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Moradabad News: इलाज तो मुफ्त है... बस खड़े होकर करें अपनी बारी का इंतजार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:02 AM IST
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The treatment is free... just stand and wait for your turn.
मुरादाबाद। शहर के इकलौते सरकारी राजकीय केजीके होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को तो छोड़िए इंटर्न डॉक्टर तक के लिए बैठने की जगह नहीं है। जैसे-तैसे मरीजों को बैठाया जाता है, लेकिन इंटर्न डॉक्टरों को छह घंटे खड़ा रहना पड़ता है। ऐसे में वह न तो मरीजों की समस्या सुन पाते हैं और न ही इलाज की जानकारी हो पाती है।
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राजकीय केजीके होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी का समय है। यहां सुबह से दोपहर तक मरीजों की भीड़ लगी रहती है। एक दिन में 450 से 500 तक की ओपीडी होती है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
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अस्पताल के एक ही कमरे में चार ओपीडी केबिन और पर्चे बनाने का काउंटर है। इंटर्न का कहना है कि ओपीडी में डॉक्टर के अलावा छह से आठ इंटर्न भी रहते हैं, क्योंकि मरीज से बीमारी के बारे में बात करते समय डॉक्टर के परामर्श और उपचार को जानना उनके लिए जरूरी होता है, लेकिन जगह के अभाव में वह या तो दूर होते हैं या फिर गैलरी में खड़ा होना पड़ता है।
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सिर्फ दो इंटर्न ऑब्जर्वेशन के लिए अंदर रहते हैं, जबकि चार इंटर्न को केबिन के बाहर खड़ा रहना पड़ता है। इसके कारण मरीजों की बीमारी, उसके लक्षण व उपचार आदि की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।

यह बोले इंटर्न
ओपीडी के बाहर खड़े होने की वजह से मरीजों की बीमारी से संंबंधित कुछ चीजें समझ नहीं आती हैं। ओपीडी के बाद अंदर रहने वाले इंटर्न से मरीजों की बीमारी और इलाज के बारे में जानकारी करनी पड़ती है। कुछ और जानना होता है तो डॉक्टर से बात करते हैं। बाहर खड़े होने के कारण ऑब्जर्वेशन नहीं कर पाते हैं, सिर्फ केस स्टडी सुन पाते हैं। इसलिए हम रोटेशन से आते हैं। -अन्वेषा, इंटर्न
मरीजों की भीड़ बहुत ज्यादा रहती है। एक दिन में 450 से 500 मरीजों की ओपीडी होती है। इतना बड़ा मेडिकल कॉलेज है तो यहां पर ओपीडी भी बड़ी होनी चाहिए। वर्तमान में ओपीडी में मरीजों या इंटर्न डॉक्टरों के बैठने की बात तो छोड़िए, खड़े रहने तक की जगह नहीं रहती है। कई बार भीड़ बढ़ने पर इंटर्न को सिर्फ केबिन के ही बाहर नहीं, बल्कि गैलरी तक में जाना पड़ जाता है। -अजीम केसर, इंटर्न

मैं तीसरे वर्ष की छात्रा हूं। हमें सुबह नौ से दस बजे तक के लिए ओपीडी में आना होता है। जगह कम और मरीजों की भीड़ ज्यादा होने की वजह से उन्हें ओपीडी के बाहर खड़े रहना पड़ता है। जबकि केस को अच्छे से समझने के लिए मरीज के पास रहना और उनकी बीमारी से संबंधित हिस्ट्री, लक्षण आदि जानना बहुत जरूरी है। -नितिशा त्यागी, छात्रा

नई ओपीडी का प्रस्ताव भेजने के बाद शासन ने कार्यदायी संस्था नामित कर 14 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। संस्था ने अभी काम शुरू नहीं किया है। जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है। नई ओपीडी बनने के बाद जगह की कमी की समस्या दूर हो जाएगी। -डॉ. डीएस कुशवाह, प्राचार्य, राजकीय केजीके होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज
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