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तनाव में लोको पायलट, रिस्क पर चल रही ट्रेनें
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sat, 23 Apr 2016 11:34 AM IST
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ट्रेन
हजारों यात्रियों को सकुशल उनके गंतव्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लोको पायलट्स तनाव में हैं। काम का बोझ ज्यादा है। आराम मिल नहीं पा रहा है। उस पर भी ओवर टाइम करना पड़ा रहा है। तनावभरी ये स्थित ट्रेन ड्राइवरों को बीमार बना रही है। जिससे वे बल्ड प्रेशर, शुगर और दिल की बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
अभी दो दिन पहले ही एक ड्राइवर को चलती ट्रेन हार्ट अटैक पड़ा था। जिससे उनकी मौत हो गई थी। रेलवे ड्राइवरों का मैन्युअल अंग्रेजों के जमाने हैं। जिसमें रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण पद लोको पायलट है। समय के साथ रेल संचालन की तकनीकी पूरी तरह बदल चुकी है। गाड़ियों की संख्या की पहले की तुलना में कई गुना हो गई।
सिग्नल सिस्टम भी बहुत आधुनिक हुआ है। जिससे ड्राइवरों की जिम्मेदारी और भी ज्यादा हो गई है। ड्राइवरों की कमी के कारण कार्यरत पायलटों पर बोझ अधिक हो गया। ट्रेन चलाने के बाद स्वीकृत रेस्ट में भी कमी हो गई है। उन्हें एक ड्यूटी के बाद चार दिन का रेस्ट स्वीकृत है। लेकिन अभी उन्हें केवल डेढ़ दिन का ही आराम मिल रहा है।
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लगातार गाड़ियां चलाने से उन पर मानसिक और शारीरिक तनाव भी बढ़ा है। जिससे हादसों की संख्या भी बढ़ी है और यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा भी।
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अभी दो दिन पहले ही एक ड्राइवर को चलती ट्रेन हार्ट अटैक पड़ा था। जिससे उनकी मौत हो गई थी। रेलवे ड्राइवरों का मैन्युअल अंग्रेजों के जमाने हैं। जिसमें रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण पद लोको पायलट है। समय के साथ रेल संचालन की तकनीकी पूरी तरह बदल चुकी है। गाड़ियों की संख्या की पहले की तुलना में कई गुना हो गई।
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सिग्नल सिस्टम भी बहुत आधुनिक हुआ है। जिससे ड्राइवरों की जिम्मेदारी और भी ज्यादा हो गई है। ड्राइवरों की कमी के कारण कार्यरत पायलटों पर बोझ अधिक हो गया। ट्रेन चलाने के बाद स्वीकृत रेस्ट में भी कमी हो गई है। उन्हें एक ड्यूटी के बाद चार दिन का रेस्ट स्वीकृत है। लेकिन अभी उन्हें केवल डेढ़ दिन का ही आराम मिल रहा है।
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लगातार गाड़ियां चलाने से उन पर मानसिक और शारीरिक तनाव भी बढ़ा है। जिससे हादसों की संख्या भी बढ़ी है और यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा भी।