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Moradabad News: सपा की दो चूक...और कानूनी दांव-पेच में फंस गया दफ्तर
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मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी का 31 साल पुराना कार्यालय अब विवाद के घेरे में है। इसका बड़ा कारण खुद पार्टी की प्रशासनिक लापरवाही बन रही है। जिला प्रशासन की ओर से कार्यालय खाली कराने के लिए भेजे गए नोटिस के बाद पार्टी विरोध का झंडा जरूर बुलंद कर रही है लेकिन दस्तावेजों की पड़ताल बताती है कि पार्टी ने संपत्ति प्रबंधन से जुड़े जरूरी नियमों को लंबे समय से नजरअंदाज किया।चक्कर की मिलक स्थित भवन संख्या-4 सपा को वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नाम किराए पर आवंटित किया गया था। अब पार्टी के पास यही पुराना आवंटनपत्र ही एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज के रूप में मौजूद है। जबकि जिला प्रशासन का कहना है कि शासनादेश के अनुसार नजूल की भूमि या किराये की संपत्ति का हर 15 साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
सपा की ओर से इस 31 साल में एक बार भी रिन्यूअल की प्रक्रिया नहीं कराई गई। प्रशासन का मानना है कि यह नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। नगर निगम के अनुसार यदि निर्धारित अवधि में रिन्यूअल नहीं कराया जाए तो संपत्ति का कब्जा वैध नहीं माना जाता। उसे खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
वहीं पार्टी की ओर से दूसरी गंभीर चूक यह रही कि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पार्टी ने संपत्ति का नामांतरण भी नहीं कराया। जबकि किसी व्यक्ति विशेष के नाम आवंटित संपत्ति का उत्तराधिकार या नामांतरण मृत्यु के बाद जरूरी प्रक्रिया होती है। इन दोनों कानूनी चूक ने प्रशासन को यह कहने का आधार दे दिया है कि अब यह कब्जा अवैध श्रेणी में आता है। प्रशासन का दावा है कि नजूल की संपत्ति का अधिकारिक प्रबंधन नगर निगम के पास है। इसी आधार पर नोटिस जारी किया गया है।
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जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने इसे प्रशासनिक दबाव और मनमानी करार दिया है। जानकार मानते हैं कि पार्टी यदि समय रहते रिन्यूअल और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर लेती तो आज यह विवाद खड़ा नहीं होता। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक मामला जरूर पहुंचा है लेकिन अब जब दस्तावेजी स्थिति पार्टी के पक्ष में नहीं दिख रही तो विधिक लड़ाई में उसका पक्ष कमजोर हो सकता है।
किराया भी नहीं ले रहा प्रशासन
सपा दफ्तर का विवाद पिछले साल से ही गहराया हुआ है। तब से ही सपा से निगम ने किराया भी लेना बंद कर दिया था। जिलाध्यक्ष का दावा है कि 250 रुपये में भवन का आवंटन हुआ था लेकिन पिछले कई वर्षों से 900 रुपये किराये के रूप में जमा किए जा रहे हैं। पिछले साल से ही नगर निगम ने किराया लेना भी बंद कर दिया है।
नहीं खाली करेंगे दफ्तर, लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
कार्यालय खाली कराने के प्रशासन के नोटिस के बाद सपा ने आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया है। जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव का कहना है कि वह कार्यालय खाली नहीं करेंगे। कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने इस मामले से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी अवगत करवा दिया है। जिलाध्यक्ष को शुक्रवार की शाम जिला प्रशासन ने नोटिस थमाया। इस पर उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक अफसरों की मनमानी है। अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी विधिक राय ले रही है और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार कर रही है।
जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर कार्यकर्ता नाराज
सपा कार्यकर्ताओं में भी इस प्रकरण को लेकर नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जबरन कार्यालय छीनने की कोशिश की जा रही है। यह पूरी कार्रवाई राजनैतिक उद्देश्य के साथ हो रही है। ऐसी परंपरा नहीं होनी चाहिए। सांसद और विधायकों की खामोशी पर भी कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कई नेता ऐसे हैं, जो देश भर के मुद्दे पर अपने विचार रखते हैं लेकिन अपने कार्यालय को बचाने पर चुप्पी साधे हुए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सांसद, पूर्व सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को भी सामने आना चाहिए। कार्यालय को बचाने की लड़ाई लड़नी चाहिए।
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सपा की ओर से इस 31 साल में एक बार भी रिन्यूअल की प्रक्रिया नहीं कराई गई। प्रशासन का मानना है कि यह नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। नगर निगम के अनुसार यदि निर्धारित अवधि में रिन्यूअल नहीं कराया जाए तो संपत्ति का कब्जा वैध नहीं माना जाता। उसे खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
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वहीं पार्टी की ओर से दूसरी गंभीर चूक यह रही कि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पार्टी ने संपत्ति का नामांतरण भी नहीं कराया। जबकि किसी व्यक्ति विशेष के नाम आवंटित संपत्ति का उत्तराधिकार या नामांतरण मृत्यु के बाद जरूरी प्रक्रिया होती है। इन दोनों कानूनी चूक ने प्रशासन को यह कहने का आधार दे दिया है कि अब यह कब्जा अवैध श्रेणी में आता है। प्रशासन का दावा है कि नजूल की संपत्ति का अधिकारिक प्रबंधन नगर निगम के पास है। इसी आधार पर नोटिस जारी किया गया है।
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जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने इसे प्रशासनिक दबाव और मनमानी करार दिया है। जानकार मानते हैं कि पार्टी यदि समय रहते रिन्यूअल और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर लेती तो आज यह विवाद खड़ा नहीं होता। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक मामला जरूर पहुंचा है लेकिन अब जब दस्तावेजी स्थिति पार्टी के पक्ष में नहीं दिख रही तो विधिक लड़ाई में उसका पक्ष कमजोर हो सकता है।
किराया भी नहीं ले रहा प्रशासन
सपा दफ्तर का विवाद पिछले साल से ही गहराया हुआ है। तब से ही सपा से निगम ने किराया भी लेना बंद कर दिया था। जिलाध्यक्ष का दावा है कि 250 रुपये में भवन का आवंटन हुआ था लेकिन पिछले कई वर्षों से 900 रुपये किराये के रूप में जमा किए जा रहे हैं। पिछले साल से ही नगर निगम ने किराया लेना भी बंद कर दिया है।
नहीं खाली करेंगे दफ्तर, लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
कार्यालय खाली कराने के प्रशासन के नोटिस के बाद सपा ने आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया है। जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव का कहना है कि वह कार्यालय खाली नहीं करेंगे। कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने इस मामले से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी अवगत करवा दिया है। जिलाध्यक्ष को शुक्रवार की शाम जिला प्रशासन ने नोटिस थमाया। इस पर उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक अफसरों की मनमानी है। अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी विधिक राय ले रही है और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार कर रही है।
जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर कार्यकर्ता नाराज
सपा कार्यकर्ताओं में भी इस प्रकरण को लेकर नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जबरन कार्यालय छीनने की कोशिश की जा रही है। यह पूरी कार्रवाई राजनैतिक उद्देश्य के साथ हो रही है। ऐसी परंपरा नहीं होनी चाहिए। सांसद और विधायकों की खामोशी पर भी कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कई नेता ऐसे हैं, जो देश भर के मुद्दे पर अपने विचार रखते हैं लेकिन अपने कार्यालय को बचाने पर चुप्पी साधे हुए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सांसद, पूर्व सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को भी सामने आना चाहिए। कार्यालय को बचाने की लड़ाई लड़नी चाहिए।