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किसके दबाव में रोक दी गई फर्जीवाड़े की जांच
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Tue, 09 Feb 2016 02:17 AM IST
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एमडीए में हुए छब्बीस करोड़ के टेंडर फर्जीवाड़े की जांच अंजाम तक पहुंचने से पहले ही रोक दी गई है। फर्जीवाड़े में फंस रहा ठेकेदार मौजूदा प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का करीबी रिश्तेदार है। मंत्री ने रिश्तेदारी तो कबूल की है मगर रिश्तेदार के कारोबार और मामले की जानकारी से इनकार किया है।
लेकिन अफसरों पर पता नहीं कौन सा दबाव है कि एक्शन तो दूर उल्टा ठेकेदार की जीहुजूरी में लग गए हैं। वीसी ने जांच से जुड़े सभी कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण के आला अफसर मामले की लीपापोती में जुटे हैं। जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बावजूद ठेकेदार और तत्कालीन वीसी के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण केंद्र सरकार के अनुदान से दिल्ली रोड पर फाइव स्टार होटल की बगल में दस्तकारों के लिए सोर्सिंग हब एवं वेयर हाउस का निर्माण कर रहा है। प्राधिकरण के तत्कालीन वीसी सीएल शेखर ने दो मार्च 2009 को वीआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को सोर्सिंग हब एंड वेयर हाउस निर्माण के लिए 26 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
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लेकिन एक शिकायत के बाद शासन ने जब इस टेंडर की जांच कराई तो पता चला कि यह टेंडर वीआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को फर्जी कागजों की बुनियाद पर फर्जीवाड़ा करके दिया गया था। जिसमें ठेकेदार और तत्कालीन वीसी सीएल शेखर व प्राधिकरण के कुछ अन्य अधिकारी और इंजीनियर भी शामिल थे। चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह द्वारा की जा रही जांच में यह फर्जीवाड़ा साबित हो चुका है।
नियमानुसार एमडीए को ठेकेदार को तत्कालीन वीसी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। लेकिन वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी का मालिक नसीम अख्तर संभल निवासी कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद का करीबी रिश्तेदार है। लिहाजा सत्ता के दबाव में एमडीए इस घोटाले पर पर्दा डालने में जुटा है।
‘अमर उजाला’ में मामला उछलने के बाद से एमडीए में हड़कंप है। वीसी जेबी सिंह यादव ने जांच फाइल और मामले से जुड़े सभी कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। अघोषित रूप से इस जांच को होल्ड कर दिया गया है। हालांकि कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद साफ कर चुके हैं कि नसीम अख्तर उनके रिश्तेदार जरूर हैं लेकिन उनके कारोबार की न तो उन्हें कोई जानकारी है और न ही उनके कारोबार से कोई वास्ता है।
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लेकिन अफसरों पर पता नहीं कौन सा दबाव है कि एक्शन तो दूर उल्टा ठेकेदार की जीहुजूरी में लग गए हैं। वीसी ने जांच से जुड़े सभी कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण के आला अफसर मामले की लीपापोती में जुटे हैं। जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बावजूद ठेकेदार और तत्कालीन वीसी के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है।
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण केंद्र सरकार के अनुदान से दिल्ली रोड पर फाइव स्टार होटल की बगल में दस्तकारों के लिए सोर्सिंग हब एवं वेयर हाउस का निर्माण कर रहा है। प्राधिकरण के तत्कालीन वीसी सीएल शेखर ने दो मार्च 2009 को वीआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को सोर्सिंग हब एंड वेयर हाउस निर्माण के लिए 26 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
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लेकिन एक शिकायत के बाद शासन ने जब इस टेंडर की जांच कराई तो पता चला कि यह टेंडर वीआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को फर्जी कागजों की बुनियाद पर फर्जीवाड़ा करके दिया गया था। जिसमें ठेकेदार और तत्कालीन वीसी सीएल शेखर व प्राधिकरण के कुछ अन्य अधिकारी और इंजीनियर भी शामिल थे। चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह द्वारा की जा रही जांच में यह फर्जीवाड़ा साबित हो चुका है।
नियमानुसार एमडीए को ठेकेदार को तत्कालीन वीसी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। लेकिन वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी का मालिक नसीम अख्तर संभल निवासी कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद का करीबी रिश्तेदार है। लिहाजा सत्ता के दबाव में एमडीए इस घोटाले पर पर्दा डालने में जुटा है।
‘अमर उजाला’ में मामला उछलने के बाद से एमडीए में हड़कंप है। वीसी जेबी सिंह यादव ने जांच फाइल और मामले से जुड़े सभी कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। अघोषित रूप से इस जांच को होल्ड कर दिया गया है। हालांकि कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद साफ कर चुके हैं कि नसीम अख्तर उनके रिश्तेदार जरूर हैं लेकिन उनके कारोबार की न तो उन्हें कोई जानकारी है और न ही उनके कारोबार से कोई वास्ता है।