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हाईवे पर दो घंटे रहे बवाल जैसे हालात, कांवड़ियों के साथ दौड़ती रही पुलिस
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मुरादाबाद के बाइक सवार दो कांवड़ियों की बस की चपेट में आने से मौत पर अन्य कांवड़ियों के भड़क जाने से दिल्ली हाईवे पर डिडौली क्षेत्र में दो घंटे बवाल जैसे हालात रहे। हादसे का कारण बनी हैदरगढ़ डिपो की रोडवेज में तोड़फोड़ के बाद जब कांवड़ियों के जत्थों ने अन्य बसों को निशाना बनाया तो पुलिस इधर से उधर दौड़ती नजर आई। मौके पर पहुंचे आला अफसर गुस्साए कांवड़ियों समझाकर हालात सामान्य करने में बमुश्किल कामयाब हो सके। इससे करीब दो घंटे बाद माहौल सामान्य हो सका।
ब्रजघाट से गंगाजल लेकर बाइक से मुरादाबाद जा रहे कांवड़िये गौरव और राहुल की हादसे में मौत सोमवार सुबह करीब पांच बजे हुई। हादसा होते ही जिस तेजी से डिडौली पुलिस मौके पर जुटती, उससे ज्यादा तेजी से वहां कांवड़िये जमा हो गए। दो साथियों की मौत से आक्रोश में आए कांवड़ियों ने हादसे की वजह बनी हैदरगढ़ डिपो की बस पर डंडे और पत्थर मारने शुरू कर दिए। आनन-फानन सवारियां बस से बाहर आईं और दूर पहुंचकर खुद को सुरक्षित किया। कांवड़ियों ने इस बस के चालक को घेर लिया और पीटना शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस पहुंच गई और कार्रवाई का भरोसा देते हुए चालक को कांवड़ियों के बीच से निकालने में कामयाब हो गई। चालक को वहां से दूर भेजकर पुलिस गुस्साए कांवड़ियों को साधने में लगी लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हैदरगढ़ डिपो की बस में तोड़फोड़ के बाद पुलिस के समझाने पर कांवड़ियों का जत्था हादसे वाली जगह से मुरादाबाद दिशा में बढ़ गया लेकिन इस बीच मुरादाबाद की ओर से आने वाली छह अन्य बसों को एक-एक कर रुकवाया और उन पर डंडे व पत्थर बरसा कर उनके शीशे तोड़ दिए। गनीमत रही कि इस बीच बस में सवार कोई यात्री जख्मी नहीं हुआ। सभी यात्री भगदड़ जैसी स्थितियों के बीच बसों से बाहर आए। इस बीच अन्य थानों की पुलिस और आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। कांवड़िये चलते-चलते सामने पड़ने वाली बस में तोड़फोड़ कर रहे थे, लिहाजा पुलिस को भी उनके पीछे दौड़ लगानी पड़ी। बमुश्किल अधिकारी कांवड़ियों को समझाने में कामयाब हो सके। बस चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर गुस्साए कांवड़ियों को शांत किया। हादसे के दो घंटे बाद सुबह करीब सात बजे स्थितियां पूरी तरह सामान्य हो पाईं।
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डिडौली क्षेत्र में हाईवे पर हादसे में दो साथियों की जान जाने से गुस्साए कांवड़ियों के तेवर से जहां पुलिस दो घंटे हलकान रही, वहीं यह अवधि उन यात्रियों पर भी भारी पड़ी, जिनकी बसें कांवड़ियों के निशाने पर आई थीं। ये यात्री जैसे-तैसे बस से सुरक्षित बाहर निकलने में तो कामयाब हो गए लेकिन हाईवे पर उनके सुरक्षित बैठने का कोई स्थान नहीं था। इन यात्रियों को काफी बाद में पुलिस दूसरी बसों में सवार करके आगे भेजने में कामयाब हो सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हैदरगढ़ डिपो की जिस बस की चपेट में आकर बाइक सवार दो कांवड़ियों की मौत हुई थी, उस बस में 50 से ज्यादा यात्री थे। कांवड़ियों ने बस पर डंडे बरसाने शुरू किए तो वे घबराकर बस से बाहर भागे। बाहर आने वालों के सामने सुरक्षित तरीके से बैठ पाने का कोई विकल्प नहीं था। इसके चलते वे दहशत के बीच खुली सड़क पर ही मौजूद रहे। ऐसी ही स्थिति उन छह बसों के यात्रियों की भी हुई, जिनकी बसों को कांवड़ियों ने निशाने पर लिया था। आसपास मौजूद लोगों का कहना है कि यात्रियों को डर था कि कहीं वे भी कांवड़ियों के गुस्से का शिकार न हो जाएं। अपने सामान के साथ हाईवे पर सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे यात्रियों को थोड़ी तसल्ली अतिरिक्त पुलिस बल व अधिकारियों के पहुंचने के बाद हुई।
अधिकारियों के समझाने पर जब कांवड़िये शांत हुए तब इन बे-बस यात्रियों की सुध पुलिस ने ली। वैकल्पिक वाहन के रूप में पीछे से आने वाली बसों को रुकवाकर थोड़-थोड़े यात्री उनमें सवार कराके आगे बढ़ाए गए।
