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शिक्षिका ने प्रधानाचार्य-निदेशक पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
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मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित समर वैली स्कूल की एक शिक्षिका ने प्रधानाचार्य और निदेशक पर उत्पीड़न का लगाया है। मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से की गई शिकायत में शिक्षिका का कहना है कि उनकी बेटी कक्षा दस की छात्रा है और प्रधानाचार्य दसवीं के परिणाम को चुनौती नहीं दिलवाना चाहते हैं। उनके दबाव की वजह से शिक्षिका ने त्याग पत्र दे दिया है। अब स्कूल शिक्षिका के दोनों बच्चों की टीसी को टाल रहा है और नामांकन भी नहीं दे रहा है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि शिक्षिका के आरोप झूठे हैं। शिक्षिका के दोनों बच्चे पिछले छह वर्षों से स्कूल में फ्री पढ़ रहे हैं।
जीएमडी रोड निवासी शिक्षिका मिन्नी कत्याल ने बताया कि इसी स्कूल में उनके दोनों बच्चे कक्षा सात और कक्षा दस में पढ़ते हैं। 25 जून को वह प्रधानाचार्य के बुलावे पर स्कूल गई थीं तो प्रधानाचार्य ने स्कूल के ब्लैंक लेटर हेड और कागजों पर हस्ताक्षर करने को कहा था। जब इसका कारण पूछा तो प्रधानाचार्य ने कहा कि वह इसलिए हस्ताक्षर करवा रहे हैं, ताकि हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम आने के बाद वह परिणाम के बारे में कोई शिकायत नहीं करेंगी। इसके साथ ही सितंबर में होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देंगे और न ही वह कोई दावा पेश कर सकती हैं।
संदेह होने पर उन्होेंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इस पर स्कूल प्रशासन ने दबाव बनाया तो उन्होंने 26 जून को तीन महीने का नोटिस पीरियड देते हुए त्यागपत्र दे दिया। अब वह अपने दोनों बच्चों का दाखिला किसी अन्य स्कूल में करवाना चाहती हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन बेटी का हाईस्कूल का अनुक्रमांक और दोनों बच्चों की टीसी देने में आनाकानी कर रहा है। शिक्षिका ने प्रधानाचार्य और स्कूल के निदेशक पर बच्चों व खुद के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
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90 फीसदी फीस जमा, लेकिन वेतन दे रहे 35 फीसदी
शिक्षिका मिन्नी का आरोप है कि स्कूल द्वारा शिक्षिकाओं का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। मार्च 2020 से किसी महीने में 35 फीसदी तो किसी महीने में 50 फीसदी वेतन दिया जा रहा है, जबकि अभिभावकों ने अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक 80 से 90 फीसदी फीस जमा कर दी है। शिक्षिका ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
यह बोले प्रधानाचार्य व निदेशक....
शिक्षिका के दोनों बच्चे पिछले छह वर्ष से फ्री पढ़ रहे हैं। हमने किसी शिक्षक को ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर करने को नहीं कहा है। हाईस्कूल के परिणाम से असंतुष्ट विद्यार्थी यदि परीक्षा देते हैं और बेहतर अंक प्राप्त करते हैं तो इसमें स्कूल का ही नाम होगा। हमने भी यही कहा है। किसी छात्र को मना नहीं किया है। शिक्षिका के आरोप झूठे हैं। विद्यालय का नियम है कि आवेदन करने के एक महीने के अंतराल में हम उन्हें टीसी प्रदान करते हैं। ऐसे में शिक्षिका को उनके बच्चों की टीसी दे दी जाएगी। हम लगातार एक ही तारीख पर वेतन देते हैं। पिछले वर्ष महामारी के दौरान अप्रैल से जुलाई तक फीस नहीं आई थी। इसके बावजूद शिक्षकों को वेतन दिया गया था। इसके बाद जब फीस कम आ रही थी तो इस स्थिति से शिक्षकों को अवगत कराया गया था। असंतुष्ट होने पर स्कूल छोड़ने का भी विकल्प दिया था। अभी शिक्षकों को 35 फीसदी वेतन दे रहे हैं। जिस तरह से फीस आती है, उसे वेतन उसी अनुरूप बढ़ा दिया जाता है।
