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Moradabad News: सपा नेताओं के बयान से शासन में मच गया था हड़कंप

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2024 02:10 AM IST
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There was a stir in the government due to the statement of SP leaders
मुरादाबाद।
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जिला जेल में बंद संभल बवाल के आरोपियों से मिलने के बाद सपा नेताओं के दिए बयान के वीडियो वायरल होने पर मुरादाबाद से लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। बयान में संभल बवाल के आरोपियों पर पुलिस की बर्बरता और जेल विजिट रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को साैंपने की बात कही थी। इसके बाद डीएम ने सपा नेताओं की जेल में मिलाई पर जांच बैठा दी थी। जांच के बाद जेलर और डिप्टी जेलर पर गाज गिर गई।

24 नवंबर को संभल हुए बवाल के आरोप में पुलिस ने तीन महिलाओं समेत 27 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। संभल में जेल न होने के कारण सभी को मुरादाबाद जिला जेल में ही रखा गया है। जबकि तीन नाबालिग राजकीय संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। संभल में तनाव को देखे हुए बाहरी लोगों और नेताओं के प्रवेश पर 10 दिसंबर तक पाबंदी लगी है। इस बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संभल बवाल की जांच और पीड़ित परिवारों से मुलाकात के लिए सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में 15 सदस्यों की टीम गठित की थी।
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30 नवंबर को सभी को संभल जाकर बवाल में मारे गए पांचों के परिवार से मुलाकात करनी थी लेकिन नेताओं को संभल नहीं जाने दिया गया। इसके बाद सपा नेताओं ने जेल में बंद बवाल के आरोपियों से मुलाकात की योजना बनाई। सपाई दो दिसंबर को जेल में मुलाकात करने पहुंच गए। पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन, विधायक नवाब जान, समरपाल सिंह, जिला महासचिव मुदस्सिर हुसैन, अथर अंसारी, गुलजार अहमद समेत अन्य सपाइयों ने मुलाकात की थी।
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मुलाकात करने के बाद सपाई जेल से बाहर आए और उन्होंने कहा कि जेल में बंद लोग बेगुनाह हैं। पुलिस पर बर्बरता का आरोप भी लगाया है। डॉ. एसटी हसन ने कहा कि एक व्यक्ति मधुमेह का रोगी है। उसे दवा तक नहीं मिल रही है। वह पूरी रिपोर्ट बनाकर सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष को रिपोर्ट भेजेंगे। इसके बाद सपा नेताओं के बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जिसे लेकर शासन में हड़कंप मच गया। शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब कर ली। आनन फानन में डीएम ने स्थानीय स्तर पर जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेज दी। साथ ही जेल प्रशासन के खिलाफ जांच कराने की मांग की। डीजी जेल के आदेश पर डीआईजी जेल कुंतल किशोर ने जांच की। जांच में जेल प्रशासन का खेल सामने आ गया।

डीआईजी ने जेल पहुंचकर खंगाले रिकार्ड, अधिकारी कर्मचारियों के दर्ज किए बयान

मुरादाबाद। डीजी जेल ने डीआईजी जेल कुंतल किशोर को इस पूरे खेल की जांच के लिए आदेश दिए। डीआईजी ने जेल पहुंचकर जांच की और रिकार्ड खंगालने के साथ ही जेल में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए। करीब चार घंटे चली जांच में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मिलाई पर्ची भी देखीं। इसके अलावा जेल के मुख्य द्वार से लेकर बैरक तक जांच पड़ताल की। संभल हिंसा के आरोपियों के भी बयान दर्ज किए। इसके बाद सामने आया कि सपाइयों की मुलाकात कराने में नियम का पालन नहीं किया गया।

पहले भी जेल अफसरों पर हो चुकी है कार्रवाई

मुरादाबाद। जिला जेल में इससे पहले भी जेल अफसरों और कर्मचारियों का खेल पकड़ा जा चुका है। करीब तीन साल पहले आईजी जेल ने डीआईजी जेल से जांच कराई थी। तब सामने आया था कि जेल में सट्टा खिलवाया जा रहा था। डीआईजी की रिपोर्ट पर ही वरिष्ठ जेल अधीक्षक, तीन डिप्टी जेलर ओर दो बंदी रक्षक का दूसरी जेलों में ट्रांसफर किया गया था।

जनप्रतिनिधि होने के नाते सुना संभल के पीड़ितों का दुख-दर्द : एसटी हसन

मुरादाबाद।
संभल बवाल में जेल भेजे गए आरोपियों से मुरादाबाद जेल में मुलाकात करने के मामले में सपा के पूर्व सांसद डाॅ. एसटी हसन ने सफाई पेश की है। पूर्व सांसद ने बताया कि वह अपने एक साथी के साथ उनकी पत्नी से मुलाकात करने के लिए जेल गए थे। इसी मुलाकात के दौरान उन्होंने संभल के आरोपियों से भी उनका हाल जाना।

पूर्व सांसद ने कहा कि जेल मैनुअल के नियमों के तहत सांसद, पूर्व सांसद, विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों को विशेष प्रोटोकाल मिलता है। वह और उनके दो साथी विधायक इसी प्रोटोकाल के तहत जेल के अंदर दाखिल हुए थे। उनके एक अन्य साथी ने जेल में बंद अपनी पत्नी से मुलाकात के लिए पर्ची भी बनवाई और मोहर भी लगवाई थी। साथी की पत्नी से मिलने के बाद संभल के आरोपियों से भी उनका दर्द जाना था। जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद, पूर्व सांसद या विधायक का हक है कि वह लोगों के दर्द को सुनें। नियम-कानून का पालन करते हुए ही आरोपियों से मुलाकात की गई है।


वहीं, ठाकुरद्वारा के विधायक नवाब जान ने कहा कि इससे पहले भी जनप्रतिनिधि जेल जाकर लोगों के दर्द को सुनते रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते जेल में बंद लोगों का हाल वह सुन सकते हैं। इसके लिए उन्हें विशेष प्रोटोकाल भी मिलता है।
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