थानाध्यक्ष सुनील मलिक ने बताया कि जिस रोडवेज बस से हादसा हुआ था, उसमें 50 से 60 सवारी मौजूद थीं। सभी सुरक्षित बाहर आ गई थीं। उन्हें आगे के सफर के लिए अन्य वाहनों में सवार किया गया। इसी तरह कांवड़ियों के कारण जिन अन्य बसों के संचालन में समस्या आईं, उसके यात्रियों को भी वैकल्पिक वाहनों से आगे भेजा गया।
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ब्रजघाट से गंगाजल लेकर बाइक से मुरादाबाद जा रहे कांवड़िये गौरव और राहुल की हादसे में मौत सोमवार सुबह करीब पांच बजे हुई। हादसा होते ही जिस तेजी से डिडौली पुलिस मौके पर जुटती, उससे ज्यादा तेजी से वहां कांवड़िये जमा हो गए। दो साथियों की मौत से आक्रोश में आए कांवड़ियों ने हादसे की वजह बनी हैदरगढ़ डिपो की बस पर डंडे और पत्थर मारने शुरू कर दिए। आनन-फानन सवारियां बस से बाहर आईं और दूर पहुंचकर खुद को सुरक्षित किया। कांवड़ियों ने इस बस के चालक को घेर लिया और पीटना शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस पहुंच गई और कार्रवाई का भरोसा देते हुए चालक को कांवड़ियों के बीच से निकालने में कामयाब हो गई। चालक को वहां से दूर भेजकर पुलिस गुस्साए कांवड़ियों को साधने में लगी लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हैदरगढ़ डिपो की बस में तोड़फोड़ के बाद पुलिस के समझाने पर कांवड़ियों का जत्था हादसे वाली जगह से मुरादाबाद दिशा में बढ़ गया लेकिन इस बीच मुरादाबाद की ओर से आने वाली छह अन्य बसों को एक-एक कर रुकवाया और उन पर डंडे व पत्थर बरसा कर उनके शीशे तोड़ दिए। गनीमत रही कि इस बीच बस में सवार कोई यात्री जख्मी नहीं हुआ। सभी यात्री भगदड़ जैसी स्थितियों के बीच बसों से बाहर आए। इस बीच अन्य थानों की पुलिस और आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। कांवड़िये चलते-चलते सामने पड़ने वाली बस में तोड़फोड़ कर रहे थे, लिहाजा पुलिस को भी उनके पीछे दौड़ लगानी पड़ी। बमुश्किल अधिकारी कांवड़ियों को समझाने में कामयाब हो सके। बस चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर गुस्साए कांवड़ियों को शांत किया। हादसे के दो घंटे बाद सुबह करीब सात बजे स्थितियां पूरी तरह सामान्य हो पाईं।
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डिडौली क्षेत्र में हाईवे पर हादसे में दो साथियों की जान जाने से गुस्साए कांवड़ियों के तेवर से जहां पुलिस दो घंटे हलकान रही, वहीं यह अवधि उन यात्रियों पर भी भारी पड़ी, जिनकी बसें कांवड़ियों के निशाने पर आई थीं। ये यात्री जैसे-तैसे बस से सुरक्षित बाहर निकलने में तो कामयाब हो गए लेकिन हाईवे पर उनके सुरक्षित बैठने का कोई स्थान नहीं था। इन यात्रियों को काफी बाद में पुलिस दूसरी बसों में सवार करके आगे भेजने में कामयाब हो सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हैदरगढ़ डिपो की जिस बस की चपेट में आकर बाइक सवार दो कांवड़ियों की मौत हुई थी, उस बस में 50 से ज्यादा यात्री थे। कांवड़ियों ने बस पर डंडे बरसाने शुरू किए तो वे घबराकर बस से बाहर भागे। बाहर आने वालों के सामने सुरक्षित तरीके से बैठ पाने का कोई विकल्प नहीं था। इसके चलते वे दहशत के बीच खुली सड़क पर ही मौजूद रहे। ऐसी ही स्थिति उन छह बसों के यात्रियों की भी हुई, जिनकी बसों को कांवड़ियों ने निशाने पर लिया था। आसपास मौजूद लोगों का कहना है कि यात्रियों को डर था कि कहीं वे भी कांवड़ियों के गुस्से का शिकार न हो जाएं। अपने सामान के साथ हाईवे पर सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे यात्रियों को थोड़ी तसल्ली अतिरिक्त पुलिस बल व अधिकारियों के पहुंचने के बाद हुई।
अधिकारियों के समझाने पर जब कांवड़िये शांत हुए तब इन बे-बस यात्रियों की सुध पुलिस ने ली। वैकल्पिक वाहन के रूप में पीछे से आने वाली बसों को रुकवाकर थोड़-थोड़े यात्री उनमें सवार कराके आगे बढ़ाए गए।
थानाध्यक्ष सुनील मलिक ने बताया कि जिस रोडवेज बस से हादसा हुआ था, उसमें 50 से 60 सवारी मौजूद थीं। सभी सुरक्षित बाहर आ गई थीं। उन्हें आगे के सफर के लिए अन्य वाहनों में सवार किया गया। इसी तरह कांवड़ियों के कारण जिन अन्य बसों के संचालन में समस्या आईं, उसके यात्रियों को भी वैकल्पिक वाहनों से आगे भेजा गया।