-विशाल उपाध्याय, प्रधानाचार्य, समर वैली स्कूल
आरोप तो कोई किसी पर भी लगा सकता है। मैं कभी शिक्षिका से नहीं मिला हूं। प्रधानाचार्य स्कूल का पूरा ध्यान रखते हैं। वह शिक्षकों के संपर्क में रहते हैं। शिक्षिका के आरोप झूठे हैं।
- करन मनचंदा, निदेशक, समर वैली स्कूल
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जीएमडी रोड निवासी शिक्षिका मिन्नी कत्याल ने बताया कि इसी स्कूल में उनके दोनों बच्चे कक्षा सात और कक्षा दस में पढ़ते हैं। 25 जून को वह प्रधानाचार्य के बुलावे पर स्कूल गई थीं तो प्रधानाचार्य ने स्कूल के ब्लैंक लेटर हेड और कागजों पर हस्ताक्षर करने को कहा था। जब इसका कारण पूछा तो प्रधानाचार्य ने कहा कि वह इसलिए हस्ताक्षर करवा रहे हैं, ताकि हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम आने के बाद वह परिणाम के बारे में कोई शिकायत नहीं करेंगी। इसके साथ ही सितंबर में होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देंगे और न ही वह कोई दावा पेश कर सकती हैं।
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संदेह होने पर उन्होेंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इस पर स्कूल प्रशासन ने दबाव बनाया तो उन्होंने 26 जून को तीन महीने का नोटिस पीरियड देते हुए त्यागपत्र दे दिया। अब वह अपने दोनों बच्चों का दाखिला किसी अन्य स्कूल में करवाना चाहती हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन बेटी का हाईस्कूल का अनुक्रमांक और दोनों बच्चों की टीसी देने में आनाकानी कर रहा है। शिक्षिका ने प्रधानाचार्य और स्कूल के निदेशक पर बच्चों व खुद के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
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90 फीसदी फीस जमा, लेकिन वेतन दे रहे 35 फीसदी
शिक्षिका मिन्नी का आरोप है कि स्कूल द्वारा शिक्षिकाओं का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। मार्च 2020 से किसी महीने में 35 फीसदी तो किसी महीने में 50 फीसदी वेतन दिया जा रहा है, जबकि अभिभावकों ने अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक 80 से 90 फीसदी फीस जमा कर दी है। शिक्षिका ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
यह बोले प्रधानाचार्य व निदेशक....
शिक्षिका के दोनों बच्चे पिछले छह वर्ष से फ्री पढ़ रहे हैं। हमने किसी शिक्षक को ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर करने को नहीं कहा है। हाईस्कूल के परिणाम से असंतुष्ट विद्यार्थी यदि परीक्षा देते हैं और बेहतर अंक प्राप्त करते हैं तो इसमें स्कूल का ही नाम होगा। हमने भी यही कहा है। किसी छात्र को मना नहीं किया है। शिक्षिका के आरोप झूठे हैं। विद्यालय का नियम है कि आवेदन करने के एक महीने के अंतराल में हम उन्हें टीसी प्रदान करते हैं। ऐसे में शिक्षिका को उनके बच्चों की टीसी दे दी जाएगी। हम लगातार एक ही तारीख पर वेतन देते हैं। पिछले वर्ष महामारी के दौरान अप्रैल से जुलाई तक फीस नहीं आई थी। इसके बावजूद शिक्षकों को वेतन दिया गया था। इसके बाद जब फीस कम आ रही थी तो इस स्थिति से शिक्षकों को अवगत कराया गया था। असंतुष्ट होने पर स्कूल छोड़ने का भी विकल्प दिया था। अभी शिक्षकों को 35 फीसदी वेतन दे रहे हैं। जिस तरह से फीस आती है, उसे वेतन उसी अनुरूप बढ़ा दिया जाता है।
-विशाल उपाध्याय, प्रधानाचार्य, समर वैली स्कूल
आरोप तो कोई किसी पर भी लगा सकता है। मैं कभी शिक्षिका से नहीं मिला हूं। प्रधानाचार्य स्कूल का पूरा ध्यान रखते हैं। वह शिक्षकों के संपर्क में रहते हैं। शिक्षिका के आरोप झूठे हैं।
- करन मनचंदा, निदेशक, समर वैली स्कूल