोलेरो सवार पिता पुत्र की ट्रेन से टक्कर लगने से मौत हो गई।
मंडल में हर साल इन अनमैंड फाटकों पर दर्जनों लोग जान गवांते हैं। मंडल में सात सौ ज्यादा फाटक हैं। इनमें से अभी 240 अनमैंड क्रासिंग हैं। इन क्रासिंग से गुजरने वाले लोगाें को सुरक्षा के लिहाज से संकेतक भी बनाए जाते हैं। लेकिन ठंड के दिनों में कोहरा आने पर अनमैंड फाटक पार करना हमेशा खतरा का कारण बन जाता है।
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ट्रेन के आने का पता नहीं चलता और हादसा हो जाता है। मुरादाबाद में इस साल एक दर्जन से ज्यादा लोग अनमैंड फाटक से गुजरते समय हुई दुर्घटनाओं में जान गवां चुके हैं। इसी साल मई में शाहजहांपुर में हुए हादसे में स्कूल वैन की ट्रेन से हुई टक्कर में आठ बच्चों की मौत हुई थी।
एक ओर रेलवे की रफ्तार बढ़ाने की बात कर रही है तो दूसरी और अनमैंड फाटक मौत के मुहाने की तरह खुले हुए हैं। इन क्रासिंग को खत्म करने की रेलवे की रफ्तार बेहद धीमी है।
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यहां से रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर लाइन क्रास करते हैं। मंडल को मुख्यालय से तीन साल में सभी अनमैंड फाटक खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। मुरादाबाद रेल मंडल में सोमवार सुबह अनमैंड फाटक से ट्रैक पार करते समय बोलेरो सवार पिता पुत्र की ट्रेन से टक्कर लगने से मौत हो गई।
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मंडल में हर साल इन अनमैंड फाटकों पर दर्जनों लोग जान गवांते हैं। मंडल में सात सौ ज्यादा फाटक हैं। इनमें से अभी 240 अनमैंड क्रासिंग हैं। इन क्रासिंग से गुजरने वाले लोगाें को सुरक्षा के लिहाज से संकेतक भी बनाए जाते हैं। लेकिन ठंड के दिनों में कोहरा आने पर अनमैंड फाटक पार करना हमेशा खतरा का कारण बन जाता है।
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ट्रेन के आने का पता नहीं चलता और हादसा हो जाता है। मुरादाबाद में इस साल एक दर्जन से ज्यादा लोग अनमैंड फाटक से गुजरते समय हुई दुर्घटनाओं में जान गवां चुके हैं। इसी साल मई में शाहजहांपुर में हुए हादसे में स्कूल वैन की ट्रेन से हुई टक्कर में आठ बच्चों की मौत हुई थी।
एक ओर रेलवे की रफ्तार बढ़ाने की बात कर रही है तो दूसरी और अनमैंड फाटक मौत के मुहाने की तरह खुले हुए हैं। इन क्रासिंग को खत्म करने की रेलवे की रफ्तार बेहद धीमी है।