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Moradabad News: दिव्यांगों के लिए 14 करोड़ से बनेंगे दो सुगम्य शिक्षा केंद्र
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मुरादाबाद। मूकबधिर, दृष्टिबाधित व अन्य दिव्यांग बच्चों के लिए मंडल मुख्यालय पर नई पहल होने जा रही है। सुगम्य लाइब्रेरी के बाद अब ऑटिज्म केंद्र व सुपर स्पेशलिटी सुगम्य शिक्षा केंद्र खोलने की तैयारी है। नगर निगम की ओर से 10 करोड़ की लागत के ऑटिज्म केंद्र व एक सुपर स्पेशलिटी सुगम्य शिक्षा केंद्र खोला जाएगा।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से चार करोड़ रुपये की लागत से सुगम्य शिक्षा केंद्र का टेंडर जारी हो चुका है। एमडीए द्वारा विकसित किए जा रहे केंद्र पर तहसीलों में स्थापित सुगम्य शिक्षा केंद्रों से निकलने वाले बच्चों के लिए उनकी आवश्यकतानुसार नई तकनीक से थेरेपी दी जाएगी। केंद्र पर विशेषज्ञों की नियुक्ति भी होगी, जिससे भिन्न क्षमता वाले बच्चों को अच्छा प्रशिक्षण मिल सके। यहां लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी।
नगर निगम द्वारा बनाए जाने लाले केंद्र पर इन सभी सुविधाओं के साथ ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के लिए थेरेपी सेंटर शुरू किया जाएगा। फिलहाल तहसीलों में 20-20 बच्चों की क्षमता के साथ सुगम्य लाइब्रेरी संचालित हैं। वहां मूकबधिर, दृष्टिबाधित व अन्य दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन बच्चों में भी कुछ को व्यवहार थेरेपी की जरूरत है, उन्हें मंडल मुख्यालय पर बनाए जा रहे केंद्रों में दाखिला दिया जाएगा।
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कॉक्लियर इम्प्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी मेडिकल सहायता भी
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि भिन्न क्षमता वाले बच्चों को समाज में बराबरी का स्थान दिलाने के लिए सिर्फ उनकी शिक्षा ही नहीं बल्कि चिकित्सा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जनरल हेल्थ केयर एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से किडनी ट्रांसप्लांट, विद्युत दुर्घटना में हाथ-पैर कट जाने पर कृत्रिम अंग, दुर्घटना, ब्रेन हेमरेज व कूल्हा बदलवाने आदि के 24 मरीजों का इलाज कराया गया है। सभी जिलों को इस फंड से कुछ राशि भी दी गई है, जिससे जरूररतमंद बच्चों की चिकित्सकीय सहायता हो सके। चयनित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराने का भी प्लान है।
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जिले में छह से 14 साल वाले 4833 दिव्यांग बच्चे
मुरादाबाद जिले में वर्तमान में छह से 14 वर्ष की आयु के 4633 दिव्यांग बच्चे हैं। इनमें से 1267 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा पा रहे हैं। कमिश्नर ने बताया कि दृष्टिबाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए 11, श्रवणबाधित बच्चों के लिए 18, बौद्धिक क्षमता बाधित बच्चों को लिए 13 प्रशिक्षक कार्य कर रहे हैं। विद्यालयों की संख्या अधिक व विशेष प्रशिक्षकों की संख्या सीमित होने के कारण प्रत्येक दिव्यांग बच्चे तक पहुंच नहीं हो पाती है। वहीं सुगम्य लाइब्रेरी में बच्चों को ब्रेल पुस्तकें, इन्लार्ज प्रिंट पुस्तकें, ब्रेल स्लेट, ब्रेल अक्षरों वाली हिंदी वर्णमाला, स्पीच ट्रेनर, स्पीच मिरर, हियरिंग ऐड, डेजीप्लेयर, पिक्टोरियल चार्ट आदि दिया जा रहा है।
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दिव्यांग बच्चे समाज में बराबरी का हक पा सकें, इसके लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं। इन बच्चों को शिक्षा के साथ चिकित्सा सुविधा देना हमारा उद्देश्य है।
- आंजनेय कुमार सिंह, कमिश्नर
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से चार करोड़ रुपये की लागत से सुगम्य शिक्षा केंद्र का टेंडर जारी हो चुका है। एमडीए द्वारा विकसित किए जा रहे केंद्र पर तहसीलों में स्थापित सुगम्य शिक्षा केंद्रों से निकलने वाले बच्चों के लिए उनकी आवश्यकतानुसार नई तकनीक से थेरेपी दी जाएगी। केंद्र पर विशेषज्ञों की नियुक्ति भी होगी, जिससे भिन्न क्षमता वाले बच्चों को अच्छा प्रशिक्षण मिल सके। यहां लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी।
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नगर निगम द्वारा बनाए जाने लाले केंद्र पर इन सभी सुविधाओं के साथ ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के लिए थेरेपी सेंटर शुरू किया जाएगा। फिलहाल तहसीलों में 20-20 बच्चों की क्षमता के साथ सुगम्य लाइब्रेरी संचालित हैं। वहां मूकबधिर, दृष्टिबाधित व अन्य दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन बच्चों में भी कुछ को व्यवहार थेरेपी की जरूरत है, उन्हें मंडल मुख्यालय पर बनाए जा रहे केंद्रों में दाखिला दिया जाएगा।
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कॉक्लियर इम्प्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी मेडिकल सहायता भी
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि भिन्न क्षमता वाले बच्चों को समाज में बराबरी का स्थान दिलाने के लिए सिर्फ उनकी शिक्षा ही नहीं बल्कि चिकित्सा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जनरल हेल्थ केयर एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से किडनी ट्रांसप्लांट, विद्युत दुर्घटना में हाथ-पैर कट जाने पर कृत्रिम अंग, दुर्घटना, ब्रेन हेमरेज व कूल्हा बदलवाने आदि के 24 मरीजों का इलाज कराया गया है। सभी जिलों को इस फंड से कुछ राशि भी दी गई है, जिससे जरूररतमंद बच्चों की चिकित्सकीय सहायता हो सके। चयनित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराने का भी प्लान है।
जिले में छह से 14 साल वाले 4833 दिव्यांग बच्चे
मुरादाबाद जिले में वर्तमान में छह से 14 वर्ष की आयु के 4633 दिव्यांग बच्चे हैं। इनमें से 1267 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा पा रहे हैं। कमिश्नर ने बताया कि दृष्टिबाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए 11, श्रवणबाधित बच्चों के लिए 18, बौद्धिक क्षमता बाधित बच्चों को लिए 13 प्रशिक्षक कार्य कर रहे हैं। विद्यालयों की संख्या अधिक व विशेष प्रशिक्षकों की संख्या सीमित होने के कारण प्रत्येक दिव्यांग बच्चे तक पहुंच नहीं हो पाती है। वहीं सुगम्य लाइब्रेरी में बच्चों को ब्रेल पुस्तकें, इन्लार्ज प्रिंट पुस्तकें, ब्रेल स्लेट, ब्रेल अक्षरों वाली हिंदी वर्णमाला, स्पीच ट्रेनर, स्पीच मिरर, हियरिंग ऐड, डेजीप्लेयर, पिक्टोरियल चार्ट आदि दिया जा रहा है।
दिव्यांग बच्चे समाज में बराबरी का हक पा सकें, इसके लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं। इन बच्चों को शिक्षा के साथ चिकित्सा सुविधा देना हमारा उद्देश्य है।
- आंजनेय कुमार सिंह, कमिश्नर