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चंदौसी कांड: दो सिपाहियों की हत्या के बाद जंगल में बनाया था ठिकाना
Mon, 22 Jul 2019 05:43 AM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढबारसी (अमरोहा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढबारसी (अमरोहा)
Published by: Abhishek Singh
Updated Mon, 22 Jul 2019 05:43 AM IST
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बदमाशों का ठिकाना
- फोटो : Amar Ujala
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बुधवार को चंदौसी कोर्ट में पेशी के बाद मुरादाबाद लौटते समय दो सिपाहियों की हत्या कर बंदी वैन से फरार हुए तीनों बदमाशों ने शेरगढ़ इमरतपुर के कीकर वन के आश्रम को अपना ठिकाना बनाया था। पुलिस से छिपने के लिए जंगल के बीचों बीच बने इस आश्रम में ही बदमाश रुके थे, लेकिन इसकी भनक पुलिस को लग गई। शनिवार देर रात मुठभेड़ में बदमाश कमल मारा गया।
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मुरादाबाद जेल से बंदी वैन से बुधवार को चौबीस बंदियों को चंदौसी कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। पेशी के बाद बंदियों को वैन से मुरादाबाद लाया जा रहा था। इस दौरान कमल पुत्र जंगबहादुर और शकील पुत्र नूर मोहम्मद निवासी थाना बहजोई गांव रमपुरा, धर्मपाल पुत्र देशराज निवासी थाना बहजोई गांव भरतपुर दो सिपाहियों की हत्या कर बंदी वैन से फरार हो गए। वारदात के बाद पुलिस फरार बदमाशों की धरपकड़ में जुट गई।
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कदम-कदम पर पुलिस नाकाबंदी देख तीनों बदमाशों ने संभल जिले से सटे आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव शेरगढ़ इमरतपुर के कीकर के जंगल में महाराज दाता साईं के आश्रम को अपना ठिकाना बना लिया। जंगल के बीचों बीच बने इस आश्रम में किसी का आना जाना नहीं था। बताया जाता है कि महाराज दाता साईं सोलह जुलाई को गंगा स्नान करने चले गए थे। इसलिए आश्रम खाली पड़ा था। दो दिन बदमाशों को आराम से कट गए।
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शनिवार को पुलिस को इनकी भनक लग गई। मुठभेड़ में बदमाश कमल मारा गया, जबकि शकील और धर्मपाल की तलाश की जा रही है। आश्रम में तीन झोपड़ियां बनाई गई है। आश्रम में चटाई, तख्त, बिस्तर, बाल्टी, हैंडपंप सुविधा थे। थर्माकोल की खाली प्लेट, प्लास्टिक के गिलास मिले थे।
दो साल पहले बना था आश्रम
दाता साईं महाराज ने दो साल पहले शेरगढ़ इमरतपुर के कीकर के जंगल में पदपंश आश्रम की स्थापना की थी। इनका एक आश्रम बदायूं जनपद के नोली हरनाथपुर में भी है। वह एक-एक महीने दोनों आश्रम में रहते हैं। इन दिनों वह गंगा स्नान के लिए गए थे।
शेरगढ़ इमरतपुर से तीन किमी अंदर है आश्रम
पदपंश आश्रम शेरगढ़ इमरतपुर से करीब तीन किमी अंदर कीकर के जंगल के बीच है। ये आश्रम संभल-गंवा रोड से करीब डेढ़ दूर है। आश्रम मेन रोड पर नहीं होने से यहां किसी आना-जाना नहीं होता था।