फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   There is no arrangement of MRI in the district hospital, the patient is upset

जिला अस्पताल में एमआरआई की व्यवस्था नहीं, मरीज परेशान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:15 AM IST
विज्ञापन
There is no arrangement of MRI in the district hospital, the patient is upset
मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल के जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब तीन हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मंडल का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद अभी तक एमआरआई मशीन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। नतीजतन मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि मशीन नहीं होने की वजह से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। इसके बाद पैथोलॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ओपीडी के अलावा दवा वितरण काउंटर पर दोपहर तक लाइन लगी रहती है। सोमवार और शनिवार को 1500 पर्चे बनते हैं, जबकि अन्य दिनों में भी 1100 से 1200 पर्चे बनते हैं। पर्चा काउंटर पर छह कर्मचारी कार्यरत हैं। पर्चा बनवाने में ही मरीजों को डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता है।
विज्ञापन

निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाने को मजबूर मरीज
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 15 मरीज सीटी स्कैन की जांच के लिए आते हैं, जबकि दो से तीन मरीजों को एमआरआई जांच की आवश्यकता होती है। एमआरआई जांच के लिए रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं। अस्पताल में एमआरआई मशीन नहीं होने के कारण मरीज जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाने के लिए मजबूर हैं। निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से दस हजार रुपये तक शुल्क देना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

न्यूरो सर्जन का न होना भी बढ़ाता है दर्द
हादसों में घायल होने के बाद ज्यादातर मरीज निजी अस्पताल में जाने के बजाय जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ही जाते हैं। न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण घायलों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इसके अलावा कॉर्डियोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन भी नहीं हैं। जिला अस्पताल में 48 पदों पर सिर्फ 26 डॉक्टर की तैनात हैं। वहीं, 45 नियमित और 72 संविदा नर्स भी तैनात हैं।
बर्न यूनिट और ट्रामा सेंटर का है भवन
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट और ट्रामा सेंटर का भवन बनकर तैयार हैं, लेकिन यहां पर स्टाफ और संसाधन न होने की वजह से संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह से भी मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यह है प्रमुख विभाग
जिला अस्पताल में इमरजेंसी, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, ओपीडी, आईपीडी, बच्चा वार्ड, एनआरसी, फार्मेसी, ब्लड बैंक।
मरीजों की संख्या के हिसाब से चिकित्सकों की कमी है। इसके अलावा अन्य स्टॉफ भी कम है। इससे व्यवस्थाओं के संचालन में परेशानी होती है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 15 सिटी स्कैन होते हैं। एमआरआई मशीन होती तो मरीजों को सुविधा रहती।
डॉ. राजेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सि अधीक्षक, जिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed